विधानसभा बजट सत्र: सीएम पर बरसीं कांग्रेस विधायक रीटा, मंत्री गहलोत पर हवेलियों पर कब्जे का आरोप
मंडावा विधायक ने अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सीएम भजनलाल और मंत्री अविनाश गहलोत पर गंभीर आरोप लगाए.

Published : February 21, 2026 at 2:13 PM IST
जयपुर : कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और झुंझुनू के प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत पर विधानसभा में गंभीर आरोप लगाए. बजट सत्र में राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान शनिवार को रीटा ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को आमजन से जुड़ा बताते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि से उन्हें मिलने के लिए समय नहीं मिलता. चौधरी ने झुंझुनू प्रभारी मंत्री अविश्वास गहलोत पर हवेलियों पर कब्जे के आरोप लगाए.
सीएम को जनप्रतिनिधियों से मिलने का समय नहीं: मंडावा से कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी ने कहा कि कई बार मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास किया, लेकिन समय नहीं दिया गया. आखिर मुलाकात हुई तो मुख्यमंत्री ने पूछा, आप कहां से हो? उन्होंने इसे गंभीर विषय बताया. कहा-यदि सदन के नेता को ही विधायकों की पहचान नहीं है तो यह चिंता का विषय है. जब सदन का नेता नहीं पहचानते तो मैंने आगे कोई बात नहीं की. जिस काम को लेकर गई थी, वह भी उन्हें नहीं बता पाई. रीटा ने बिसाऊ क्षेत्र का मामला उठाया कि वहां अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति की जमीन पर लगभग 60 वर्षों से कब्जा था. वह खेती कर रहा था. आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर बदलाव कर महज दो दिनों में उस जमीन का नामांतरण अन्य के नाम कर दिया. इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री से समय मांगा. कई बार फोन किए, लेकिन जवाब नहीं मिला. उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें दोपहर में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) बुलाया गया, जहां कई मंत्री और विधायक मौजूद थे. उनके अनुसार, मुख्यमंत्री पहले आरएसएस पदाधिकारियों से मिले. फिर मंत्रियों और भाजपा विधायकों से. अंत में उनसे मुलाकात की. इस दौरान भी उनके मुद्दे का समाधान नहीं हुआ.
मंत्री कर रहे हवेलियों पर कब्जा: कांग्रेस विधायक रीटा ने प्रभारी मंत्री पर मंडावा क्षेत्र में हवेलियों पर कब्जा कराने में लिप्तता का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में ऐतिहासिक हवेलियों पर अवैध कब्जों की शिकायतें मिल रही हैं. इसमें प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत है. उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. चौधरी ने कहा कि बीते दो वर्ष में सरकार ने काम करने के बजाय पूर्ववर्ती सरकार को कोसने में अधिक समय बिताया. अगर यही दो साल जनता के काम में लगाए जाते तो शायद किसी का भला होता.
जमीन घोटाले का मुद्दा गूंजा : राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने बीसलपुर बांध से जुड़े विस्थापितों की जमीन के आवंटन में 400 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. गौतम ने बताया कि वर्ष 1984 में बीसलपुर बांध की परिकल्पना हुई और बांध निर्माण के दौरान किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई. विस्थापित किसानों को मुआवजा और वैकल्पिक भूमि देने का प्रावधान था, लेकिन आरोप है कि सभी पात्र किसानों को आज तक न्याय नहीं मिला. केकड़ी क्षेत्र में केकड़ी से अजमेर रोड पर लगभग पांच किलोमीटर आगे 420 बीघा जमीन बीसलपुर विस्थापितों के लिए आरक्षित की गई थी. इस जमीन का बाजार मूल्य करीब एक करोड़ रुपए प्रति बीघा बताया गया. आरोप है कि यह जमीन नियमों के विपरीत कांग्रेस नेताओं के करीबी लोगों को आवंटित कर दी गई.गौतम ने दावा किया कि एक ही दिन में 34 खातेदारों ने पावर ऑफ अटॉर्नी अन्य व्यक्तियों को दे दी, जबकि मौके पर उनका वास्तविक कब्जा नहीं था और नामांतरण भी पंचायत स्तर पर नहीं खोला गया. यह पूरा प्रकरण संदिग्ध है. वर्ष 2013 में भाजपा सरकार आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्व सचिव को जांच के निर्देश दिए थे, जिसके बाद लगभग 100 बीघा जमीन वापस राजस्व विभाग के नाम दर्ज हुई.
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हालांकि भाजपा विधायक गौतम के अनुसार, वर्ष 2022 में कांग्रेस सरकार ने जांच बंद कर पुनः जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए. विधायक ने आरोप लगाया कि चरागाह की जमीन भी आवंटित कर दी, जबकि यह पशुओं के चराई के लिए सुरक्षित होती है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसी जमीन किसी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति को दी जा सकती है? गौतम ने सदन में मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, यह स्पष्ट किया जाए कि उस समय कौन कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार था, किन अधिकारियों और नेताओं की भूमिका रही. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

