'बिहार में MY समीकरण की वजह से कांग्रेस हारी', बोले शकील अहमद- मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री घोषित करना बड़ी भूल
बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद से महागठबंधन नेताओं के बयान में तल्खी है. एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर.

Published : December 30, 2025 at 5:27 PM IST
पटना : बिहार में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और बड़े मतों के अंतर से एनडीए को जीत मिली है. राजनीतिक दलों ने हार की समीक्षा भी कर ली है. महागठबंधन के अंदर से विरोध के स्वर उठने लगे हैं. कांग्रेस पार्टी ने हार का ठीकरा राष्ट्रीय जनता दल के माथे मढ़ा है. कांग्रेस नेताओं के बयान से महागठबंधन के अस्तित्व पर ही सवाल उठने लगे हैं.
RJD की भूमिका पर उठे सवाल : 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार में महागठबंधन को करारी हार मिली. राष्ट्रीय जनता दल जहां 25 सीटों पर सिमट गई वहीं कांग्रेस पार्टी को महज 6 सीटें मिली. विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद तमाम राजनीतिक दलों ने समीक्षा किया. समीक्षा के बाद स्थिति स्पष्ट होती दिख रही है. महागठबंधन की अहम सहयोगी पार्टी कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय जनता दल की भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.
'राजद के MY समीकरण ने खेल बिगाड़ा' : कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ शकील अहमद खान ने ईटीवी भारत से खास बातचीत के दौरान कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन की रणनीति ठीक नहीं रही. खास तौर पर सबसे बड़े दल राष्ट्रीय जनता दल की भूमिका संतोषजनक नहीं रही.
''कांग्रेस पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलती थी, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल के माय समीकरण की वजह से स्थितियां बिगड़ गई. राष्ट्रीय जनता दल के साथ होने के चलते कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम और यादव के वोट मिले लेकिन बाकी के वोटर अलग हो गए.''- डॉ शकील अहमद खान, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
'मुकेश सहनी को Dy CM प्रोजेक्ट करना गलत' : डॉ शकील अहमद खान ने कहा कि चुनाव के दौरान कई और अपरिपक्व फैसले लिए गए. जिस तरीके से मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया गया, वह किसी भी तरीके से सही राजनीतिक फैसला नहीं था. हम लोगों के सहमति के बगैर फैसला लिया गया था. मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने की वजह से महागठबंधन को नुकसान हुआ. अल्पसंख्यक समुदाय को इस बात की नाराजगी हुई कि उन्हें उचित भागीदारी नहीं मिली.
पुराने राह पर लौटने की तैयारी में कांग्रेस : डॉ शकील अहमद खान ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि कांग्रेस को अलग राह अख्तियार करनी चाहिए. राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन का कांग्रेस को लगातार नुकसान हो रहा है. हमारा जनाधार के साथ-साथ सीट भी घट रहा है.
''कांग्रेस पार्टी अपने पुराने दौर में लौटना चाहती है. इसके लिए जरूरी है कि पहले जो लोग, समुदाय और जाति का साथ कांग्रेस को मिलता था फिर से उनके साथ मिले. वर्तमान में कांग्रेस को एकला चलो की राह पर चलना चाहिए और संघर्ष का रास्ता चुनना चाहिए. यह मेरी व्यक्तिगत राय नहीं है. केंद्रीय नेतृत्व की सहमति भी इस मुद्दे पर है.''- डॉ शकील अहमद खान, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
थर्ड फ्रंट का विकल्प बेहतर : डॉ शकील अहमद खान ने कहा कि वाम दलों के साथ हमारा गठबंधन लंबे समय तक चल सकता है. उनकी विचारधारा और हमारी विचारधारा एक तरह की है. कांग्रेस नेता ने थर्ड फ्रंट की ओर इशारा करते हुए कहा कि नेतृत्व इस पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है. राष्ट्रीय जनता दल के साथ कांग्रेस पार्टी का बहुत दूर तक चलना संभव नहीं है. कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव के दौरान सीट शेयरिंग में देरी का भी नुकसान हुआ है.
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