शराबबंदी पर समीक्षा को लेकर बिहार के मंत्री का बड़ा बयान, विधायकों के ब्लड टेस्ट की मांग पर पलटवार
बिहार में शराबबंदी की समीक्षा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप जारी है, वहीं कांग्रेस ने विधायकों के ब्लड टेस्ट की मांग की.

Published : February 18, 2026 at 2:52 PM IST
पटना: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन शराबबंदी को लेकर बिहार सरकार के भाजपा कोटे के मंत्री और सत्ता पक्ष के विधायक के साथ विपक्ष के नेताओं की तरफ से लगातार समीक्षा की मांग हो रही है. कांग्रेस के विधायक अभिषेक रंजन ने तो यहां तक कहा कि यदि माननीय से लेकर पदाधिकारियों का ब्लड टेस्ट हो जाए तो शराबबंदी की हकीकत सामने आ जाएगी.
विधायकों का हो ब्लड टेस्ट- कांग्रेस: कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा में विधायकों का ब्लड टेस्ट किया जाए तो इस कानून की सारी हकीकत सामने आ जाएगी. बिहार में शराब की होम डिलिवरी होती है, डिमांड पर विधानसभा में भी शराब पहुंच जाएगी. कांग्रेस विधायक के इस बयान से बिहार विधानसभा का सियासी माहौल गरमा गया है और सत्ता पक्ष ने निशाना साधा है.
"विधायकों के साथ ही सरकारी कर्मचारी और पुलिस विभाग का ब्लड टेस्ट कराएंगे तो शराबबंदी की पोल खुल जाएगी. इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकार जिस सोच के साथ शराबबंदी लागू की थी, उसमें विफल हुई है. अपनी गलती को मानते हुए सरकार को समीक्षा करनी चाहिए."- अभिषेक रंजन,कांग्रेस विधायक
नेता प्रतिपक्ष का पहले हो टेस्ट: वहीं बिहार सरकार के एससी एसटी मंत्री लखींद्र पासवान ने कांग्रेस विधायक के बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि वह ब्लड टेस्ट के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की जांच होनी चाहिए. किसी को पता है कि कौन शराब पी रहा है तो, नाम बताइये. लखींद्र पासवान ने भी शराबबंदी की समीक्षा को जरूरी बताया है.
"हम जांच के लिए तैयार हैं. पहले तेजस्वी यादव का कराइये. विजय चौधरी के अपने विचार हैं, लेकिन मेरा मानना है कि जिस तरह से बिहार में सूखा नशा का मामला सदन में आया था, उसमें प्रतिबंध हो और शराबबंदी की समीक्षा उस रूप में हो."- लखींद्र पासवान,एससी एसटी मंत्री, बिहार

RLM ने उठाया था मुद्दा: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने मंगलवार को भी विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने ही शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी. बुधवार को एक बार फिर से उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अच्छा फैसला लिया है. कई बार शराबबंदी का संशोधन भी हुआ है, लेकिन इसकी समय-समय पर समीक्षा भी होनी चाहिए.
"शराबबंदी से बिहार को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. बिहार में पूर्ण शराबबंदी पूरी तरह से फेल है. होम डिलीवरी हो रही है और हम लोग तो जांच के लिए हमेशा तैयार हैं."- माधव आनंद ,विधायक, आरएलएम
विजय चौधरी ने कही थी ये बात: मंत्री विजय चौधरी ने कहा था कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू है. इसपर समीक्षा करने की कोई जरूरत नहीं है. वहीं अब मंत्री लखींद्र पासवान ने शराबबंदी पर समीक्षा की वकालत की है.
बिहार में शराबबंदी: साल 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है. तब से लेकर अबतक कानून में कई संशोधन किए गए हैं, लेकिन आजतक पूर्ण शराबबंदी नहीं हो सकी है. प्रदेश में धड़ल्ले से शराब की तस्करी, जहरीली शराब से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. यही कारण है कि इसको लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.
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