क्या झामुमो और राजद ने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रमा खलखो के लिए खड़ी की मुश्किलें? रांची नगर निगम मेयर का चुनाव बना प्रतिष्ठा की लड़ाई
रांची नगर निगम के मेयर पद के लिए कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रमा खलखो ने ईटीवी भारत संवाददाता से विभिन्न मुद्दों पर बात की.

Published : February 18, 2026 at 4:07 PM IST
रांची: रांची नगर निगम के मेयर पद का चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है. इस सीट के लिए कांग्रेस, बीजेपी, जेएमएम और आरजेडी ने अपने समर्थित उम्मीदवार उतारे हैं. शुरू में ऐसा लग रहा था कि बीजेपी और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होगी. लेकिन, जेएमएम और आरजेडी के अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो की मुश्किलें बढ़ गई हैं. ऐसे में ईटीवी भारत के संवाददाता ने रमा खलखो से खास बातचीत की और कई मुद्दों पर उनकी राय जानी.
सवाल यह उठता है कि क्या रांची की पूर्व मेयर और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो की चुनावी नैया मझधार में फंस गई है? इस पर रमा खलखो का कहना है कि हर पार्टी के अपने कार्यकर्ता होते हैं और लोकतंत्र में हर कोई चुनाव लड़ना चाहता है. यह चुनाव किसी पार्टी लाइन पर आधारित नहीं है, इसलिए मझधार में फंसने की कोई बात नहीं है.
रमा खलखो का कहना है कि जनता का झुकाव उनकी तरफ इसलिए है क्योंकि उन्होंने मेयर के तौर पर उनका कार्यकाल देखा है. अगर सहयोगी दलों के साथ तालमेल होता तो बहुत अच्छा होता, लेकिन अगर नहीं भी है तो भी इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ता.
सभी वर्गों का मिल रहा समर्थन
रमा खलखो कहती हैं कि लोग खुद ही अलग-अलग जगहों पर उनके कार्यक्रम तय कर रहे हैं. समाज के किसी भी तबके से हों, जनता और वोटर उनके पक्ष में दिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि आम जनता के अलावा उन्हें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यकों का भी समर्थन और सहयोग मिल रहा है. मेयर के तौर पर उनका पांच साल का कार्यकाल यहां के वोटरों के जेहन में अभी भी ताजा है, इसलिए उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.
नगर निगम चुनाव के दौरान सहयोगी दलों के समर्थित मेयर उम्मीदवार द्वारा उन पर केस करने और जेल भेजने के आरोपों का जवाब देते हुए रमा खलखो ने कहा कि न तो उन्हें और न ही रांची के लोगों को इसकी परवाह है. उस मामले में अभी तक कोर्ट से कोई फैसला नहीं आया है और रांची के लोग जानते हैं कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया था.
रमा खलखो ने कहा कि सहयोगी दलों के किसी बड़े नेता ने उन पर कोई आरोप नहीं लगाया है. बातचीत में रमा खलखो ने कहा कि राजद के स्थानीय छोटे नेताओं ने सुजाता को समर्थन करने का ऐलान किया है, उनके बड़े नेताओं ने कुछ नहीं कहा है.
लोगों से मेरे व्यक्तिगत रिश्ते
क्या रांची मेयर चुनाव में कांग्रेस समर्थित रमा खलखो की उम्मीदवारी से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है? इस सवाल के जवाब में रमा खलखो कहती हैं कि जब भी कोई राजनीतिक दल किसी का समर्थन करती है, तो उस पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लग जाती है, लेकिन मैं रांची के लिए नई नहीं हूं, जहां मैं जा रही हूं, वहां मेरी एक अलग पहचान है. हमने लोगों के लिए काम किया है, और लोगों से मेरे व्यक्तिगत रिश्ते भी हैं. महिला ग्रुप से लेकर हर बिरादरी तक, मेरे व्यवहार और काम से मेरी पहचान बनी है. स्वाभाविक रूप से, एक उम्मीदवार के तौर पर पार्टी का नाम तो मेरे साथ रहेगा ही.
रमा खलखो ने कहा कि यह लोकतंत्र है, चुनाव में प्रत्याशी खड़े होते हैं, और विरोधी भी होते हैं. किसका सामना करना है, इसकी चिंता करने के बजाय, अपनी मेहनत पर फोकस करना है. हम जनता के बीच पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, और रही बात मुकाबले की तो इस बारे में हम कुछ नहीं कहेंगे. मैं अपनी कड़ी मेहनत के बारे में बात करूंगी, कि मैं कड़ी मेहनत से हर जगह जा रही हूं. रांची के लोगों ने पहले मेयर के तौर पर मेरा काम देखा है, और इसीलिए उन्हें उम्मीद है कि वे मुझे फिर से सपोर्ट करेंगे.
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