बदरी-केदार धाम: दान-दर्शन और विवाद, विपक्ष हमलावर, BKTC अध्यक्ष बोले- दोषी को नहीं बख्शेंगे
धामों में श्रद्धालुओं के दान का पैसा वीआईपी पर खर्च करने के मामले पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है. रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 27, 2026 at 3:04 PM IST
देहरादून: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) एक बार फिर चर्चाओं में है. इस बार आरोप थोड़ा गंभीर हैं. आरोप हैं कि श्रद्धालुओं के दान के रुपयों से केदारनाथ धाम में VIP मेहमानों की मेहमाननवाजी की जा रही है, और इस पर अच्छा खासे रुपए खर्च किए गए हैं. इस बात का खुलासा आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है. इस मामले के सामने आने के बाद जहां विपक्ष, सरकार पर हमलावर हो गया है, तो वहीं बीकेटीसी का बयान भी सामने आया है.
दरअसल, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में पूजा-पाठ से लेकर दान तक सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी बदरी-केदार मंदिर समीति यानी बीकेटीसी के पास है. हालांकि, बीते कई वर्षों में यह समिति अपनी व्यवस्थाओं से ज्यादा विवादों को लेकर सुर्खियों में रही है. हर नए विवाद के साथ यह सवाल उठता रहा कि आखिर श्रद्धालुओं की आस्था और दान की रकम का उपयोग किस तरह किया जा रहा है. नए विवाद में इस मामले को और ज्यादा तूल दे दिया है.
आरटीआई से हुआ खुलासा: ताजा विवाद सूचना के अधिकार यानी आरटीआई से सामने आए उन दस्तावेजों को लेकर है, जिनमें दावा किया गया कि कुछ बीजेपी नेताओं के केदारनाथ धाम दौरे और मंदिर दर्शन के दौरान भोजन, आवास और अन्य सुविधाओं का भुगतान मंदिर समिति यानी बीकेटीसी की ओर से किया गया.
मंदिर में चढ़ाए गए दान से नेताओं की मेहमाननवाज़ी: आरोप यह है कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाया गया दान नेताओं की मेहमाननवाजी पर खर्च हुआ. जैसे ही यह मामला सामने आया विपक्ष ने सरकार और मंदिर समिति दोनों को घेरना शुरू कर दिया. सवाल उठाए गए कि आखिर श्रद्धालुओं के दान दिए गए पैसे का इस्तेमाल किस अधिकार से राजनीतिक व्यक्तियों के लिए किया गया.
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर मंदिर समिति की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विपक्ष इसे श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बता रहा है, जबकि बीजेपी इस मामले में जांच कराने की बात कह रही है.
वीआईपी दर्शन पर पहले भी उठते रहे सवाल: चारधाम यात्रा में वीआईपी संस्कृति लंबे समय से विवाद का विषय रही है. आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े होकर दर्शन करते हैं, जबकि नेता, बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को सीधे गर्भगृह तक पहुंचाने के आरोप लगातार लगते रहे हैं. कई बार सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें आम भक्तों को रोककर वीआईपी मूवमेंट कराया गया.

तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों ने भी इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई थी. उनका कहना था कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं, लेकिन मंदिर समिति लगातार प्रभावशाली लोगों को विशेष सुविधाएं देती रही है. अब नेताओं के खर्च का मामला सामने आने के बाद यह विवाद और ज्यादा गहरा हो गया है. हालांकि आरटीआई में जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनका भी इस मामले पर बयान आया है.
उन्होंने इसे अपने खिलाफ एक साजिश बताया है साथ ही साफ किया है कि उन्होंने अपने खर्च पर ही बाबा केदार के दर्शन किए है. बीकेटीसी की तरफ से उनकी कोई व्यवस्था नहीं की गई थी. फिर भी बीटेकीसी के बिल उनके नाम पर क्यों लगाए गए, इसकी जांच होनी चाहिए.

बता दें कि आरटीआई में जो खुलासा हुआ है, उसके तहत कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के अलावा कई लोगों के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं. इस मामले पर दोनों ही नेता नेहा जोशी और विधायक आशा नौटियाल का बयान आ चुका है. उन्होंने साफ किया है कि उन्होंने केदारनाथ के दर्शन अपने खर्च पर किए थे.
विपक्ष ने साधा निशाना: मामले सामने आने के बाद विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार और बीकेटीसी को कठघरे में खड़ा किया है.
यह शर्मनाक स्थिति है कि बीजेपी नेता भगवान के दर्शन मंदिर समिति और श्रद्धालुओं के दान के पैसों पर कर रहे हैं. मंदिर समिति को तुरंत उन नेताओं को पत्र भेजना चाहिए, जिन पर खर्च किया गया और उनसे पैसा वसूला जाना चाहिए. इससे मंदिर समिति की छवि सुधरेगी और भविष्य में कोई भी राजनीतिक व्यक्ति ऐसी उम्मीद नहीं करेगा कि उसकी यात्रा और दर्शन का खर्च मंदिर समिति उठाएगी. यह श्रद्धालुओं की आस्था के साथ अन्याय है.
- गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस -
पहले भी कई विवाद सामने आ चुके: दरअसल, बीते कुछ सालों में चारधाम यात्रा के दौरान मंदिर परिसर में रील बनाने के काफी मामले सामने आए हैं, जिन पर साधु-संतों ने नाराजगी जताई है. बीकेटीसी ने इस पर लगाम लगाने की बात कही थी. इसके लिए बाकायदा एसओपी भी बनाई गई थी, लेकिन ग्राउंड पर कोई खास रिजल्ट नहीं दिखा.
क्यूआर कोड विवाद ने दान व्यवस्था पर खड़े किए थे सवाल: इससे पहले दान के लिए एक क्यूआर कोड केदारनाथ मंदिर के बाहर लगाया गया था. तब भी भ्रम की स्थिति बनी थी कि इस क्यूआर कोड से दिया जा रहा दान सही जगह जा रहा है या नहीं. तब भी विपक्ष ने इस पूरे मामले पर सवाल खड़े किए थे. हालांकि बाद में विवाद बढ़ने पर उस क्यूआर कोड को हटा लिया गया था.
केदारनाथ गर्भगृह में लगाए गए सोने पर उठा था विवाद: केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में दिवारों पर सोने की परत लगाई गई थी, जिस पर पंडा पुरोहितों के अलावा खुद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल खड़े किए थे. यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना था. मामला 2023 का है. आरोप लगाया गया था कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में दिवारों पर सोने की परत चढ़ाई गई तो वो कुछ समय बाद पीतल में बदल गई थी. इस मामले में जांच भी कराई गई थी. जांच में सभी आरोपी निराधार पाए गए थे.
नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद: नियुक्तियों को लेकर भी बीकेटीसी पर कई बार सवाल खड़े हुए हैं. बीकेटीसी पर आरोप लगते रहे हैं कि मंदिर समिति में पदाधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के परिजनों को नौकरी दी गई. आरोप यह भी लगे कि कुछ नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी की गई और कई लोगों को मोटे वेतन पर रखा गया. विपक्ष ने इसे धार्मिक संस्था में राजनीतिक संरक्षण और भाई-भतीजावाद का उदाहरण बताया था.
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार कहते रहे हैं कि मंदिर समिति धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की सेवा करने वाली संस्था कम और अपने चहेतों की नियुक्तियों का केंद्र ज्यादा बनती जा रही है. इन आरोपों ने समिति की छवि को लगातार नुकसान पहुंचाया.
यह पहला मामला नहीं है, जब बीकेटीसी विवादों में आई हो. कभी क्यूआर कोड विवाद, कभी सोना विवाद, कभी मंदिर परिसरों में रीलबाजी, कभी नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद और अब नेताओं के नाम पर बिलबाज़ी. इस तरह के लगातार सामने आ रहे मामलों ने उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचाया है. सरकार को पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करवानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को सच्चाई पता चल सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके.
- गरिमा दसौनी, कांग्रेस प्रवक्ता -
बीजेपी ने कही जांच कराने की बात: वहीं विपक्षी दलों के आरोपों पर बीजेपी की तरफ से भी बड़ा बयान आया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस मामले की जांच करने की बात कही है.
मंदिर समिति के अध्यक्ष इस मामले की जांच कराने के लिए स्वतंत्र हैं. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यह पता लगाया जाना जरूरी है कि सामने आए बिल असली हैं या फर्जी और आखिर किस स्तर पर यह सब हुआ, जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उसे सजा मिलनी चाहिए. बीजेपी इस मामले में पारदर्शी जांच के पक्ष में है ताकि सच्चाई सामने आ सके.
- महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी -
दोषी को बख्शा नहीं जाएगा: इस मामले को BKTC खुद भी गंभीरता से ले रही है. BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि उनके संज्ञान में ये मामला सोशल मीडिया के जरिए आया है. इसके बाद उन्होंने सभी संबंधित फाइलें और पत्रावलियां तलब की हैं.
RTI और अन्य माध्यमों से जो भी तथ्य सामने आए हैं, उनकी जांच की जा रही है. यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी. मंदिर समिति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी संस्था है और यहां पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है. यदि जांच में कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो चाहे वह वर्तमान में BKTC में तैनात हो या ट्रांसफर होकर कहीं और जा चुका हो, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.
- हेमंत द्विवेदी, BKTC अध्यक्ष -
दरअसल, RTI एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता विकेश नेगी ने एक आरटीआई लगाई थी. आरटीआई के तहत बीकेटीसी के खर्चों की जानकारी मांगी गई थी, जिसके तहत पता चला कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी और बीजेपी महिला नेता नेहा जोशी के केदारनाथ प्रवास के दौरान बीकेटीसी ने करीब 60 हजार रुपए खर्च किए है. इस तरह केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर लगभग 37 हजार 500 रुपये खर्च दर्शाए जाने का दावा किया गया है. वैसे इस मामले में दोनों ही नेताओं नेहा जोशी और विधायक आशा नौटियाल का बयान आया है.
दोनों साफ किया है कि उन्होंने अपने केदारनाथ प्रवास के दौरान बीटेकीसी का कुछ भी खर्च नहीं करवाया है. उन्होंने केदारनाथ की यात्रा अपने खर्च पर की थी. कई और नेताओं के नाम भी इस तरह के सामने आया है, जिन पर बीकेटीसी ने खर्च किया है.
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