पेसा नियमावली को लेकर अर्जुन मुंडा के बयान पर कांग्रेस-झामुमो का पलटवार, कही ये बड़ी बात!
पेसा को लेकर भाजपा नेता अर्जुन मुंडा के बयान पर कांग्रेस-झामुमो ने निशाना साधा है.

Published : January 4, 2026 at 9:38 PM IST
रांची: पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता अर्जुन मुंडा द्वारा आज रविवार को रांची में संवाददाता सम्मेलन कर पेसा नियमावली को लेकर बयान दिया. उन्होंने कहा कि मौजूदा पेसा नियमावली पेसा कानून 1996 की मूल आत्मा का सुनियोजित हत्या करार देने वाला बताया. उनके इस बयान का कांग्रेस और झामुमो के नेताओं ने कठोर शब्दों में निंदा की है.
कांग्रेस के प्रदेश मीडिया विभाग के चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी और झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने प्रेस रिलीज जारी कर अर्जुन मुंडा के बयान को भ्रामक और सत्य से परे करार दिया है. PESA कानून पर बयान अर्जुन मुंडा का बयान दुर्भाग्यपूर्ण, भ्रामक और आदिवासी समाज को गुमराह करने वाला है.
उन्होंने कहा कि आज पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा PESA कानून को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में गठबंधन सरकार पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और राजनीतिक हताशा से प्रेरित हैं. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिनके पास वर्षों तक सत्ता में रहते हुए PESA कानून लागू करने का अवसर था, वे आज उस सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. जिसने पहली बार इस कानून को व्यावहारिक, सहभागी और आदिवासी हितैषी रूप में लागू करने का साहसिक कदम उठाया है.
गठबंधन सरकार स्पष्ट करना चाहती है कि PESA कानून का मसौदा ग्रामसभा, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक विमर्श के बाद तैयार किया गया है. यह कानून आदिवासी एवं मूलवासी समाज को जल, जंगल, जमीन और संसाधनों पर उनका संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करता है.
यह भी उल्लेखनीय है कि अर्जुन मुंडा स्वयं लंबे समय तक राज्य और केंद्र की सत्ता में रहे, लेकिन उस दौरान न तो PESA कानून लागू किया गया और न ही ग्रामसभा को वास्तविक अधिकार दिए गए. आज जब गठबंधन सरकार ने इसे जमीन पर उतारने का काम किया है, तो उस पर सवाल उठाना उनकी राजनीतिक विफलता को छिपाने का प्रयास मात्र है.
गठबंधन सरकार यह स्पष्ट रूप से कहना चाहती है कि PESA कानून आदिवासी एवं मूलवासी स्वशासन की आत्मा है. इसमें किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. सरकार आदिवासी समाज के हितों, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
पेसा नियमावली में ग्राम सभा सर्वोच्च है और रहेगी- विनोद पांडेय
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने अर्जुन मुंडा द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार, भ्रामक और राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताया है. उन्होंने कहा कि भाजपा को आदिवासी हितों की याद आज आ रही है, जबकि उसके लंबे शासनकाल में पेसा कानून को लागू करने की नीयत तक नहीं थी. हेमंत सरकार ने जो काम वर्षों में नहीं हुआ, उसे संवैधानिक दायरे में रहकर पूरा किया है.
विनोद पांडेय ने कहा कि अर्जुन मुंडा स्वयं लंबे समय तक मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रहे. लेकिन उस दौरान पेसा कानून को लागू करने के लिए न नियम बने, न ग्राम सभाओं को अधिकार मिले. आज वही भाजपा राजनीतिक की दुहाई दे रही है. भाजपा ने आदिवासियों को केवल वोट बैंक समझा, जबकि झामुमो ने उन्हें अधिकार संपन्न बनाने का काम किया है.
झामुमो महासचिव ने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली में ग्राम सभा की भूमिका को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत किया गया है. परंपरा, रूढ़ि और स्थानीय स्वशासन की भावना को संविधान के अनुरूप स्पष्ट और व्यावहारिक रूप दिया गया है. भाजपा जानबूझकर भ्रम फैला रही है, ताकि आदिवासी समाज को गुमराह किया जा सके. नियमावली में ग्राम सभा सर्वोच्च है और रहेगी.
विनोद पांडेय ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया से बनी नियमावली को कोल्ड ब्लडेड मर्डर कहना भाजपा की संवैधानिक अज्ञानता और राजनीतिक कुंठा को दर्शाता है. जो लोग वर्षों तक आदिवासी अधिकारों की हत्या करते रहे, उन्हें आज बड़े-बड़े शब्दों का इस्तेमाल करने का नैतिक अधिकार नहीं है.
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार की मंशा शुरू से स्पष्ट रही है. यह सरकार आदिवासी अस्मिता, परंपरा और स्वशासन संवैधानिक संरक्षण दे रही है. भाजपा को यह बात हजम नहीं हो रही. झामुमो ने साफ किया कि पेसा नियमावली को लेकर किसी भी रचनात्मक सुझाव का स्वागत है, लेकिन राजनीतिक दुर्भावना से फैलाए जा रहे भ्रम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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