कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में प्रसव के बाद बिगड़ी प्रसूताओं की तबीयत, 1 की मौत और 5 गंभीर, जांच के आदेश
इस मामले में कोई भी कुछ कहने से बच रहा है. पुलिस हुई एक्टिव. चिकित्सा विभाग ने दिए जांच केआदेश. जानिए पूरा मामला...

Published : May 6, 2026 at 12:19 PM IST
|Updated : May 6, 2026 at 8:54 PM IST
कोटा/जयपुर: मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में अचानक एक प्रसूता की मौत हो गई है, जबकि पांच की हालत गंभीर है. सभी का प्रसव सिजेरियन डिलीवरी के बाद हुआ था. अब इन सभी को किडनी से संबंधित समस्या हो गई है और इन्हें मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल से सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया है. परिजन गंभीर आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि किसी दवा का रिएक्शन हुआ है या फिर इंफेक्शन से यह घटनाक्रम हुआ है. पोस्ट ऑपरेटिव गायनिक वार्ड में यह घटनाक्रम हुआ है, जिसे मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने बंद करवा दिया है.
कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन का कहना है कि घटनाक्रम पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में हुआ है. अचानक से 6 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई थी, जबकि 12 सिजेरियन प्रसव हुए थे. एक प्रसुता की मौत हो गई है, जबकि पांच के किडनी से रिलेटेड प्रॉब्लम हुई है. पूरे मामले में अब जांच कमेटी बैठा दी है. चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा के झालखेड़ा निवासी प्रसूता पायल की मौत मंगलवार को हो गई. जबकि अन्य प्रसूताओं की तबीयत अचानक बिगड़ी है. उनमें कोटा जिले के इटावा इलाके के झाड़ोल निवासी 29 वर्षीय रागिनी मीणा, बरड़ा बस्ती निवासी सुशीला, करवाड़ निवासी चंद्रकला, कोटा शहर के संजय नगर निवासी धन्नी व अनंतपुरा क्रेशर बस्ती निवासी ज्योति शामिल हैं. इन सभी को सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया, जहां नेफ्रोलॉजी के आईसीयू यूनिट में इन्हें एडमिट किया गया है.
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मृतक पायल की ननद टीना का कहना है कि पायल का प्रसव सोमवार, 4 मई को दोपहर में हुआ था, जिसमें बेटे का जन्म हुआ. उसके बाद रात को उनकी तबीयत बिगड़ गई और मंगलवार तड़के उन्होंने दम तोड़ दिया. चिकित्सकों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन वह बच नहीं पाई. चिकित्सकों का कहना है कि अचानक बीपी डाउन हो गया और उन्हें घबराहट और गर्मी लगने लगी थी. इमरजेंसी में भी उन्हें ले जाया गया, लेकिन कुछ नहीं हो सका. इसके बाद हम बॉडी लेकर आ गए. पायल की यह दूसरी डिलीवरी थी. पहली डिलीवरी में नवजात की मृत्यु हो गई थी. वहीं, पूरे मामले में सीआईडी इंटेलिजेंस से लेकर शहर पुलिस भी एक्टिव हो गई है और मौके पर जाकर जानकारियां जुटा रही है.
प्रसूता की मौत के मामले कांग्रेस ने किया घेराव : इस मामले में प्रसूता की मौत के जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कांग्रेस ने की है. प्रिंसिपल का घेराव कांग्रेस नेताओं ने जिला अध्यक्ष राखी गौतम के नेतृत्व में किया. जिला अध्यक्ष गौतम ने कहा कि ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं के इलाज में एक महिला की मौत अन्य के किडनी रोग से ग्रसित होने की घटना दुखद है. डॉक्टर व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ही जान गई है. अन्य सीरियस हैं.
ऐसे लापरवाह डाक्टर्स व कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से उनको जांच होने तक निलंबित किया, जिससे जांच प्रभावित न हो. दोषियों के खिलाफ कठोर एक्शन लिया जाए. इस मामले में उच्चस्तरीय मजिस्ट्रेट जांच हो. मृतका के परिवार जनों को 10 लाख का मुआवजा दिया जाए और लापरवाही के चलते गंभीर रूप से ग्रसित महिलाओं को 5 लाख का मुआवजा मिले. उनका पूरा इलाज हो.

परिजनों को 24 घंटे गुमराह करता रहा प्रशासन : विधायक शांति धारीवाल ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. शांति धारीवाल ने बयान जारी कर कहा कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है. अस्पतालों में न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही जिम्मेदाराना रवैया. उन्होंने आरोप लगाया कि कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लापरवाही के चलते एक प्रसूता की जान चली गई, जबकि 5 महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है.
धारीवाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को करीब 24 घंटे तक गुमराह किया गया. समय पर सही जानकारी और इलाज नहीं मिलने से हालात बिगड़ते चले गए. चिकित्सक भी इस बात को मान रहे हैं कि लापरवाही हुई है और जांच कमेटी गठित की गई है. उनको बेहतर इलाज दिया जाए.
चिकित्सा विभाग ने दिए जांच के आदेश, SMS से 4 चिकित्सकों की टीम कोटा भेजी : जयपुर-कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार के दौरान प्रसूताओं का स्वास्थ्य बिगड़ने के मामले के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने घटना की पूरी जानकारी लेकर प्रसूताओं के उपचार में सहयोग के लिए सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से 4 विशेषज्ञ चिकित्सकों का दल तत्काल कोटा भेजने के निर्देश दिए हैं. साथ ही प्रकरण की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच करने के भी निर्देश दिए गए हैं.
चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि घटना के तुरंत बाद इन प्रसूताओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोटा में ही सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (SSB) के नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है. सभी प्रसूताओं की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई : राठौड़ ने बताया कि प्रसूताओं के उपचार में सहयोग के लिए सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर से 4 विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को कोटा भेजा गया है. इनमें निश्चेतना विभाग के डॉ. निहार शर्मा, मेडिसिन विभाग के डॉ. सुनील कुमार महावर, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉ. पवन अग्रवाल, नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव कुमार शर्मा शामिल हैं. यह टीम मौके पर पहुंचकर उपचार एवं जांच प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करेगी तथा पूरे मामले का विस्तृत मूल्यांकन करेगी. साथ ही, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं अन्य अधिकारियों को प्रसूताओं को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने एवं उनके स्वास्थ्य की सघन मॉनिटरिंग के लिए निर्देश दिए गए हैं.
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि प्रकरण की पूरी जांच करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं. दोषी पाए जाने पर अधिकारियों-कार्मिकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जांच पूरी पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे.

