गोरखपुर में 280 अलोकप्रिय सम्पत्तियों पर मिलेगी छूट; न बिकने की वजह जानेगा GDA, शुरू किया जाएगा रजिस्ट्रेशन
जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल के अनुसार, इन सम्पतियां में वसुंधरा आवसीय योजना और लोहिया आवास योजना में लोगों को फ्लैट मिल सकेंगे.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 5:53 PM IST
गोरखपुर : गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) नई योजनाओं के लांच करने के साथ-साथ पुरानी योजनों में बची हुई संपत्तियों और भवनों को बेचने की तैयारी में जुट गया है. बहुत जल्द इसकी सूचना सार्वजनिक भी हो जाएगी. जीडीए के चेयरमैन ने कहा कि इन संपत्तियों के न बिकने की वजह भी तलाशेंगे.
जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल के अनुसार, इन सम्पतियां में वसुंधरा आवसीय योजना और लोहिया आवास योजना में लोगों को फ्लैट मिल सकेंगे. वसुंधरा योजना में जिन प्लाॅटों की शुरुआती कीमत 50 लाख रुपये थी, वह बढ़कर 90 लाख रुपये तक पहुंच गई. शहर की प्रमुख बाजार गोलघर में स्थित जीडीए टावर में खाली पड़े कार्यालय के ब्लॉक को भी बेचा जाएगा.
उन्होंने बताया कि जीडीए टावर में कार्यालय ब्लॉक की कीमत करीब सवा करोड़ पहुंच गई है, जबकि गोलघर जैसी प्रमुख बाजार में इन संपत्तियों को बिक जाना चाहिए था. उन्होंने बताया कि वसुंधरा एन्क्लेव के फेज एक, दो और तीन, बुद्धा मिनी मार्ट देवरिया बाईपास, बुद्ध विहार पार्ट ए और शॉपिंग सेंटर, वैशाली आवासीय योजना, राप्ती नगर के विभिन्न योजनाओं में लोगों को फ्लैट और आवास और कामर्शियल को सस्ते दामों में बेचा जाएगा. इन संपत्तियों की कीमत करीब 225 करोड़ रुपये है.
उन्होंने बताया कि शहर में लोगों को अच्छी लोकेशन और सुरक्षित आवासीय योजना में सस्ते में आवास और प्लॉट खरीदने का मौका मिलेगा. प्राधिकरण अपनी विकसित परियोजनाओं की जिन संपत्तियों को तय मूल्य पर बेचने में नाकाम रहा है, उसे अब 25% कम मूल्य पर बिक्री करने के लिए बहुत जल्द टेंडर निकाला जाएगा. करीब 200 आवासीय और 80 से अधिक व्यावसायिक संपत्तियां इस आधार पर बेची जाएंगी.
उन्होंने बताया कि कुछ आवासीय जगहों पर संपत्तियों की बिक्री नहीं होने पर अलोकप्रिय श्रेणी में डाल दिया गया था. ऐसी संपत्ति को बिक्री करने के लिए 25% कम मूल्य पर शासन से स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा था. जिसको कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है. इस संबंध में शासन से निर्देश जारी होते ही संशोधित दर लागू करते हुए इन संपत्तियों के आवंटन के लिए नया पंजीकरण शुरू किया जाएगा. "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर भी लोग संपत्तियां खरीद सकेंगे.
उन्होंने बताया कि यह संपत्तियां करीब एक दशक से बिक्री के लिए अटकी पड़ी हुई हैं, जिसे बेचने के लिए GDA बोर्ड में कम मूल्य करने का प्रस्ताव लाकर इसे पास कराया गया और फिर शासन से भी इस पर स्वीकृति मिल गई है, जिससे अब इन्हें बेचने का रास्ता साफ हो गया है. उन्होंने बताया कि प्राधिकरण वैसे तो हर साल अपनी आवासीय संपत्तियों की कीमत में 10% व्यावसायिक संपत्तियों में 12% की वृद्धि करता है. 2 साल पहले यह 15 और 18% था. लेकिन, जिन संपत्तियों की बेचने की बात हो रही है, वह एक दशक से बिक्री नहीं हो रही हैं. इसलिए यह रास्ता तैयार करना पड़ा है.
GDA चेयरमैन इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि यह प्रक्रिया शासन की एक SOP के जरिए ही अपनाई जा रही है. लेकिन किसी भी संपत्ति के लोकप्रिय होने के कई कारण होते हैं. इनके आस-पास कई पारिस्थितिजन्य कारण और दूरी भी इसके अलोकप्रिय होने का कारण बनता है. उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की यह मूल्यवान सम्पत्ति है. प्राधिकरण के लैंड बैंक सीमित होते जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि कि बोर्ड ने इन संपत्तियों के संबंध में एक विस्तृत कारण को जानने की प्रक्रिया तय की है. इसके बाद में इन्हें बिक्री और छूट के नियमों के साथ ओपन लाॅटरी से अलाॅट करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. एक मुफ्त भुगतान करने वाले को 45 से 90 दिन के भीतर 4 से 6% अतिरिक्त छूट का भी प्रावधान किया जा रहा है.
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