सहायक पुलिसकर्मियों का अनुबंध खत्म होने से बढ़ी चिंता, कई जिलों से क्लोज करने की तैयारी!
झारखंड में सहायक पुलिसकर्मियों का अनुबंध खत्म होने की सूरत में है. प्रशांत कुमार की रिपोर्ट.

Published : August 21, 2026 at 6:52 PM IST
रांचीः झारखंड में अनुबंध पर काम कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों के सामने एक बार फिर भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है.
राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात करीब 2,200 सहायक पुलिसकर्मियों का अनुबंध समाप्त होने की स्थिति में है. कई जगहों पर जवानों को मौखिक रूप से सेवा से क्लोज करने की बात कही जा रही है. वहीं, जमशेदपुर में सहायक पुलिसकर्मियों को बाकायदा पत्र जारी कर क्लोज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
आंदोलन की तैयारी
झारखंड में संविदा पर काम कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों के सामने एक बार फिर भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है. दो बार के जबरदस्त आंदोलन की वजह से सरकार ने सहायक पुलिसकर्मियों का अनुमान बढ़ा दिया था लेकिन अब एक बार फिर सभी पुलिसकर्मियों का अनुबंध खत्म होने के कगार पर पहुच गया है.
ऐसे में एक बार फिर से सहायक पुलिस कर्मियों को एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार होनी शुरू हो चुकी है. सहायक पुलिस कर्मियों का यह कहना है कि वे लोग कुछ दिनों तक इंतजार कर रहे हैं कि शायद सरकार उन पर कोई फैसला ले ले, अगर कोई फैसला नहीं आता है तो वे रांची कूच करेंगे और आंदोलन करेंगे.
जमशेदपुर के 72 सहायक पुलिसकर्मियों को पुलिस केंद्र में बुलाया
सहायक पुलिसकर्मियों को क्लोज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसकी शुरुआत कागज पर जमशेदपुर से की गई है. पूर्वी सिंहभूम जिला में कार्यरत 72 सहायक पुलिसकर्मियों की नौ साल की अनुबंध सेवा अवधि पूरी हो गई. इनमें 22 महिला और 50 पुरुष सहायक पुलिसकर्मी शामिल हैं. सेवा अवधि 11, 12 और 13 अगस्त 2026 को पूरी हो चुकी है.
ऐसे में इस संबंध में पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से 11 अगस्त को पत्र जारी किया गया है. पत्र में बताया गया है कि इन सहायक पुलिसकर्मियों की सेवा अवधि विस्तार को लेकर 4 अगस्त को पुलिस उप-महानिरीक्षक, सिंहभूम (कोल्हान) क्षेत्र, चाईबासा को मार्गदर्शन के लिए पत्र भेजा गया था. हालांकि, अब तक सेवा आगे जारी रखने के संबंध में कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है.
ऐसे में सभी संबंधित सहायक पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से पुलिस केंद्र, जमशेदपुर में योगदान/उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. जिला के थाना, प्रतिष्ठान और विभिन्न कार्यालयों में प्रतिनियुक्त सहायक पुलिसकर्मियों को भी इस आदेश की जानकारी देने को कहा गया है. पत्र में यह भी जिक्र है कि सेवा विस्तार को लेकर पहले ही उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा जा चुका है. अब तक कोई आदेश नहीं मिलने के कारण सहायक पुलिसकर्मियों को पुलिस केंद्र में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है.
कई जिलों में मौखिक आदेश दिया गया
सहायक पुलिसकर्मी संघ के विवेकानंद ने बताया कि जमशेदपुर में बाकायदा पत्र लिखकर हमारे साथियों को क्लोज कर दिया गया है. इसके अलावा गोड्डा दुमका जैसे जिलों में मौखिक रूप से सभी पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में क्लोज करने का निर्देश दिया गया.
वहीं सहायक पुलिसकर्मी लंबे समय से सेवा विस्तार, स्थायी नियुक्ति और सेवा सुरक्षा की मांग करते रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों तक पुलिस विभाग में काम करने के बाद भी उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है. इससे जवानों के साथ-साथ उनके परिवारों में भी चिंता बनी हुई है.
2017 में हुई थी बहाली
झारखंड के नक्सल प्रभावित 12 जिलों में वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने सहायक पुलिसकर्मियों की संविदा के आधार पर बहाली की थी. इनका उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस को सहयोग देना था. वर्तमान में ये जवान दुमका, पलामू, गढ़वा, लातेहार, गिरिडीह, चतरा, सिमडेगा, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में तैनात हैं.
सेवा विस्तार पर स्पष्ट आदेश का इंतजार
अगस्त 2026 में इन सहायक पुलिसकर्मियों के सेवा विस्तार का मामला राज्य सरकार के स्तर पर प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है. हालांकि, जिलों में अनुबंध खत्म होने की स्थिति के कारण जवानों के बीच बेचैनी बढ़ रही है. कई जगहों पर उन्हें मौखिक रूप से सेवा समाप्त होने की जानकारी दी जा रही है, जबकि जमशेदपुर में लिखित आदेश के माध्यम से क्लोज किया गया है.
जवानों का कहना है कि यदि सरकार सेवा विस्तार देना चाहती है तो इसका स्पष्ट आदेश जल्द जारी किया जाना चाहिए, ताकि जिलों में तैनात कर्मियों के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सके. सरकार की ओर से पहले सहायक पुलिसकर्मियों का मानदेय बढ़ाकर 13 हजार रुपये प्रतिमाह करने और पुलिसकर्मियों की तर्ज पर चार हजार रुपये वर्दी भत्ता देने पर सहमति जताई गई थी.
इसके बावजूद जवानों की सबसे बड़ी मांग स्थायी नियुक्ति और सेवा सुरक्षा को लेकर है. सहायक पुलिसकर्मी समय-समय पर रांची के मोरहाबादी मैदान समेत अन्य स्थानों पर आंदोलन कर अपनी मांग सरकार के सामने रखते रहे हैं. उनका कहना है कि केवल मानदेय बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. सरकार को उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए
सरकार के आदेश और जमीन पर स्थिति में अंतर
सरकार और मुख्यमंत्री स्तर से कई बार सहायक पुलिसकर्मियों के सेवा विस्तार की बात कही गई है. लेकिन जिलों में स्पष्ट लिखित आदेश नहीं पहुंचने के कारण स्थिति साफ नहीं हो पा रही है. अब जमशेदपुर में लिखित रूप से क्लोज किए जाने के बाद अन्य जिलों के जवानों की चिंता और बढ़ गई है.
सहायक पुलिसकर्मी अब सरकार के स्पष्ट आदेश का इंतजार कर रहे हैं कि उनका अनुबंध बढ़ाया जाएगा या उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी. साथ ही, वर्षों से सेवा दे रहे इन कर्मियों के स्थायी समायोजन को लेकर भी सरकार की नीति पर उनकी नजर है.
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