अफ्रीकन चीतों के तीसरे घर पर मंडराई काली छाया! पड़ोस में काल के गाल में समाए बाघ
नौरादेही वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में बाघों पर मौत का साया. एक एक कर मध्य प्रदेश में 55 मौतों के बाद एक्सपर्ट अफ्रीकन चीतों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 7, 2026 at 10:59 AM IST
|Updated : January 7, 2026 at 11:23 AM IST
सागर : मध्यप्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में अफ्रीकन चीतों के लाने की तैयारी चल रही है, मध्यप्रदेश सरकार पहले ही नौरादेही को अफ्रीकन चीतों का तीसरा घर घोषित कर चुकी है लेकिन यहां चीतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व के दक्षिण वन मंडल में एक बाघ की पिछले दिनों मौत के बाद से ये सवाल खड़े हुए हैं. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला था कि बाघ की मौत करंट लगने के कारण हुई है. माना जा रहा है कि बाघ का शिकार किया गया था, इन हालातों के बीच नौरादेही में अफ्रीकी चीते कितने सुरक्षित होंगे ये सवाल खड़ा हो गया है.
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट चीतों की सुरक्षा को लेकर चिंतित
नौरादेही तीन जिलों में फैला हुआ है और मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, ऐसे में यहां चीतों के पहुंचने के बाद उनकी सुरक्षा की चिंता लाजमी है. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट बाघ की मौत के बाद मध्य प्रदेश में सक्रिय शिकारी गिरोहों को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ वन विभाग का कहना है कि सुरक्षा को लेकर गश्ती और मुखबिर तंत्र पर काम हो रहा है. इसके साथ ही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी के उपयोग की भी बात कही जा रही है.

प्रदेश में बाघ की 55वीं मौत ने बढ़ाई चिंता
28 दिसंबर 2025 को रविवार के दिन सागर के दक्षिण वन मंडल से लगी राजस्व भूमि पर एक बाघ की मौत की सूचना मिली थी. टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में साल भर में ये 55वें बाघ की मौत थी. घटनास्थल की जांच पड़ताल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला था कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई है. परिस्थितियों के आधार पर शंका व्यक्त की जा रही है कि बाघ का शिकार किया गया होगा. अभी तक वन विभाग ना तो ये पता लगा पाया है कि मारा गया बाघ नौरादेही टाइगर रिजर्व का है या फिर पन्ना टाइगर रिजर्व का.
बाघ खतरे में तो आने वाले चीते कितने सुरक्षित?
बाघ की मौत के बाद नौरादेही टाइगर रिजर्व में बाघ और दूसरे वन्य प्राणियों के अलावा आने वाले मेहमान चीतों की सुरक्षा को लेकर लोग चिंता करने लगे हैं. माना जाता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के चलते इस इलाके में पहले से ही शिकारी गिरोह सक्रिय हैं और शिकार को अंजाम देते रहते हैं. इन शिकारी समूह में पारदी और मोगियां शिकारी समूहों के नाम प्रमुख हैं. खास बात ये है कि ये शिकारी समूह सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं बल्कि पड़ोसी प्रदेश राजस्थान और महाराष्ट्र में भी सक्रिय हैं. ऐसे में वन्यप्राणी प्रेमी और जानकार मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर चिंता करने लगे हैं. खासकर जुलाई 2026 में नौरादेही में पहुंच रहे अफ्रीकन चीतों की सुरक्षा कैसी होगी और इनका कोई खतरा तो नहीं होगा, इस पर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है.

क्या कहते हैं वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट?
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे कहते हैं, '' मध्यप्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व की बात करें, तो नौरादेही टाइगर रिजर्व पन्ना टाइगर रिजर्व के कारीडोर का ही हिस्सा है. पन्ना में 2008 में पूरे बाघों का सफाया हो गया था. इस इलाके में पारदी समूह काफी एक्टिव है. बाघों के शिकार के मामले में पारदियों का बड़ा अपराधिक रिकार्ड है. मेरा मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय तस्करों की गतिविधियां जो हैं, उसमें भारत के लिए खतरे थोड़े कम हुए हैं क्योकिं चाइना टाइगर फार्मिग कर रहा है. लेकिन शिकारियों के पारदी समूह, बहेलिया और मोंगिया वन अपराध की गतिविधियों में काफी सक्रिय हैं.

अभी महाराष्ट्र में बाघों के शिकारी पकडे गए थे, जो मध्यप्रदेश का पारदी समूह था. इसके अलावा राजस्थान और मध्यप्रदेश में मोगिंया शिकारियों का समूह सक्रिय है. खासकर यहां पर पारदी समूह की निगरानी करनी होगी. पुराने शिकारियों की जानकारी लेनी होगी कि वो कहां सक्रिय हैं और क्या कर रहे हैं. यहां सबसे संवेदनशील स्थिति ये है कि पन्ना टाइगर रिजर्व तक के बाघों का मूवमेंट यहां तक होता है, तो बाघों और चीता की सुरक्षा देखकर वनविभाग को निगरानी बढ़ानी पड़ेगी.''

क्या कहता है नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन?
नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. एए अंसारी कहते हैं, '' जहां तक वन्यप्राणियों की सुरक्षा का सवाल है, तो टाइगर रिजर्व या संरक्षित क्षेत्र के सुरक्षा मापदंड से हम लोग समझौता नहीं करते. मुख्य रूप से हमारी पेट्रोलिंग, मुखबिर तंत्र और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए हम उच्च स्तर की तकनीकों का भी इस्तेमाल करते हैं. पिछले कुछ सालों में इन मामलों में हमने अपने आप को काफी मजबूत किया है. हमारे यहां नियमित तौर पर गश्ती होती है. फेज-4 कैमरा के जरिए हम लोग सभी गतिविधियां और रिकार्ड रखते हैं. हर साल में हम लोग एक बार अपने बाघों की गिनती, उनकी पहचान और उनकी टैरेटरी तक पहुंच पाते हैं. इस तरह हम लोग सभी चीजों पर नजर रखते हैं.
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संरक्षित क्षेत्र के बाह हुई बाघ की मौत : वन विभाग
नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. एए अंसारी ने आगे कहा, '' जो बाघ की मौत का मामला है, वो संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर हुई है. ये हम लोगों के लिए एक विषय है कि टाइगर रिजर्व या संरक्षित क्षेत्र के बाहर हमारे वन्यप्राणी कितने सुरक्षित हैं. हम लोग इस पर भी काम कर रहे हैं और इसके तहत हम लोग जागरूकता के कार्यक्रम चला रहे हैं. लोगों को वन्यप्राणियों के महत्व के बारे में बताते हैं. इसके अलावा वन्यप्राणी अगर किसी मवेशी का शिकार करता है या फिर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो हम लोग तुरंत कार्यवाही करते हैं, जिससे किसी के मन में ये ना रहे कि वन्यप्राणियों से हमें नुकसान है.

