पीपलावंड गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत, डीएफओ ने कड़ी कार्रवाई का दिया आश्वासन
डीएफओ ने कहा, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई विधिसम्मत तरीके से हुई, पूरे मामले का सत्यापन सैटेलाइट और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर किया जा रहा.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 4, 2026 at 5:06 PM IST
बस्तर: नक्सलवाद खत्म होने के बाद बस्तर के विकास पर जिला प्रशासन का फोकस है. लंबे वक्त से बस्तर के जंगलों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें भी मिलती रही हैं. ग्रामीण भी शिकायत करते रहे हैं कि कई जगहों पर जंगल की कटाई हो रही है और अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है.
पीपलावंड गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत
गुरुवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए डीएफओ उत्तम गुप्ता ने कहा कि पीपलावंड गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत लेकर कुछ गांव वाले आए हैं. डीएफओ ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की मांग लेकर पिपलावंड के सरपंच भी आए थे. गांव वालों का कहना है कि करीब 350 एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया है जिसे मुक्त कराया जाए.
आज हमको एक ज्ञापन सौंपा गया है. ज्ञापन सौंपने वाले लोगों का कहना है कि पिपलावंड इलाके से लगी जो वन विभाग की जमीन वहां पर तेजी से अतिक्रम किया जा रहा है. पिछले साल भी हमने वहां पर मुहिम चलाकर अतिक्रमण हटाया हटाया गया है. पिछले 2 सालों से छत्तीसगढ़ शासन और वन मंत्री के निर्देश पर अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई की जा रही है: उत्तम गुप्ता, डीएफओ बस्तर
पूर्व में भी हम कर चुके हैं कार्रवाई: DFO
बस्तर DFO उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि पिछले साल भी विभाग की ओर से वहां पर कार्रवाई की गई, इस कार्रवाई में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर वहां रोपण कार्य शुरू किया गया.

पिछले 2 सालों में हमने काफी जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई है. बस्तर साल वृक्षों से भरा पड़ा है, साल पेड़ों से ही यहां की सुंदरता बनी हुई है. हम सैटेलाइट की मदद से भी अपना काम कर रहे हैं. मैं अतिक्रमण करने वालों को चेतावनी देता हूं कि वो कोई भी गलत काम नहीं करें, हम कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार है: उत्तम गुप्ता, डीएफओ बस्तर
सैटेलाइट की ली जा रही मदद
डीएफओ ने कहा कि वन भूमि पर किसी भी नए या पुराने अतिक्रमण के खिलाफ विभाग लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है. और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा. अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई विधिसम्मत तरीके से की गई है, पूरे मामले का सत्यापन सैटेलाइट और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर किया जा रहा है.
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