23 जनवरी से रायपुर में लागू होगी कमिश्नरेट प्रणाली, कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला
रायपुर में नए साल में नई व्यवस्था लागू होने वाली है. अब यहां पुलिस कमिश्नर प्रणाली होगी. इससे पुलिस और मजबूत होगी.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 31, 2025 at 3:05 PM IST
रायपुर: 23 जनवरी से रायपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होगी. कैबिनेट की बैठक में ये अहम फैसला हुआ है. 31 दिसंबर 2025 साल के अंतिम दिन हुई सरकार की कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें रायपुर में कमिश्नर प्रणाली व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया गया.
15 अगस्त को मुख्यमंत्री ने किया था ऐलान: 15 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऐलान किया था कि रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की जाएगी. इसके बाद से लगातार इस पर काम किया जा रहा था. अब 23 जनवरी से ये सिस्टम लागू भी हो जाएगा.

इसे लेकर क्या क्या हुआ: ऐलान के बाद छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया. इस समिति के अध्यक्षता एडीजी प्रदीप गौतम को दी गई है. इनके अलावा रायपुर रेंज के आईजी भी इस टीम में रहे. वहीं DIG संतोष सिंह जो इससे पहले रायपुर के SSP थे, वे भी टीम में रहे.
देश में कब से है यह व्यवस्था?: भारत में पुलिस कमिश्नरेट की व्यवस्था काफी पुरानी है. भारत की आजादी से पहले ही पुलिस कमिश्नरी का प्रारूप रहा है. भारत में पहली पुलिस कमिश्नरी 1864 में कोलकाता में लागू की गई थी. उसके बाद 1866 में ब्रिटिश काल में ही मुंबई और आजादी से कुछ पहले 1939 में चेन्नई में लागू किया गया था. भारत की आजादी के बाद यह व्यवस्था भारत के कई महानगरों में लागू है.

कमिश्नर सिस्टम में पुलिस के पास होते हैं ये अधिकार और पावर
- जिले में हथियार के लाइसेंस, बीयर बार के लाइसेंस के साथ ही धरना प्रदर्शन की अनुमति देने का अधिकार होता है.
- शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित शक्तियां संविधान के तहत पुलिस कमिश्नर के पास होती है.
- पुलिस कमिश्नर के पास कानून व्यवस्था को लागू करने की बड़ी जिम्मेदारी होती है.
- पुलिस विभाग के लिए नीतियां बनाना और उसके लिए व्यवस्थाओं को बनाए रखना पुलिस कमिश्नर के अंदर आता है.
- पुलिस कमिश्नर को उनके तहत आने वाले क्षेत्र के लिए बजट के प्रबंधन की भी जिम्मेदारी होती है.
- कानून के सुचारु रखने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों और सामुदायिक समूहों के साथ सीधे तौर पर जुड़कर काम करने के अधिकार होते हैं.
- पुलिस कमिश्नर के पास भारतीय दंड प्रक्रिया की धारा 107 116 144 145 के तहत अंतिम फैसला लेने का अधिकार होता है.
- इसके लिए उसे किसी जुडिशल मजिस्ट्रेट या एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से अनुमति नहीं लेनी होती है.
- पुलिस कमिश्नर पद के अंदर मजिस्ट्रेट के पावर निहित होते हैं.
- राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गैंगस्टर एक्ट जैसी धाराओं का प्रयोग करने के लिए पुलिस कमिश्नर का आदेश ही अंतिम आदेश होता है.

