ETV Bharat / state

40 किसान, पाइपलाइन का जाल और ₹1 करोड़ का 'पानी पथ', 300 एकड़ सूखे खेतों में लौटी हरियाली

आत्मनिर्भर किसानों की ये प्रेरणादायक कहानी धमतरी जिले के गाड़ाडीह गांव की है. अभिषेक मिश्रा की रिपोर्ट

Lift Irrigation System
लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम (ETV Bharat Chhattisgarh)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 4, 2026 at 3:52 PM IST

8 Min Read
Choose ETV Bharat

धमतरी: एक ओर जहां रोजगार की तलाश में गांवों से शहरों की ओर पलायन लगातार बढ़ रहा है, वहीं धमतरी जिले का एक गांव ऐसा भी है, जहां लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक का गाड़ाडीह गांव आज आत्मनिर्भरता, जनसहयोग और आधुनिक सोच का ऐसा उदाहरण बन चुका है, जिसकी चर्चा अब देश ही नहीं विदेशों तक पहुंच रही है. ईटीवी भारत की टीम ने इस गांव की जमीनी पड़ताल की है.

इरिगेशन सिस्टम ने बदल दी तस्वीर

करीब 1500 की आबादी वाले इस गांव के अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं. गांव में प्रवेश करते ही चारों ओर लहलहाते धान के खेत, पानी से भरे तालाब और समृद्धि की तस्वीर दिखाई देती है. यहां के किसानों की सबसे बड़ी ताकत है गांव में तैयार किया गया लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम, जिसने पूरे गांव की तस्वीर बदल दी.

सामूहिक प्रयास से किसानों ने किया कमाल (ETV Bharat Chhattisgarh)

मॉडल गांव बना गाड़ाडीह

गांव के 21 युवाओं और किसानों ने मिलकर एक ऐसी पहल शुरू की, जिसने गाड़ाडीह को मॉडल गांव बना दिया. समिति के सदस्यों ने पांच-पांच लाख रुपए एकत्रित कर शुरुआत की और किसानों के सहयोग से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि जुटाकर पैरी नदी से सरफेस वाटर के माध्यम से गांव तक पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम तैयार किया.

किसानों ने किया आर्थिक सहयोग

इस कार्य में गांव के किसानों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया. करीब 250 किसानों में से 40 किसानों ने 40 से 50 हजार रुपए तक का आर्थिक सहयोग दिया. आज उन्हीं किसानों को दोनों फसलों के लिए आजीवन मुफ्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है.

Dhamtari Special Story
पैरी नदी से सरफेस वाटर के माध्यम से इरिगेशन लिफ्ट सिस्टम (ETV Bharat Chhattisgarh)

किसी इंजीनियर की नहीं ली गई मदद

सबसे खास बात यह है कि इस पूरे सिस्टम को तैयार करने में किसी इंजीनियर की मदद नहीं ली गई. गांव के युवाओं ने खुद तकनीकी समझ विकसित कर कंट्रोल रूम से लेकर मशीनों तक पूरा सिस्टम तैयार किया.

करीब एक करोड़ रुपए की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में 5-5 एचपी के 16 मशीनें लगाई गई हैं, जिनके जरिए सरफेस वाटर को खेतों तक पहुंचाया जाता है. कंट्रोल रूम में वायरिंग से लेकर मशीनों की व्यवस्था बेहद व्यवस्थित तरीके से की गई है. करीब 2 किलोमीटर तक पाइपलाइन की जाल फैलाई गई है.

Lift Irrigation System
गांव के 250 किसानों ने लगभग 1 करोड़ रुपये चंदा कर बनाया इरिगेशन लिफ्ट सिस्टम (ETV Bharat Chhattisgarh)

यहां 16 मोटर लगे हैं. यहां से 2 किलोमीटर पाइप लाइन विस्तार हुआ है. वहां से डेढ़ से 2 किलोमीटर और पानी खेतों तक जाता है. किसानों को 24 घंटे पानी दे सकते हैं, लेकिन 6 से 7 घंटे बिजली कटौती के दौरान किसानों को पानी नहीं मिल पाता-पंपेश्वर साहू, समिति सदस्य

इरिगेशन सिस्टम का आइडिया कैसे आया

समिति के अध्यक्ष गजेंद्र साहू ने बताया कि गांव के सभी लोग खेती किसानी करते हैं. यहां पानी की समस्या है, नहर भी नहीं है. 1000 फीट तक पानी नहीं निकलता है. गांव के युवा पढ़े लिखे हैं, इसलिए सभी ने इस समस्या से निजात पाने के लिए मंथन किया और योजना बनाई. प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिला.

Lift Irrigation System
नदी का पानी खेतों तक पहुंचाने यहां लगे मोटर पंप (ETV Bharat Chhattisgarh)

गजेंद्र साहू ने बताया कि गांव की समिति ने मिलकर 96 लाख रुपये जमा किए, 4 लाख रुपये अनुदान मिला. 1 करोड़ के आसपास खर्च हुआ. 56 लाख रुपये पाइपलाइन में लगे. 35 लाख मोटर में खर्च हुए और 7 से 8 लाख रुपये लाइन में लगे थे. बिजली के लिए खंभे से लेकर ट्रांसफार्मर तक पूरा पैसा समिति ने खर्च किया. अब सरकारी कोटा के लिए आवेदन किए है.

नदी में 16 पंप लगे है, जो 2 फीट के अंतर में हैं. वहां से पाइप के जरिए 4 किलोमीटर तक पानी पहुंचता है. गांव के सभी किसानों को इसका फायदा मिल रहा है. गांव में लगभग 250 किसान हैं-गजेंद्र साहू, समिति के अध्यक्ष

बरसात में किसी तरह खेती किसानी हो जाती थी, लेकिन गर्मी के दिनों में खेती नहीं हो पाती थी. गांव के ज्यादातर लोग बाहर काम करने चले जाते थे. हमने 21 लोगों का समूह बनाया और किसानों का भी भरपूर सहयोग मिला. अब सभी गांव में मेहनत कर रहे हैं और खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं-प्रवीण कुमार साहू, समिति सदस्य

अब दो फसल ले रहे किसान

गांव के किसानों का कहना है कि पहले यहां पानी की भारी समस्या थी. जहां बोरिंग कराई जाती थी, वहां 1000 फीट नीचे भी पानी नहीं मिलता था. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. आज गांव में साल भर पानी उपलब्ध है और किसान दो फसल लेने लगे हैं.

Lift Irrigation System
गाड़ाडीह गांव के इरिगेशन सिस्टम से 300 एकड़ खेतों को मिल रहा पानी (ETV Bharat Chhattisgarh)

आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत हुए किसान

किसानों ने बताया कि एक एकड़ में करीब 35 क्विंटल तक धान की पैदावार हो रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. बरसात के मौसम में किसान खुद खेती करते हैं, जबकि गर्मी के सीजन में समिति के सदस्य उन किसानों के खेतों में बुवाई करते हैं, जिन्होंने आर्थिक सहयोग नहीं दिया था. समिति के 21 सदस्यों को बुवाई के लिए लगभग 9-9 एकड़ जमीन दी गई है.

Dhamtari Special Story
लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम (ETV Bharat Chhattisgarh)

पलायन रूखा, किसान हुए खुशहाल

गांव के किसान कहते हैं कि पहले जहां खेत सूखे रहते थे, वहीं अब गर्मी में भी खेत लहलहा रहे हैं. यही वजह है कि गांव के लोगों को रोजगार के लिए दूसरे शहरों में पलायन नहीं करना पड़ता.

ढाई से तीन एकड़ में खेती करता हूं. पाइप लाइन से पानी मिलता है. साल में दो फसल लेता हूं- महेश कंवर, किसान

लिफ्ट इरिगेशन से नदी से पाइप लाइन के जरिए खेतों में पानी पहुंचता है, उसी से 3 एकड़ में खेती करते हैं. मैंने भी समिति में पैसे जमा किए है. पानी पर्याप्त मिलता है- ढालूराम, किसान

3 से 4 एकड़ में खेती करता हूं. लिफ्ट इरीगेशन से गर्मी और ठंड में पानी मिल जाता है - लीलेश्वर कंवर, किसान

ऐसे करते हैं मेंटनेंस

समिति के सदस्य बताते हैं कि हर महीने करीब 10 हजार रुपए बिजली बिल आता है. फसलों से होने वाली आमदनी से मेंटेनेंस, बिजली और मजदूरी का खर्च निकाला जाता है. इस इरिगेशन लिफ्ट सिस्टम से करीब 300 एकड़ खेतों में पानी पहुंचाया जा रहा है.

कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा मेंटनेंस में खर्च करना पड़ता है, बिजली बिल देना पड़ता है. 3 साल से यूनिट चल रही है, जिन किसानों ने पैसे दिए हैं, उन्हें आजीवन सुविधा मिलेगी.मेंटनेंस बस देना पड़ेगा- गजेंद्र साहू, समिति के अध्यक्ष

कलेक्टर ने की तारीफ

धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने भी गांव की इस पहल की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि गांव में वाटरशेड और जल प्रबंधन पर किया गया कार्य बेहद सराहनीय है और इस मॉडल को दूसरे गांवों में भी अपनाया जाना चाहिए.

गाड़ाडीह गांव में वॉटर शेड में काम किया जा रहा था. वॉटर शेड के जरिए लगभग 200 एकड़ सिंचित एरिया बढ़ाया गया. पहले यहां सिर्फ एक ही फसल होती थी, लेकिन गांव वालों ने समिति बनाकर लगभग 1 करोड़ रुपये जमा किया. सोलर पंप और दूसरे पंप लगाकर किसान, अच्छी खेती कर रहे हैं. अब दो से तीन फसल ले रहे हैं. किसानों की आय भी दोगुनी हुई है-अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर, धमतरी

अनोखी पहल की देश-विदेश में चर्चा

गाड़ाडीह गांव का यह मॉडल अब चर्चा का विषय बन चुका है. इस अनोखी पहल को देखने देश के कई राज्यों के साथ विदेशों से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं. हाल ही में केंद्र सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी भी गांव का दौरा कर चुके हैं.

Dhamtari Special Story
गांव के युवाओं का बनाया इरिगेशन सिस्टम देखने देश विदेश से पहुंच रहे लोग (ETV Bharat ChhattisETV Bharat Chhattisgarhgarh)

जहां कई सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित नजर आती हैं, वहीं गाड़ाडीह गांव ने यह साबित कर दिया कि यदि गांव के लोग एकजुट होकर काम करें तो आत्मनिर्भरता का सपना सच हो सकता है. जनसहयोग, तकनीक और सामूहिक सोच ने इस गांव को, आज एक आदर्श मॉडल गांव के रूप में पहचान दिलाई है.

Explainer: छत्तीसगढ़ में बूंद बूंद पानी के लिए संघर्ष, 'गंदा' पानी पीने की मजबूरी
धमतरी में विकास को रफ्तार: 9 किलोमीटर फोरलेन सड़क और 2 करोड़ की चौपाटी से बदलेगी शहर की तस्वीर
छत्तीसगढ़ में खाद की सप्लाई के लिए ठोस कदम, खरीफ सीजन में किसानों को नहीं होगी दिक्कत