सरगुजा में सर्दी ने तोड़ा 15 साल पुराना रिकॉर्ड, पारा पहुंचा 3.3, पहाड़ी इलाकों में 1 डिग्री पहुंचा टेंप्रेचर
मौसम वैज्ञानिक आगामी दिनों में शीतलहर में कमी आने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 8, 2026 at 9:18 PM IST
|Updated : January 8, 2026 at 9:27 PM IST
सरगुजा: पश्चिम की ओर से आ रही बर्फीली हवाओं से बुधवार का दिन सीजन का सर्वाधिक ठंडा दिन बन गया है. इस बार जनवरी प्रथम सप्ताह की ठंड ने पिछले 15 सालों का रिकार्ड धवस्त कर दिया है. मौसम वैज्ञानिक आगामी दिनों में शीतलहर के प्रवाह में कमी आने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं.
सरगुजा में सर्दी ने तोड़ा 15 साल पुराना रिकॉर्ड
सरगुजा में आमतौर पर दिसम्बर एवं जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है. इस दौरान शीतलहर का भी प्रकोप होता है, लेकिन इस बार ठंड पिछले वर्षों की तुलना में अधिक कंपकपा रही है, साथ ही नए-नए रिकॉर्ड भी बना रही है. पश्चिमोत्तर से पहुंच रही बर्फीली हवाओं के प्रभाव से बुधवार को न्यूनतम तापमान में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है. न्यूनतम पारा 3.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है.


पहाड़ी इलाकों में 1 डिग्री पहुंचा टेंप्रेचर
इस साल जनवरी प्रथम सप्ताह का न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री है, जो पिछले 15 वर्षों में सर्वाधिक कम है. इसके पूर्व वर्ष 2011 में जनवरी के प्रथम सप्ताह का न्यूनतम औसत तापमान 6.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था. मौसम विज्ञानी एक-दो दिन बाद रात के तापमान में वृद्धि होने के साथ ही शीतलहर के प्रभाव से राहत मिलने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं.
पारा में वृद्धि होने के बावजूद तापमान के 5-6 डिग्री के मध्य रहने की संभावना जताई जा रही है. वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में जनवरी का तीसरा पछुआ विक्षोभ सक्रिय है. विक्षोभ के प्रभाव से शीतलहर के प्रवाह में व्यवधान आएगा जिससे न्यूनतम पारे में वृद्धि होने की संभावना है.


नवम्बर से ही कड़ाके की ठंड
इस बार नवम्बर के महीने से ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है. बार-बार शीतलहर चलने से जनजीवन अलग प्रभावित है. कड़ाके की ठंड से लोगों को स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. इस बार नवम्बर में 11 से 19 नवम्बर तक न्यूनतम पारा में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई थी. लगातार 11 दिनों तक पारा सामान्य से नीचे बना रहा. ऐसी स्थिति 57 सालों बाद निर्मित हुई थी. इसी तरह दिसम्बर में भी लगातार 11 दिनों तक शीतलहर प्रभावी रही तथा न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री नीचे बना रहा.
इस साल जनवरी के प्रारंभ से ही शीतलहर चल रही है. इस बार अत्यधिक ठंड पड़ने के पीछे मौसम विज्ञानी उत्तर भारत में ताकतवर विक्षोभ सक्रिय नहीं होने को भी प्रमुख कारण मान रहे हैं.

मैदानी एवं पठारी क्षेत्रों का बुरा हाल
मौसम विज्ञानी अक्षय मोहन भट्ट ने कहा "इस साल जनवरी प्रथम सप्ताह का न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री है, जो पिछले 15 वर्षों में सर्वाधिक कम है. इसके पूर्व वर्ष 2011 में जनवरी के प्रथम सप्ताह का न्यूनतम औसत तापमान 6.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था. शीतलहर के प्रभाव से मैदानी एवं पठारी क्षेत्रों का बुरा हाल है. मैदानी इलाकों का तापमान 3 डिग्री वही पठारी क्षेत्रों का तापमान 1 से 1.5 डिग्री के मध्य पहुंच गया है. पारा में तेज गिरावट होने के कारण पठारी एवं मैदानी इलाकों में सुबह ओस की बूंदे जमकर बर्फ बन जा रही है. ठंड से बचने शाम होते ही लोग घर में अलाव जला रहे हैं. उत्तर भारत में फिलहाल किसी विक्षोभ के पहुंचने की संभावना नहीं हैं. ऐसे में अब शीतलहर का प्रभाव कम होने की संभावना जताई जा रही है.


