हिमाचल में यहां महिलाओं को मिलेंगे ₹1500, सीएम सुक्खू ने की घोषणा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना के तहत 1500 रुपए देने की घोषणा की.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 26, 2026 at 3:47 PM IST
सोलन: जिला सोलन के कसौली विधानसभा क्षेत्र की महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बड़ी घोषणा की है. वीरवार को नेरी कलां में करोड़ों रुपयों की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करते हुए सीएम सुक्खू ने घोषणा करते हुए कहा कि कसौली विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख 5 पंचायतों की महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना के तहत 1500 रुपए दिए जाएंगे.
"इन पांच पंचायतों में जिन भी महिलाओं की आय सालाना दो लाख रुपए से कम होगी और उनकी आयु 21 साल से ऊपर होगी, उन महिलाओं को 1500 रुपए देने की मैं घोषणा करता हूं." - सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
'महिलाओं को मिलेंगे सालाना 18 हजार'
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सोलन जिले की पहली पांच पंचायतों में पात्र महिलाओं को 1500 रुपए दिए जाएंगे, ऐसे में महिलाओं को साल के 18 हजार रुपए मिलेंगे. उन्होंने कहा कि इससे हमारी माताओं-बहनों को अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करने में सहायता मिलेगी और उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा.
योजना के तहत महिलाओं को राहत
इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए आवेदनकर्ता महिलाओं को सुक्खू सरकार ने बड़ी राहत दी है. अब आवेदनकर्ता महिलाओं को लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और पंचायत स्तर पर होने वाली देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा. सरकार ने आवेदन पत्रों की पंचायतों में होने वाली वेरिफिकेशन प्रक्रिया को समाप्त कर दिया है.
पंचायतों में आवेदन पत्र देने की जरूरत नहीं
ऐसे में अब पात्र महिलाओं को पंचायतों में आवेदन पत्र भेजने की जरूरत नहीं है. महिलाएं अपने आवेदन तहसील कल्याण अधिकारी के ऑफिस में जमा करवाएंगी और वहीं पर उनके डॉक्यूमेंट्स की जांच और वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी की जाएगी. वेरिफिकेशन के बाद पात्र आवेदनों को स्वीकृति के लिए उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाएगा, जहां से मंजूरी मिलते ही लाभार्थी महिलाओं के खाते में 1500 रुपए की मासिक किस्त जारी होना शुरू हो जाएगी.
क्यों पंचायतों में खत्म की वेरिफिकेशन प्रोसेस ?
दरअसल, पिछले कई महीनों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की बैठकों में कोरम पूरा न होने के कारण आवेदन वेरिफिकेशन प्रोसेस में अटक रहे थे. तहसील कल्याण अधिकारियों द्वारा पंचायतों को बेजे गए आवेदन पत्र वेरिफिकेशन के अभाव में पंचायतों कार्यालयों में पड़े रह जाते थे, जिससे पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिलने में देरी हो रही थी. कई महिलाओं को मजबूरन बार-बार ऑफिस के चक्कर काटने पड़ रहे थे, जिससे उनकी उम्मीदें कागजी प्रक्रियाओं में उलझ कर रह गई थी. जिसके चलते प्रदेश सरकार ने पंचायत में वेरिफिकेशन प्रक्रिया को खत्म कर दिया.

