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सेना में खून बहाएं हम, परमवीर चक्र जीते हम और हक भी हमारे छीने जाएं, ऐसा क्यों बोले सीएम सुक्खू

RDG खत्म होने का विरोध हिमाचल सरकार लगातार कर रही है. अब सीएम सुक्खू ने सेना के नायकों के जरिए आरडीजी का जिक्र किया है.

सुखविंदर सिंह सुक्खू
सुखविंदर सिंह सुक्खू (FILE PHOTO)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : March 2, 2026 at 3:03 PM IST

3 Min Read
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शिमला: छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल में इस समय रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) खत्म होने के कारण सरकार को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ सकती है. सीएम सुक्खू भी कई बार आरडीजी बहाल करने की मांग खुले मंच से कर चुके हैं और इसके बहाल न होने से हिमाचल को क्या परेशानियां होंगी इसका जिक्र कई बार कर चुके हैं.

सीएम सुक्खू ने एक बार फिर आरडीजी को हिमाचल का हक बताया है और इसकी बहाली की मांग की है. साथ ही हिमाचल के हित और हकों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है. सीएम सुक्खू ने पोस्ट करते हुए कहा कि 'देश की सुरक्षा में हिमाचल के वीर जवान हर मोर्चे पर चट्टान की तरह डटे रहते हैं और भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं. ऐसे प्रदेश के अधिकारों को छीनना सरासर अन्याय है. हिमाचल की जनता इस भेदभाव को कभी सहन नहीं करेगी। RDG के रूप में हमें हमारा पूरा अधिकार मिलना चाहिए. सबसे ज्यादा परमवीर चक्र जीते हम, सेना में खून बहाए हम और अधिकार हमारे छीने जाएं, जब 10 हजार करोड़ आरडीजी का नहीं मिलता तो इसका भारी नुकसान होता है. स्कूल की बिल्डिंग्स नहीं बनती, सड़कों पर गड्ढे पड़े रहते हैं. आरडीजी बहाल करने के लिए कांग्रेस सरकार बीजेपी के सात सांसदो और 28 विधायकों के नेतृत्व में पीएम मोदी से मिलने के लिए तैयार है.'

हिमाचल को कब कब मिली आरडीजी

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के पास खुद के आर्थिक संसाधन सीमित हैं. हिमाचल को 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था. स्टेटहुड के समय से ही इसे ग्रांट मिलती रही है. छठे फाइनेंस कमीशन के कार्यकाल में 1974-75 से 1978-79 के दौरान हिमाचल को ये ग्रांट मिली थी. उसके बाद 7वें फाइनेंस कमीशन में 1979-80 से 1983-84 के बीच ये ग्रांट 207 करोड़ रुपए थी. वर्ष 1984-1989 के बीच 8वें कमीशन में ये ग्रांट 223 करोड़ रुपए थी. फिर वर्ष 1989-1994 में 9वें फाइनेंस कमीशन में ग्रांट बढ़कर 523 करोड़ रुपए हो गई.

वर्ष 2015-2020 के समय 14वें कमीशन में ये ग्रांट 40,624 करोड़ रुपए थी. इसी बीच, कोविड का संक्रमण हुआ. उस समय वर्ष 2020-2021 में 11,431 करोड़ रुपए की अंतरिम ग्रांट मंजूर हुई थी.पंद्रहवें फाइनेंस कमीशन ने हिमाचल के लिए वर्ष 2021-2026 के बीच 37,199 करोड़ रुपए की ग्रांट हिमाचल को दी. इस ग्रांट से वेतन व पेंशन का खर्च काफी हद तक निकल आता था.

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