हिमाचल में औद्योगिक निवेश की नई राह, ऊना-सोलन में 234 करोड़ के इंडस्ट्रियल पार्क को मंजूरी का इंतजार, रेल कनेक्टिविटी पर भी सुक्खू ने केंद्र से मांगा सहयोग
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने औद्योगिक निवेश और रेल कनेक्टिविटी पर केंद्र से मांगा सहयोग. रश्मिराज भारद्वाज की रिपोर्ट

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 17, 2026 at 10:29 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने और बड़े निवेश को पहाड़ तक खींचने की तैयारी तेज हो गई है. राज्य सरकार ने निवेशकों को तैयार औद्योगिक ढांचा उपलब्ध करवाने की दिशा में ऊना और सोलन में दो बड़े औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखा है. खास बात यह है कि दोनों पार्कों में आधुनिक प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं विकसित करने की योजना है, ताकि उद्योगों को जमीन मिलने के बाद आधारभूत ढांचे के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े. अब इन दोनों प्रस्तावों पर केंद्र की मंजूरी का इंतजार है.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट के सर्वोच्च निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में शिमला से वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लेते हुए केंद्र से इन परियोजनाओं को जल्द स्वीकृति देने का आग्रह किया. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने की. मुख्यमंत्री ने प्रदेश में औद्योगिक विस्तार के लिए विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना विकसित करने की राज्य सरकार की तैयारियों से अवगत करवाया.
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया, "भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के प्रथम चरण के तहत निवेश-तैयार औद्योगिक पार्क विकसित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट को दो प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं".
ऊना में 80 करोड़ का पार्क, सोलन में 154.39 करोड़ का प्रस्ताव
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार जिला ऊना के बीटन गांव में 75 एकड़ क्षेत्र में करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक पार्क विकसित किया जाना प्रस्तावित है. वहीं, जिला सोलन के नालागढ़ स्थित मझोली औद्योगिक क्षेत्र में 150 एकड़ भूमि पर करीब 154.39 करोड़ रुपये की लागत से दूसरा औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है. दोनों परियोजनाओं की कुल प्रस्तावित लागत करीब 234.39 करोड़ रुपये है.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, "इन परियोजनाओं से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और संबंधित क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से दोनों प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी प्रदान करने का आग्रह किया, ताकि परियोजनाओं का कार्यान्वयन जल्द शुरू हो सके".
रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने की भी पैरवी
राज्य सरकार का जोर ऐसे औद्योगिक पार्क तैयार करने पर है, जहां निवेशकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े. प्रस्तावित पार्कों में आधुनिक प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाने की योजना है. इससे नए उद्योगों को तेजी से स्थापित करने और उत्पादन शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
वहीं, मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और परिवहन ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल में रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने तथा बद्दी-नालागढ़ रेल लाइन के विस्तार का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि बेहतर रेल संपर्क से माल ढुलाई की लागत कम होगी और उद्योगों को बड़े बाजारों तक आसान पहुंच मिल सकेगी. इससे विनिर्माण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और प्रदेश में निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक आधारभूत संरचना और निवेशक-अनुकूल नीतियों के माध्यम से हिमाचल में मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार का लक्ष्य प्रदेश में उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सके. राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम का उद्देश्य देश में औद्योगिक गलियारों का नेटवर्क विकसित करना है, जिन्हें आर्थिक विकास के इंजन के रूप में तैयार किया जा रहा है. इसके तहत विश्वस्तरीय अवसंरचना विकसित करने, निवेश आकर्षित करने, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
ये भी पढ़ें: क्या हिमाचल में अतीत की बात हो जाएगी डीए और एरियर की अदायगी, वित्त सचिव ने कही थी फ्रीज करने की बात, अब आगे क्या?

