'अगर मुझे मिलता जयराम सरकार जितना हजार करोड़ तो चुका देता प्रदेश का आधा कर्ज'
ऑल पार्टी मीटिंग के बाद सीएम सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार पर निशाना साधा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 13, 2026 at 3:35 PM IST
|Updated : February 13, 2026 at 4:48 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित ऐतिहासिक पीटरहॉफ इमारत एक बार फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गई. शुक्रवार को यहां प्रदेश की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज पर चर्चा के लिए ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई थी. सरकार का उद्देश्य था कि सभी राजनीतिक दल मिलकर राज्य के आर्थिक संकट और RDG (राजस्व घाटा अनुदान) बंद होने जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करें. लेकिन बैठक शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी ने इसका बहिष्कार कर दिया, जिससे प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है.
सरकार का कहना था कि प्रदेश आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है और ऐसे समय में सभी दलों को एकजुट होकर समाधान निकालना चाहिए. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि भाजपा के कहने पर ही यह सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी. लेकिन बैठक में भाजपा प्रतिनिधि अपनी बात रखे बिना ही विरोध जताकर बाहर चले गए. इसे लेकर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जनता के मुद्दों से भागने का आरोप लगाया.
'मुझे मिलता इतना हजार करोड़ तो चुका देता कर्ज'
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें भी पिछली सरकार की तरह 40 हजार करोड़ रुपये मिलते, तो वे प्रदेश के आधे कर्ज का भुगतान कर देते. सुक्खू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार आर्थिक कुप्रबंधन छोड़ गई है, जिसका बोझ वर्तमान सरकार उठा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ समाधान तलाशना चाहती है और विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर राज्यहित में सहयोग करना चाहिए.
'प्रदेश हित में नहीं भाजपा का रवैया'
मुख्यमंत्री ने कहा कि RDG बंद होना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की लड़ाई है. उन्होंने भाजपा से साफ पूछा कि वह RDG बंद होने के पक्ष में है या विरोध में. उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे. सुक्खू ने यह भी कहा कि अगर भाजपा चाहती तो बैठक मंडी या सोलन में भी रखी जा सकती थी, सरकार इसके लिए तैयार थी. लेकिन भाजपा का रवैया प्रदेश हित में नहीं दिखा.
बैठक में CPIM, आम आदमी पार्टी और BSP ने हिस्सा लिया और RDG के मुद्दे पर अपनी राय रखी. संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि इन दलों ने राज्यहित में रचनात्मक सुझाव दिए. कांग्रेस की ओर से कुलदीप सिंह राठौर ने भी वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए मिलकर काम करने की बात कही. उन्होंने भाजपा के बहिष्कार को निंदनीय बताया.
'प्रदेश बड़ा या कुर्सी'
सरकार के नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा का बहिष्कार पहले से तय था. उनका कहना है कि भाजपा बैठक में सिर्फ औपचारिकता निभाने आई और फिर राजनीतिक ड्रामा कर बाहर निकल गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश बड़ा है या कुर्सी, इसका फैसला जनता करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार भाजपा के बिना भी प्रदेश हित की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेगी.
पीटरहॉफ में हुई इस घटना ने हिमाचल की राजनीति में नई तल्खी ला दी है. एक तरफ सरकार आर्थिक संकट से निपटने के लिए सर्वदलीय सहमति चाहती है, तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगा रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है.
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