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शिमला vs दिल्ली पुलिस मामले में CM मीडिया सलाहकार ने थपथपाई सरकार की पीठ, बोले ट्रेंड कर दिया सेट

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान से ईटीवी भारत से खास बातचीत.

शिमला V/S दिल्ली पुलिस मामले में CM मीडिया सलाहकार ने थपथपाई सरकार की पीठ
शिमला V/S दिल्ली पुलिस मामले में CM मीडिया सलाहकार ने थपथपाई सरकार की पीठ (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 11:01 PM IST

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शिमला: हिमाचल की सियासत में इन दिनों शिमला से लेकर दिल्ली तक एक ही मुद्दा गर्म है. AI समिट के बाद उपजा विवाद और उस पर शिमला बनाम दिल्ली पुलिस की कार्रवाई. इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है, बल्कि कानून-व्यवस्था के मॉडल पर भी नई चर्चा शुरू कर दी है. इसी बीच ईटीवी भारत ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान से बात की, जिसमें उन्होंने ने खुलकर राज्य सरकार और हिमाचल पुलिस की कार्यशैली की सराहना की है. उन्होंने कहा कि हिमाचल पुलिस ने “ट्रेंड सेट” कर दिया है. जिसे दूसरे राज्यों को भी अपनाना चाहिए.

दिल्ली पुलिस का तरीका गलत

यह गंभीर विषय था. जब भी एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य प्रदेश में जाती है तो उसके कुछ प्रोटोकॉल है. यह दिल्ली पुलिस वर्सेस संदीप पर हाईकोर्ट का भी एक फैसला है, उसमें भी कहा गया है कि जब आप दूसरे राज्यों में जाएं तो आप वहां के प्रोटोकॉल को फॉलो करेंगे. आप वहां की पुलिस को सूचित करेंगे. जिस थाने के अंतर्गत कार्रवाई करेंगे, थाना प्रभारी को जानकारी दी जानी चाहिए.

CM मीडिया सलाहकार से खास बातचीत (ETV Bharat)

उन्होंने कहा कि इसके साथ बाहरी राज्यों से आने वाली पुलिस के पास FIR और वारंट होना चाहिए. जब पुलिस किसी को गिरफ्तार करती है, सबसे पहले उसका मेडिकल होना चाहिए, जो एक काम करने का तरीका होता है. यह बातें बिल्कुल फॉलो नहीं की गई और ना ही कोई सूचना दी गई.

उन्होंने कहा कि जिस तरह से दिल्ली और हरियाणा पुलिस आई और जहां पर उन्होंने कार्रवाई की किचन के माध्यम से घुसे उनका सारा सिस्टम लेकर चले गए. यह सब कुछ गलत तरीके से हुआ. इस बात का विरोध करने पर दिल्ली पुलिस को उनका रात को डीडीयू अस्पताल में मेडिकल करना पड़ा.

उन्होंने कहा कि सब मजिस्ट्रेट ने उनको ट्रांसिट रिमांड दिया. यह प्रोसीजर अडॉप्ट होना चाहिए था. हिमाचल की पुलिस भी दूसरे राज्यों में जाती है. हम भी हम भी बाहरी राज्यों से अपराधियों को लाते हैं. हम वहां की लोकल पुलिस के सहयोग से पूरे प्रोसीजर को फॉलो करते हैं. उन्होंने कहा कि यह तो इस तरह से हो रहा था हिमाचल आ जाओ यहां सब कुछ खुला है, जो मर्जी यहां से करके चला जाओ.

हमारी 75 लाख लोगों की सुरक्षा का सवाल है. कौन पुलिस की वर्दी में आ रहा है और कौन कैसे घुस रहा है. इसकी पूरी जानकारी स्थानीय पुलिस के पास होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई भी यही थी. न कि ये उनको यहां से क्यों ले गए? उन्होंने कहा कि हमारी पुलिस ने बहुत अच्छा काम किया है. यह एक ऐसा उदाहरण सेट हुआ है, जो दूसरे राज्यों को भी फॉलो करना चाहिए.

शर्ट उतारकर प्रदर्शन देशद्रोह कैसा?

लोकतंत्र में सबको असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन जिस तरीके से विरोध हुआ है मंच सही नहीं था? इस सवाल के जवाब में नरेश चौहान ने कहा, 'यह सारी बातें राजनीतिक दृष्टि से हो रही हैं. लोकतंत्र है अपनी शर्ट उतार कर बच्चों ने प्रदर्शन किया तो बहुत बड़ा देशद्रोह हो गया. लोकतंत्र में सबको अपनी बातें रखने का अधिकार है. जब हरियाणा के होम मिनिस्टर ने सोशल मीडिया पर किस प्रकार का प्रदर्शन किया. हमारे हजारों लोगों ने इसे देखा तब यह देशद्रोह नहीं था.

वहीं, कॉमनवेल्थ के समय भाजपा विरोध कर रही थी, उसे वक्त क्या यह विरोध नहीं था? उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक दृष्टि से पेश किया जा रहा है. प्रधानमंत्री को देश को बहुत सारे सवालों का जवाब देना है, जो वह नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिन्होंने प्रदर्शन किया वे इसे फेस कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी का यह मानना है कि लोकतंत्र में हमें शांतिपूर्वक तरीके से विरोध करने का अधिकार है. इसलिए हम उनको मदद कर रहे हैं. दूसरी बात इस मामले में दिल्ली पुलिस को भी हाईकोर्ट से फटकार लगी है कि आप किस तरह से टी-शर्ट को किसी की जान को किस तरह से खतरा मानते हैं. यह कौन सा हथियार है?

'बच्चों ने नहीं किया समिट का विरोध'

वहीं, कॉमनवेल्थ की बात और है, लेकिन दिल्ली में प्रदर्शन आई सीमेंट के दौरान हुआ है. इसको लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में नरेश चौहान ने कहा कि यह मंशा नहीं है कि AI समिट कराएं. इस पर देश के अंदर लंबी बहस चलेगी. किस प्रकार के चाइना मॉडल को वहां पर दिखाया गया. इतने बड़े समिट पर हमारे देश को क्या मिला? इस पर बड़ी बहस होनी है.

उन्होंने कहा कि इस पर सब कुछ बाहर निकलेगा. उन्होंने कहा कि हमें इसका विरोध थोड़े हैं. समिट का विरोध तो वह बच्चे भी नहीं कर रहे हैं. यह तो उन बच्चों ने भी नहीं कहा कि समिट क्यों हो रहा है? मैं नहीं समझता कि समिट से कोई बड़ी बातें नहीं निकली है, जो एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है?

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