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जलवायु चुनौतियों से निपटने को लोक निर्माण विभाग में बड़े सुधार, गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक पर जोर: CM सुक्खू

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा के दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा किए कार्यों की सराहना की.

संवाद सत्र कार्यक्रम में सीएम सक्खू हुए शामिल
संवाद सत्र कार्यक्रम में सीएम सक्खू हुए शामिल (DIPR)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 20, 2026 at 4:39 PM IST

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शिमला: जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं के दौर में हिमाचल प्रदेश सरकार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में जुट गई है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को शिमला में आयोजित ‘लोक निर्माण विभागों में गुणवत्ता आश्वासन’ विषय पर उत्तर क्षेत्रीय अंतर-राज्यीय संवाद सत्र की अध्यक्षता करते हुए विभाग में व्यापक सुधारों, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और गुणवत्ता आधारित अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया. संवाद सत्र में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अभियंताओं ने भाग लिया.

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, 'पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने कई भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिनसे निपटने में लोक निर्माण विभाग की भूमिका सराहनीय रही है. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं और भविष्य में अन्य राज्यों को भी ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है'.

सुरंग निर्माण, बहुमंजिला भवनों की दिशा में काम

सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश का करीब 90 प्रतिशत भू-भाग पर्वतीय होने के कारण सड़क संपर्क यहां के लोगों की मूलभूत आवश्यकता है. ऐसे में विभाग को पारंपरिक कार्यशैली से आगे बढ़ते हुए सुरंग निर्माण, बहुमंजिला भवनों और अन्य उन्नत अधोसंरचना परियोजनाओं की दिशा में कार्य करना होगा. उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और कार्य प्रणालियों को अपनाने में प्रारंभिक कठिनाइयां आ सकती हैं, लेकिन सतत विकास और बेहतर गुणवत्ता के लिए यह अनिवार्य है.

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (DIPR)

उन्होंने चिंता व्यक्त कि आने वाले वर्षों में आपदाओं से क्षतिग्रस्त अधोसंरचना का पुनर्निर्माण सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल होगा. वर्तमान में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग चार प्रतिशत हिस्सा आपदा पुनर्निर्माण पर खर्च हो रहा है, जो वर्ष 2050 तक बढ़कर 14 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इस चुनौती से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने और विभागीय क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग को अपने पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर नए क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग बांध निर्माण जैसी परियोजनाओं में भी सक्रिय भूमिका निभा सकता है. राज्य सरकार भविष्य में विभाग के कार्यक्षेत्र का विस्तार करने पर गंभीरता से विचार करेगी. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘क्वालिटी कंट्रोल फॉर रोड वर्क्स’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया और गुणवत्ता आधारित निर्माण कार्यों को समय की आवश्यकता बताया.

ड्रेनेज नीति तैयार

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा, 'क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों को अपनाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है. ऐसे संवाद सत्र अभियंताओं को नवीन तकनीकों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से परिचित कराने का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं. उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे उत्तर भारत में नवाचार आधारित समाधान और नई कार्य प्रणालियों को अपनाना आवश्यक हो गया है'.

विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 45 हजार किलोमीटर लंबी सड़कें हैं और अधिकांश पंचायतें सड़क संपर्क से जुड़ चुकी हैं. ऐसे में इस विशाल सड़क नेटवर्क का नियमित रखरखाव एक बड़ी चुनौती है. इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने नई ड्रेनेज नीति तैयार की है, जिससे सड़कों के रखरखाव में सुधार और उनकी आयु बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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