HKRNL पर CM सैनी का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- "9 साल में 71 हजार संविदा कर्मचारी बढ़े, अब उसी व्यवस्था पर उठा रहे सवाल"
CM सैनी ने HKRNL पर कांग्रेस को आंकड़ों से घेरा. साथ ही संविदा कर्मचारियों की पुरानी व्यवस्था और सरकार के सुधारों का हवाला दिया.

Published : September 1, 2026 at 11:44 AM IST
चंडीगढ़: हरियाणा कौशल रोजगार निगम यानी कि HKRNL को लेकर विपक्ष के सवालों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में कांग्रेस को आंकड़ों के जरिए घेरा. ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सीएम ने कहा कि, "संविदा आधारित रोजगार व्यवस्था मौजूदा सरकार की देन नहीं है, बल्कि हरियाणा गठन के समय से चली आ रही है. विपक्ष इतिहास के अधूरे पन्ने दिखाकर राजनीति कर रहा है. पूरा रिकॉर्ड सामने आएगा तो सच यही निकलेगा कि अस्थायी और अनुबंध आधारित व्यवस्था वर्तमान सरकार ने शुरू नहीं की."
1967 में भी 11 हजार से ज्यादा कर्मचारी: मुख्यमंत्री ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि, "31 मार्च 1967 को हरियाणा सरकार में कुल 97,385 कर्मचारी थे. इनमें 11,397 कर्मचारी कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली श्रेणी में शामिल थे. वर्ष 2013 तक यह संख्या बढ़कर 84,642 हो गई. यानी 1967 के मुकाबले इस श्रेणी में 73,245 कर्मचारियों की वृद्धि हुई और संख्या करीब 7.4 गुना बढ़ी."
कांग्रेस के 9 साल पर सीधा सवाल: सैनी ने वर्ष 2005 से 2014 के आंकड़ों को विपक्ष के खिलाफ सबसे बड़ा आधार बनाया. उन्होंने कहा कि, "1967 से 2005 तक 38 वर्षों में संविदा, वर्कचार्ज्ड और कंटिन्जेंसी श्रेणी के कर्मचारी 11,397 से बढ़कर 38,949 हुए. वहीं कांग्रेस के अगले 9 वर्षों में यह संख्या करीब 1.10 लाख तक पहुंच गई. 38 वर्षों में इस श्रेणी में 27,552 कर्मचारियों की वृद्धि हुई, जबकि कांग्रेस के मात्र 9 वर्षों में लगभग 71 हजार की वृद्धि हुई."
"तब सवाल क्यों नहीं उठाए?": मुख्यमंत्री ने विपक्ष से पूछा कि, "यदि संविदा कर्मचारी व्यवस्था इतनी खराब थी तो कांग्रेस के शासनकाल में इसमें इतनी तेज वृद्धि क्यों हुई. इन कर्मचारियों को ठेकेदारों के भरोसे क्यों छोड़ा गया? ईपीएफ, ईएसआई, समान वेतन, प्रसूति अवकाश, अनुकम्पा तैनाती और स्थानांतरण की व्यवस्थित नीति उस समय क्यों नहीं बनाई गई? पुरानी व्यवस्था में युवाओं को ठेकेदारों और बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था."
ठेकेदारों की भूमिका खत्म करने का दावा: सैनी ने कहा कि, "HKRNL का गठन केवल कर्मचारियों की भर्ती के लिए नहीं, बल्कि पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था को बदलने के लिए किया गया है. पहले कई जगह कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिलता था और वेतन से कमीशन काटने की शिकायतें आती थीं. सरकार ने ठेकेदार और बिचौलिए की भूमिका समाप्त कर व्यवस्था को नियम, योग्यता और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा है."
ऑनलाइन प्रक्रिया और सीधे बैंक खाते में भुगतान: मुख्यमंत्री ने कहा कि, "अब युवाओं को नौकरी के लिए किसी ठेकेदार या बिचौलिए के पास जाने की जरूरत नहीं है. युवा HKRNL पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं और पात्रता व योग्यता के आधार पर तैनाती की जाती है. उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और ट्रेस करने योग्य है. कर्मचारियों का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जा रहा है."
वेतन में भी बड़ा अंतर बताया: सैनी ने पुरानी और मौजूदा वेतन व्यवस्था का अंतर भी सदन में रखा. उन्होंने बताया कि, "साल 2005 में अकुशल कर्मचारी की निर्धारित दर करीब 2,343 रुपये प्रतिमाह थी, जो जुलाई 2014 में 5,640 रुपये हुई. वहीं 9 अप्रैल 2026 से लागू दरों के अनुसार अकुशल कर्मचारी के लिए 15,220.71 रुपये, अर्धकुशल के लिए 16,780.74 रुपये और कुशल कर्मचारी के लिए 18,500.81 रुपये प्रतिमाह की दर लागू है."
EPF-ESI पर भी सरकार का जोर: मुख्यमंत्री ने कहा कि, "HKRNL के जरिए कर्मचारियों को EPF, ESI और श्रम कल्याण निधि से जोड़ा गया है. वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक इन मदों में लगातार राशि जमा की गई. अब तक करीब 2,100 करोड़ रुपये EPF, ESI और श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा किए जा चुके हैं. हमारे समय में एक भी कर्मचारी ऐसा नहीं मिलेगा, जिसका ईपीएफ न कटा हो और उसके खाते में न गया हो."
महिला कर्मचारियों और परिवारों के लिए प्रावधान: सैनी ने कहा कि, "HKRNL व्यवस्था में महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश, चिकित्सा अवकाश और आकस्मिक अवकाश जैसे प्रावधान किए गए हैं. कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर पात्र आश्रित को अनुकम्पा आधार पर रोजगार देने का प्रावधान भी है. अब तक 306 पात्र अभ्यर्थियों को अनुकम्पा आधार पर रोजगार दिया जा चुका है."
आरक्षण के आंकड़े भी सदन में रखे: मुख्यमंत्री ने HKRNL में आरक्षण नहीं होने के विपक्ष के आरोप को भी खारिज किया. उन्होंने बताया कि, "निगम के माध्यम से लगाए गए 28,350 नए कर्मचारियों में 6,788 अनुसूचित जाति वर्ग और 8,128 पिछड़ा वर्ग से हैं. ये आंकड़े निर्धारित हिस्सेदारी से अधिक हैं. सैनी ने दावा किया कि तैनाती प्रक्रिया में सरकार की आरक्षण नीति और निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है." मुख्यमंत्री ने सेवा सुरक्षा को लेकर भी आंकड़े साझा करते हुए बताया कि, "31 अगस्त की सुबह 10 बजे तक सेवा सुरक्षा पोर्टल पर 62,497 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से 55,077 को DDO और 27,896 को विभागाध्यक्षों की ओर से मंजूरी दी जा चुकी है. अगले दो माह में एक भी पात्र कर्मचारी ऐसा नहीं बचेगा, जिसे सेवा सुरक्षा न दी गई हो."
नियमित नौकरी नहीं: सैनी ने स्पष्ट किया कि HKRNL के जरिए होने वाली नियुक्तियां नियमित सरकारी नौकरी नहीं हैं. उन्होंने कहा कि, "जब किसी पद पर नियमित कर्मचारी की नियुक्ति होगी तो निगम के माध्यम से तैनात कर्मचारी को वह पद छोड़ना होगा. सरकार का लक्ष्य संविदा कर्मचारियों को ठेकेदारों और बिचौलियों से मुक्त कर एक संस्थागत व्यवस्था देना है. सरकार का मॉडल सिफारिश और पर्ची पर आधारित नहीं है.व्यवस्था सिफारिश से नहीं, नियम से चलेगी. ठेकेदार की मर्जी से नहीं, संस्थागत तंत्र से चलेगी और पर्ची से नहीं, पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया से चलेगी. यदि किसी कर्मचारी के साथ वास्तविक अन्याय हुआ है तो सरकार उसकी शिकायत सुनेगी, लेकिन बिना तथ्यों के पूरी व्यवस्था को बदनाम करना उचित नहीं है."

