CM साय का दंतेवाड़ा दौरा, बस्तर पंडुम कार्यक्रम में सीधे आम जनता से संवाद, 10 जनवरी से 3 चरण में होगा आयोजन
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय दंतेवाड़ा दौरे पर रहे. वे दंतेश्वरी मां के दर्शन कर बस्तर पंडुम में शामिल हुए. यहां लोगों से सीधे बातचीत की.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 2, 2026 at 2:29 PM IST
दंतेवाड़ा: नए साल 2026 के दूसरे दिन CM साय दंतेवाड़ा जिले के दौरे पर रहे. यहां उन्होंने सबसे पहले बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हुए आशीर्वाद लिया. इसके बाद मुख्यमंत्री बस्तर पंडुम कार्यक्रम में शामिल हुए हैं. यहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने उनका स्वागत किया.
दंतेश्वरी मंदिर में हुआ शुभारंभ: दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम 2026 के लोगो और थीम गीत का भव्य विमोचन किया गया. इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी, पारंपरिक जनजातीय प्रमुख और बड़ी संख्या में कलाकार मौजूद रहे.
बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में होगा
- जनपद स्तरीय: 10 से 20 जनवरी
- जिला स्तरीय: 24 से 29 जनवरी
- संभाग स्तरीय: 2 से 6 फरवरी
इस आयोजन में बस्तर संभाग के 7 जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित होंगे.

प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ी: इस वर्ष प्रतियोगिताओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है. इनमें नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक भोजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि शामिल हैं. प्रतियोगिता तीन चरणों में आयोजित होगी.
बस्तर की आत्मा है बस्तर पंडुम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है. यह जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को सहेजने और दुनिया तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है.
बस्तर अब केवल संघर्ष की नहीं, बल्कि शांति, सृजन, संस्कृति और पर्यटन की पहचान बन रहा है. डबल इंजन सरकार बस्तर को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है.- विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री
‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है और बस्तर में पर्व परंपरागत रूप से खुशियों के प्रतीक हैं. बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराएं गर्व का विषय हैं. भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय बिताया था. ऐसे पवित्र क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की दिशा में बस्तर पंडुम एक महत्वपूर्ण पहल है.- वन मंत्री केदार कश्यप
जनजातीय संस्कृति की जीवंत झलक: मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा, आभूषण, शिल्प, पारंपरिक व्यंजन, वन-औषधि और देवगुड़ियों की परंपरा को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है.

शांति और विकास की पहचान बनता बस्तर: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण समापन का संकल्प लिया है. अब बस्तर शांति, संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान बन रहा है.

