पाला बदलने के बाद भी 'पक्का' रहा मुख्यमंत्री पद! 75 साल के हुए CM नीतीश कुमार, जानें विकास दिवस से विकास पुरुष तक की यात्रा
नीतीश कुमार 75 साल के हो गये हैं. 74 के आंदोलन से उभरे, पिछले 20 वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री. 2025 चुनाव में शानदार प्रदर्शन.

Published : March 1, 2026 at 7:55 AM IST
|Updated : March 1, 2026 at 3:20 PM IST
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 75 साल के हो गए हैं. 1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर में नीतीश कुमार का जन्म हुआ था. परमेश्वरी देवी और कविराज राम लखन सिंह के पुत्र नीतीश कुमार 74 के आंदोलन से निकले नेता हैं. पिछले तीन दशक से भी अधिक समय से बिहार की राजनीति के धूरी बने हुए हैं.
10वीं बार बने मुख्यमंत्री: जब लोग नीतीश कुमार की अंतिम पारी कह रहे थे और उनकी पार्टी जदयू की समाप्ति की बात होने लगी थी, तब 2025 विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से सबसे बेहतर प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया था. 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नीतीश ने लंदन के वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम भी दर्ज करवा दिया.
जन्मदिन पर विकास दिवस: वैसे तो नीतीश कुमार जन्मदिन के मौके पर किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होते हैं, लेकिन पार्टी की ओर से पिछले कई सालों से उनके जन्मदिन पर विकास दिवस के रूप में कई कार्यक्रम का आयोजन होता है. ब्लड डोनेशन कैंप से लेकर कार्यकर्ता केक भी काटते हैं.
20 सालों से बिहार के मुख्यमंत्री: 20 साल में जिसके साथ रहे सरकार उसी की बनी : नीतीश कुमार पिछले 20 सालों से बिहार के मुख्यमंत्री हैं और बिहार की राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया. जब उन्हें लगा की सहयोगी उन पर दबाव बना रहा है या उनकी बात नहीं मान रहा है तो उन्होंने पाला बदल लिया और दूसरे गठबंधन के साथ सरकार बना ली. नीतीश कुमार पाला बदलने में भी रिकॉर्ड बना चुके हैं.
पंचायत में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण: 20 सालों के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने डेढ़ दर्जन से अधिक यात्राएं की और कई ऐसे फैसले लिए हैं जो बिहार के बदलाव के गवाह है, जिसकी चर्चा देश दुनिया में होती है. चाहे पंचायत में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का मामला हो, लड़कियों को साइकिल देने का फैसला हो या फिर पूर्ण शराबबंदी लागू करने का फैसला.

''लालू प्रसाद यादव के साथ हमने काम किया है उनके मंत्रिमंडल में वरिष्ठ मंत्रियों में से एक था, लेकिन नीतीश कुमार के काम करने का जो तरीका है उनका जो विजन है और आंदोलन के समय जो उनकी सक्रियता थी उन सबको हमने नजदीक से देखा है. नीतीश कुमार ने बिहार को एक नया स्वरूप दे दिया है. बिहार को कभी बीमारू राज्य कहा जाता था लेकिन नीतीश कुमार के शासन में कई बड़े बदलाव हुए.''- वशिष्ठ नारायण सिंह, वरिष्ठ नेता, जदयू
मिला विकास पुरुष औक सुशासन बाबू नाम: आज बिहार की सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य की स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. नीतीश कुमार को विजनरी नेता के तौर पर जाना जाता है. विकास पुरुष, सुशासन बाबू जैसे नाम इन्हीं सबके कारण उन्हें दिये गए. यह बात सही है कि उम्र के इस पड़ाव पर पहले वाले चतुर राजनेता नीतीश नहीं रहे क्योंकि जिस प्रकार से उनके हाव-भाव और बयान होते हैं उसके कारण उनके स्वास्थ पर सवाल उठ रहा है . लेकिन इसके बाद भी बिहार के लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आयी है.
वशिष्ठ नारायण सिंह से खास दोस्ती: नीतीश कुमार के नजदीकी लोगों में कई लोग हैं जिनकी चर्चा होती है. एक नाम सबसे खास है, पिछले 5 दशक से नीतीश कुमार से जिनका संबंध रहा है, वो नाम है वशिष्ठ नारायण सिंह का. इनके बारे में इतना ही कहा जाता है कि नीतीश कुमार अपने बड़े फैसले बिना वशिष्ठ नारायण सिंह के चर्चा के नहीं लेते हैं. वशिष्ठ नारायण सिंह, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार दोनों के साथ काम कर चुके हैं लेकिन जब चुनने की बारी आई तो नीतीश कुमार को चुना और इसकी वजह भी बताते हैं.
74 के आंदोलन से साथ: नीतीश कुमार को लेकर वशिष्ठ नारायण सिंह से जब हमारे संवाददाता ने बातचीत की तो वशिष्ठ नारायण सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार जब पटना इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करते थे तो वहां छात्र नेता थे और 74 के आंदोलन से लेकर अब तक उनके साथ मेरा संबंध रहा है और बहुत ही बेहतर संबंध रहा है नजदीकी संबंध रहा है संघर्ष के दिनों में भी हम लोग साथ रहे.
महिला सशक्तिकरण पर खास ध्यान: लालू प्रसाद यादव भी लोकप्रिय हैं और नीतीश कुमार भी लोकप्रिय हैं दोनों में तो कुछ जरूर खास होगा? इस पर वशिष्ठ नारायण सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार के काम करने का जो तरीका है, वह बहुत ही सटीक है. बहुत ही प्लानिंग तरीके से नीतीश कुमार काम करते हैं. यह सही है कि लालू प्रसाद यादव भी बहुत लोकप्रिय थे लेकिन लालू प्रसाद यादव का जो विजन था उससे नीतीश कुमार का विजन पूरी तरह से अलग है. कुछ काम ऐसे किया जो महिला सशक्तिकरण से शुरू होता है.

परिवार को राजनीति से दूर रखते हैं CM: नीतीश कुमार के बेटे निशांत को लेकर चर्चा हो रही है? इस पर वशिष्ठ नारायण सिंह का कहना है कि यह दूसरी बात है. निशांत आते हैं तो स्वागत करेंगे, लेकिन नीतीश कुमार अभी लंबे समय तक काम करते रहेंगे. निशांत को लेकर हमने नीतीश कुमार से कोई बात नहीं की है क्योंकि नीतीश कुमार परिवार को राजनीति से दूर रखते रहे हैं. वैसे निशांत पढ़े लिखे हैं और राजनीति में आने का फैसला लेते हैं तो अच्छी बात होगी.
''नीतीश कुमार ने परिवारवाद को राजनीति से दूर रखा जबकि लालू प्रसाद यादव के परिवार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रही. उनके सगे संबंधियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही. इस मामले में नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति को लेकर पूरे देश में एक उदाहरण पेश किया है.''- वशिष्ठ नारायण सिंह, वरिष्ठ नेता, जदयू
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