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फरीदाबाद में सीएम नायब सिंह सैनी ने अफ्रीकी देशों के राजदूतों के साथ की बैठक, निवेश और तकनीकी सहयोग पर मंथन

सीएम नायब सिंह सैनी ने अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर द्विपक्षीय सहयोग पर वार्ता को आगे बढ़ाया.

Surajkund Fair in Faridabad
अफ्रीकी देशों के राजदूतों के साथ बैठक में मौजूद सीएम नायब सिंह सैनी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 13, 2026 at 7:51 PM IST

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फरीदाबादः हरियाणा में औद्योगीकरण और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को फरीदाबाद के सूरजकुंड में हरियाणा–अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में उद्योग, व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में हरियाणा और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापक संभावनाओं पर मंथन किया गया. बैठक में 21 अफ्रीकी देशों के राजदूतों और हाई कमिश्नरों के साथ-साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया.

भारत–अफ्रीका साझेदारी के एक नए अध्याय की शुरुआतः हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि "सूरजकुंड की पावन और सांस्कृतिक धरती से भारत–अफ्रीका साझेदारी के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है. सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला लोक परंपरा, हस्तशिल्प, रचनात्मकता और मानवीय कौशल का वैश्विक मंच है, जो सांस्कृतिक जुड़ाव और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाता है."

फरीदाबाद में सीएम नायब सिंह सैनी ने अफ्रीकी देशों के राजदूतों से की बैठक (Etv Bharat)

विदेश सहयोग विभाग स्थापित करने वाला पहला राज्यः मुख्यमंत्री ने कहा कि "भारत–अफ्रीका संबंध समानता, पारस्परिक सम्मान और साझा विकास के सिद्धांत पर आधारित हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप हरियाणा राज्य स्तर पर भी अफ्रीकी देशों के साथ दीर्घकालिक और मजबूत संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. हरियाणा देश का पहला राज्य है जिसने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग से विदेश सहयोग विभाग स्थापित किया है."

स्टार्टअप के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है हरियाणाः उन्होंने कहा कि "हरियाणा राज्य कृषि, विनिर्माण, एमएसएमई, फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और स्टार्टअप के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ विकास इंजन है. एनसीआर से जुड़ाव के कारण राज्य को वैश्विक कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक मजबूती प्राप्त है, जिससे अफ्रीकी देशों के साथ बहु-क्षेत्रीय सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं. कृषि को भारत–अफ्रीका सहयोग का प्रमुख क्षेत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि सिंचाई प्रबंधन, उन्नत बीज, फसल विविधीकरण, कृषि यंत्रीकरण, डेयरी और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन में हरियाणा का अनुभव अफ्रीकी देशों की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकता है."

औद्योगिक और कृषि आधारित साझेदारी किया जायेगा विकसितः उन्होंने केन्या, तंजानिया, युगांडा, इथियोपिया और रवांडा के साथ संयुक्त खेती, प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी साझेदारी की संभावनाओं का भी उल्लेख किया. तंजानिया निवेश केंद्र तथा कृषि एवं अन्य संस्थानों के साथ हुए समझौतों से व्यापार, निवेश और कृषि सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि "ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर, आईटी, निर्माण, कौशल विकास, स्टार्टअप, फिनटेक और एमएसएमई क्षेत्रों में भी व्यापक सहयोग की संभावनाएं हैं. दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और उत्तर अफ्रीकी देशों के साथ क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक और कृषि आधारित साझेदारी विकसित की जा सकती है."

'जब शिल्प यात्रा करता है, तो संस्कृतियां संवाद करती हैं': मुख्यमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और हरित विकास को साझा नैतिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सौर ऊर्जा, जल प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में संयुक्त प्रयास आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक हैं. उन्होंने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला केवल व्यापार का मंच नहीं, बल्कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है. “जब शिल्प यात्रा करता है, तो संस्कृतियां संवाद करती हैं और साझेदारियां जन्म लेती हैं.

द्विपक्षीय व्यापार 90 से 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर: इस दौरान उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरवीर सिंह ने कहा कि "भारत और अफ्रीका के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है. पिछले कुछ वर्षों में भारत-अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 90 से 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी को दर्शाता है."

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने कहा कि "हरियाणा भारत-अफ्रीका व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. हरियाणा से अफ्रीकी देशों को मुख्यत: ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर एवं कृषि मशीनरी, फार्मा उत्पाद, इंजीनियरिंग गुड्स, प्लाईवुड तथा आईटी सेवाओं का निर्यात किया जाता है. वहीं अफ्रीका से खनिज धातुएं और कुछ कृषि आधारित कच्चा माल आयात किया जाता है. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य स्पष्ट है-व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश को प्रोत्साहित करना और संस्थागत संवाद के माध्यम से दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करना."

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