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1 रुपया भी नहीं बचा या तो नौकरी दीजिए या इच्छा मृत्यु, मुख्यमंत्री निवास में फूट पड़ा दिव्यांग पर्यटन अधिकारी का दर्द

दिव्यांग ने बताया कि वह इससे पहले तीन बार जनदर्शन में आ चुका है, लेकिन उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ.

CM JAN DARSHAN PROGRAM
मुख्यमंत्री जनदर्शन कार्यक्रम (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 9, 2026 at 7:25 AM IST

3 Min Read
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रायपुर: मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम उस वक्त भावुक हो गया, जब छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में कार्यरत दिव्यांग संविदा अधिकारी विनोद कुमार मारकंडे अपनी फरियाद लेकर पहुंचे. हाथ में आवेदन, आंखों में आंसू और आवाज में टूटा हुआ हौसला. विनोद ने मुख्यमंत्री को अपनी पीड़ा सौंपने के बाद ETV Bharat से खास बातचीत में जो बताया, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया.

“तीन बार जनदर्शन आ चुका हूं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई”

विनोद कुमार मारकंडे ने बताया कि वह इससे पहले तीन बार जनदर्शन में आ चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ.

मुख्यमंत्री जनदर्शन कार्यक्रम में इच्छा मृत्यु की मांग (ETV Bharat Chhattisgarh)
उन्होंने कहा—"पर्यटन मंत्री ने भी मेरे लिए पत्र लिखा था, लेकिन विभाग ने उस पत्र को भी नहीं माना. अब समझ नहीं आता कहां जाऊं, किससे गुहार लगाऊं."

"मेरे पास ₹1 भी नहीं है… जैसे-तैसे यहां तक पहुंचा हूं"

विनोद की आवाज़ भर्राने लगती है जब वह अपनी आर्थिक हालत बताते हैं—"मेरे पास आज एक रुपया भी नहीं बचा है. ले-दे करके यहां तक पहुंच पाया हूं. मैं बहुत परेशान हो चुका हूं. अब तो लगता है या तो मुझे नौकरी दीजिए या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दीजिए."

“सब कुछ बेचकर इलाज कराया… आज मेरे पास कुछ नहीं बचा”

विनोद ने बताया कि वह पहले टूरिज्म विभाग में अच्छी तरह काम कर रहे थे, लेकिन सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए.सिर में गंभीर चोट आई, ऑपरेशन हुआ और उसी हादसे ने उन्हें दिव्यांग बना दिया.

इलाज के लिए मैंने सब कुछ बेच दिया.आज हालत यह है कि न नौकरी बची, न जमा पूंजी- विनोद कुमार मारकंडे, दिव्यांग संविदा अधिकारी, टूरिज्म बोर्ड

“बिटिया की 4 महीने की फीस नहीं भर पाया…”

विनोद की पारिवारिक स्थिति और भी ज्यादा दर्दनाक है. वे बताते हैं "मां पिछले 5 साल से बिस्तर पर हैं, पत्नी खुद दिव्यांग हैं, छोटी-छोटी बेटियां हैं, और अब 4 महीने से स्कूल की फीस तक जमा नहीं हो पा रही है. पूरा परिवार मुझ पर ही निर्भर है लेकिन अब मैं ही बेबस हो गया हूं."

8 बार बढ़ा संविदा कार्यकाल, अब पूरी तरह खत्म

विनोद ने बताया कि उनका संविदा कार्यकाल 8 बार बढ़ाया गया, लेकिन अब 11 दिसंबर 2024 को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया. उन्होंने मुख्यमंत्री को दिए आवेदन में साफ लिखा है कि “अगर मेरी सेवा नहीं बढ़ाई गई, तो मेरे परिवार के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी.”

मुख्यमंत्री से आखिरी उम्मीद

जनदर्शन में मुख्यमंत्री को आवेदन सौंपते हुए विनोद ने कहा “अब आप ही मेरी आखिरी उम्मीद हैं अगर यहां से भी निराशा मिली, तो मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचेगा.”

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