'शीतलहर पूर्व तैयारी विषय पर कार्यशाला' का सीएम धामी ने किया शुभारंभ, जानिए क्या खास रहा इस वर्कशॉप में
सीएम ने युवा आपदा मित्रों और 2025 में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव में बेहतर काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 9, 2026 at 6:45 PM IST
|Updated : January 9, 2026 at 7:26 PM IST
देहरादून: पूरा उत्तर भारत इस वक्त शीतलहर की चपेट में हैं. उत्तराखंड में इससे अछूता नहीं है. आम जनता को शीतलहर के प्रकोप से बचाया जा सके, इसके लिए प्रदेश सरकार की तरफ तमाम प्रयास किए जा रहे है. इस क्रम में शुक्रवार को शीतलहर पूर्व तैयारी विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया.
कार्यशाला के दौरान सीएम ने शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास, हवाई यातायात सहायता की एसओपी, आपदा प्रबंधन विभाग के नववर्ष कैलेंडर 2026 और आपदा प्रबंधन हस्त पुस्तिका का विमोचन किया. इसके साथ ही सीएम ने युवा आपदा मित्रों और साल 2025 में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव में बेहतर काम करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया.
यही नहीं आपदा प्रबंधन के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उपलब्ध कराए गए चार वाहनों का भी मुख्यमंत्री ने फ्लैग ऑफ किया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा प्रबंधन में किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि समस्त प्रशासन, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम जनता की सहभागिता जरूरी है. देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एक प्रमुख एजेंडा बनाया गया है. उत्तराखंड सरकार भी उसी क्रम में आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रही है.
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एक प्रमुख एजेंडा बनाया गया है। उत्तराखण्ड सरकार भी उन्हीं के मार्गदर्शन में आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य… pic.twitter.com/cB2oJz67il
— CM Office Uttarakhand (@ukcmo) January 9, 2026
सीएम धामी ने कहा कि राज्य में ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग व अर्ली वार्निंग सिस्टम को बेहतर बनाया जा रहा है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर लगाने, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और आधुनिक रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के गठन जैसे कदमों से आपदा जोखिम को घटाया जा रहा है.
सीएम ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में हिमस्खलन एक गंभीर प्राकृतिक जोखिम है. राज्य के कई क्षेत्र हिमस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशील माने जाते हैं. इन क्षेत्रों में पर्यटन, तीर्थाटन एवं पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
सरकार पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग, प्रशिक्षित रेस्क्यू बलों की तैनाती व सुरक्षित पर्यटन प्रोटोकॉल को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. शीतलहर और अत्यधिक हिमपात से उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए भी राज्य में कई ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं. सभी जिलों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है और अलाव, रैन बसेरों व कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश भी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं.
सीएम ने कहा कि मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन आपस में बेहतर तालमेल बनाए रखें और अर्ली वार्निंग सिस्टम को और अधिक बेहतर करते हुए शीतलहर और हिमपात वाले क्षेत्रों में समय पर चेतावनी और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें.
शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू, निमोनिया जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सभी जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखना होगा. मुख्य रूप से सीमांत और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवश्यक दवाइयों, हीटिंग उपकरणों एवं प्राथमिक उपचार सामग्री की व्यवस्था करनी होगी.
सीएम ने कहा कि राज्य सरकार समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए युवा आपदा मित्र एवं आपदा सखी जैसी पहल को और सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है. इस कार्यशाला के जरिए शीत ऋतु के दौरान होने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा.
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