ETV Bharat / state

बोकारो के कई बस्तियों में पेयजल की समस्या, बूंद-बूंद के लिए लोगों को रोजाना करना पड़ता है संघर्ष

बोकारो के कई इलाकों में साफ पेयजल की समस्या है. जिसके चलते लोगों को दूसरे इलाकों से पानी लाना पड़ता है.

clean-drinking-water-problem-in-many-rural-areas-of-bokaro
पानी की समस्या (ETV BHARAT)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : June 1, 2026 at 3:00 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

बोकारो: बोकारो स्टील सिटी की चमक-दमक के पीछे एक ऐसी हकीकत छिपी है, जो हर दिन हजारों परिवारों की जिंदगी को मुश्किल बना रही है. माराफारी थाना क्षेत्र के बीएसएल लेबर हाउसिंग से सटे दर्जनों बस्तियों में रहने वाले करीब 15 हजार लोग आज भी साफ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं. हालत यह है कि लोगों को पानी के लिए हर रोज कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है.

झोपड़ी कॉलोनी, कदम गाछ, जटान टोला, रांची टोला, आजाद नगर और धोबी मोहल्ला समेत कई इलाकों के ट्यूबवेल से निकलने वाला पानी अब लोगों के लिए डर का कारण बन गया है. जांच में सामने आया है कि इन इलाकों के भूजल में टीडीएस यानी टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स का स्तर 900 से 1000 पीपीएम से अधिक है. विशेषज्ञों के मुताबिक 500 पीपीएम से अधिक टीडीएस वाला पानी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है.

जानकारी देते स्थानीय और बेहतर झारखंड संस्था के संस्थापक (ETV BHARAT)

गैर सरकारी संस्था बेहतर झारखंड का दावा है कि भूजल में भारी धातुओं की मिलावट के कारण पानी अत्यधिक कठोर और क्षारीय हो गया है. इसी वजह से लोग अपने मोहल्लों के ट्यूबवेलों का पानी पीने से बच रहे हैं और बीएसएल एलएच स्थित विश्वकर्मा मैदान के पास लगे बोरिंग ट्यूबवेल पर निर्भर हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी लाने में रोजाना तीन से पांच घंटे लग जाते हैं. महिलाएं और बच्चे भी भारी बर्तन लेकर दूर-दूर तक पानी ढोने को मजबूर हैं. हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर समस्या के बावजूद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को अब तक इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही जा रही है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर बोकारो के हजारों परिवार कब तक दूषित पानी और प्रशासनिक उदासीनता के बीच जीने को मजबूर रहेंगे.

इस समस्या पर बीएसएल के अधिकारी सूचना प्रमुख डीके धान ने कहा कि हमारे प्लांट क्षेत्र में नहीं आता है. इसलिए हमलोग इस संबंध में कुछ नहीं कर सकते हैं. वहीं, बोकारो डीसी अजय नाथ झा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र बोकारो स्टील प्लांट से प्रभावित गांव है. इसलिए पानी सेल को ही देना चाहिए. इसके बावजूद हम अपने तरफ से देखते हैं कि क्या किया जा सकता है और ग्रामीणों को कैसे शुद्ध पानी मिल सके. इसके लिए हम इलाके में जांच के लिए एक टीम भेजेंगे.

ये भी पढ़ें: हर घर जल! फिर भी 'पानी' संकट से जूझ रहे लोग, उठ रही हाई लेवल जांच की मांग

2 वर्षों से जल मीनार का मोटर है खराब, बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं ग्रामीण

कोडरमा के इन गांवों का रास्ता विकास को नहीं पता! गड्ढे खोद प्यास बुझाते हैं लोग