शिमला में टैक्सी ऑपरेटरों और पुलिस के बीच झड़प, आमरण अनशनकारी को अस्पताल ले जाने पर भड़का विवाद
चौड़ा मैदान में आमरण अनशनकारी की तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें अस्पताल ले जाने पहुंची. इस दौरान टैक्सी ऑपरेटरों और पुलिस के बीच हुई झड़प.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 26, 2026 at 9:57 PM IST
शिमला: राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे टैक्सी ऑपरेटरों और पुलिस के बीच बुधवार शाम उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब पुलिस ने तबीयत बिगड़ने पर एक अनशनकारी को जबरन अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की. पुलिस की कार्रवाई का टैक्सी ऑपरेटरों ने विरोध किया और मौके पर सरकार व पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
बता दें कि ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर एंड ड्राइवर एसोसिएशन के बैनर तले टैक्सी ऑपरेटर 25 अगस्त से चौड़ा मैदान में आंदोलन कर रहे हैं. इनमें से एक ऑपरेटर आमरण अनशन पर बैठा था. बुधवार को उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य कर्मी उसे एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल ले जाने पहुंचे. इसी दौरान अन्य टैक्सी ऑपरेटरों ने इसका विरोध शुरू कर दिया.
पुलिस की कार्रवाई से नाराज एक महिला टैक्सी ऑपरेटर काफी देर तक सड़क पर लेट गई. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई. कुछ समय के लिए मौके पर माहौल तनावपूर्ण बना रहा. टैक्सी ऑपरेटरों ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की. वहीं, टैक्सी ऑपरेटरों के आंदोलन को पंजाब के टैक्सी यूनियन प्रतिनिधियों का भी समर्थन मिला है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगें सरकार के समक्ष रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.
हिमाचल प्रदेश टैक्सी ऑपरेटर एंड ड्राइवर वेलफेयर यूनियन अध्यक्ष राम रत्न शर्मा ने कहा, यदि कोई टैक्सी 12 वर्ष बाद भी पूरी तरह फिट है और निर्धारित मानकों को पूरा करती है, तो उसे सड़क पर चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए. 12 वर्ष की अनिवार्य सीमा से छोटे और मध्यम वर्ग के टैक्सी ऑपरेटरों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. उन्होंने सरकार से इस शर्त पर पुनर्विचार कर वाहन की फिटनेस के आधार पर परमिट जारी करने की मांग की है".
12 साल की परमिट शर्त का विरोध
टैक्सी ऑपरेटर मुख्य रूप से वाहनों के परमिट की अवधि 15 वर्ष से घटाकर 12 वर्ष किए जाने का विरोध कर रहे हैं. टैक्सी ऑपरेटरों का कहना है कि वाहन परमिट की अवधि केवल उसकी उम्र के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि वाहन की फिटनेस को इसका आधार बनाया जाना चाहिए. ऑपरेटरों के मुताबिक यदि कोई टैक्सी 12 वर्ष बाद भी पूरी तरह फिट है और निर्धारित मानकों को पूरा करती है, तो उसे सड़क पर चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए. 12 वर्ष की अनिवार्य सीमा से छोटे और मध्यम वर्ग के टैक्सी ऑपरेटरों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. उन्होंने सरकार से इस शर्त पर पुनर्विचार कर वाहन की फिटनेस के आधार पर परमिट जारी करने की मांग की है.
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