सीजेआई का छत्तीसगढ़ दौरा, HNLU के दीक्षांत में छात्रों को दिए टिप्स, स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी के कार्यक्रम में हुए शामिल
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के नौवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 22, 2026 at 10:18 PM IST
|Updated : February 22, 2026 at 10:35 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का नौवां दीक्षांत समारोह संपन्न हो गया है. इस समारोह में भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. उन्होंने लॉ स्टूडेंट्स से संवाद किया और उन्हें भविष्य के लिए कई टिप्स भी दिए.
सीजेआई की लॉ स्टूडेंट्स से अपील
सीजेआई सूर्यकांत ने लॉ स्टूडेंट्स से मिलकर काम करने, सब्र और प्रोफेशनल ईमानदारी के आधार पर करियर बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि क्लासमेट ही भविष्य में साथी, कोर्ट में दुश्मन और शायद ज्यूडिशियरी के सदस्य बनेंगे. उन्होंने पास आउट होने वाले स्टूडेंट्स से कहा कि आप एक ऐसे प्रोफेशनल सफर में जा रहे हैं जो अनिश्चितता और जिम्मेदारी से भरा है, जिसमें एक अच्छा करियर मिलकर काम करने की क्षमता और प्रोफेशनल ग्रोथ के लंबे समय के नेचर को अपनाने की इच्छा पर निर्भर करता है.
कानूनी पेशे को लेकर छात्रों को दी कई जानकारियां
ग्रेजुएट्स, फैकल्टी मेंबर्स और परिवारों को संबोधित करते हुए, CJI ने प्रोफेशनल रिश्तों के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, हालांकि कानूनी शिक्षा अक्सर परीक्षाओं, रैंकिंग और प्लेसमेंट के ज़रिए कॉम्पिटिशन पर ज़ोर देती है, लेकिन कानूनी पेशा खुद मिलकर काम करने से चलता है." लीगल सिस्टम और कई सहायक नदियों से बनी नदी के बीच एक तुलना करते हुए, उन्होंने समझाया कि न्याय का एडमिनिस्ट्रेशन जूनियर, सीनियर, कलीग और यहां तक कि विरोधी वकील की मिली-जुली कोशिश का नतीजा है.
साथियों के साथ सम्मान से पेश आएं- सीजेआई
CJI ने ग्रेजुएट्स को सलाह दी कि वे अपने साथियों के साथ सम्मान, सहानुभूति और निष्पक्षता से पेश आएं, यह देखते हुए कि क्लासमेट भविष्य में कलीग, कोर्ट में विरोधी और शायद ज्यूडिशियरी के सदस्य बनेंगे.उन्होंने बार में अपने शुरुआती सालों का एक अनुभव शेयर किया, जहां बिना किसी स्वार्थ के साथी वकील की मदद करने से हमेशा के लिए प्रोफेशनल भरोसा और सहयोग बना.
लीगल फील्ड काफी लंबा फील्ड है- सीजेआई
उन्होंने कहा, "ऐसे अच्छे काम न केवल व्यक्तिगत करियर को बल्कि लीगल प्रोफेशन की क्रेडिबिलिटी को भी मजबूत करते हैं, उन्होंने लीगल फील्ड को एक "लंबे समय तक चलने वाला खेल" बताया, जिसमें अधिकार और पहचान दशकों में धीरे-धीरे बनती है.उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "प्रैक्टिस के शुरुआती साल धीमे और अनिश्चित लग सकते हैं, खासकर जब दूसरे प्रोफेशन की तुलना में जहां तरक्की तेज़ी से होती दिखती है. इस दौरान मिली बुनियादी सीख-कोर्ट के कामकाज को समझना, लीगल रीज़निंग और क्लाइंट एंगेजमेंट लंबे समय तक चलने वाली सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है.
"टाइमलाइन में प्रोग्रेस को न मापें"
उन्होंने ग्रेजुएट्स को हिम्मत दी कि वे कम टाइमलाइन में प्रोग्रेस को न मापें, और इस बात पर ज़ोर दिया कि कंसिस्टेंसी, मेहनत और ईमानदारी से आखिरकार हमेशा रहने वाला सम्मान मिलता है. उन्होंने कहा कि अनदेखी नींव भविष्य की उपलब्धियों की ताकत तय करती है. ग्रेजुएट स्टूडेंट्स एक-दूसरे को सपोर्ट करें, प्रोफेशनल कम्युनिटी से जुड़े रहें, और ज़िंदगी में बैलेंस बनाए रखते हुए ज़िम्मेदारियों को गंभीरता से लें
राज्य ज्यूडिशियल एकेडमी के कार्यक्रम में हुए शामिल
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को छत्तीसगढ़ स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी के कार्यक्रम में हिस्सा लिया. यहां उन्होंने स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी की संस्थागत विरासत को दिखाने के लिए नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द ज्यूडिशियरी नाम का एक ई-सोविनियर डिजिटली जारी किया.छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा भी इस अवसर पर शामिल हुए.इस अवसरपर उन्होंने ज्यूडिशियल एकेडमी को राज्य में ज्यूडिशियल एक्सीलेंस की नींव बताया.
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इस अवसर पर कहा कि यह ई-सोविनियर एकेडमी के विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और मॉडर्न, टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड ज्यूडिशियल ट्रेनिंग में बदलाव को दिखाता है, और CJI का मार्गदर्शन राज्य में भविष्य की ज्यूडिशियल शिक्षा और सुधार पर काफी असर डालेगा.
छत्तीसगढ़ के इतिहास का सीजेआई ने किया जिक्र
इस मौके पर बोलते हुए, CJI ने कहा कि छत्तीसगढ़, जिसे अक्सर भारत की विविधता का छोटा रूप कहा जाता है, सांकेतिक रूप से शासन और संस्थागत ताकत के विचार को दिखाता है. छत्तीस किलों की भूमि" के रूप में "छत्तीसगढ़" के ऐतिहासिक अर्थ के साथ तुलना करते हुए, उन्होंने संवैधानिक अदालतों को लोकतंत्र के आधुनिक संरक्षक बताया जो अधिकारों की रक्षा करते हैं और सत्ता पर संवैधानिक सीमाओं को बनाए रखते हैं.
जजों को सिद्धांतों पर दृढ़ रहना चाहिए, आचरण में संयमित रहना चाहिए और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए. साथ ही, अदालतों को अलग-थलग संस्थाएं नहीं बनना चाहिए. न्याय तक पहुंच बस्तर और सरगुजा सहित राज्य के सभी क्षेत्रों तक होनी चाहिए- सूर्यकांत, सीजेआई
सीएम साय ने सीजेआई से की मुलाकात
इससे पहले CJI ने यहां छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की. CM ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता और एक पारंपरिक शाही 'गमछा' दिया, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है.साय ने CJI को दुनिया भर में मशहूर बस्तर दशहरा त्योहार पर एक कॉफी टेबल बुक भी दी, साथ ही भगवान राम और माता शबरी की तस्वीर वाली एक बारीकी से बनी बेल-मेटल की रेप्लिका भी भेंट की.
सीजेआई ने डिजिटल संग्रहालय का किया दौरा
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रायपुर में देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय का दौरा किया. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह जनजातीय संग्रहालय अद्वितीय है. उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से वाकिफ होना चाहिए. चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अंदोलनों और शौर्य गाथाओं पर संग्रहालय में बने प्रत्येक गैलरी को निकट से देखा. उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियां लोगों को शोषण एवं अन्याय के खिलाफ एक जुट होने और उसका प्रतिकार करने के लिए प्रेरित करेंगी.

