कभी अंग्रेज सैनिक यहां करते थे विश्राम, आज आजाद पार्क की बदतर हालत देखकर आ जाएगा रोना!
गया का ऐतिहासिक आजाद पार्क अब दूध मंडी, दुर्गंध, असामाजिक तत्वों और उपेक्षा से जर्जर हो गया है. कभी अंग्रेज सैनिक यहां करते थे विश्राम.

Published : February 14, 2026 at 10:50 AM IST
|Updated : February 14, 2026 at 10:56 AM IST
गया: बिहार के गया शहर के हृदय में स्थित आजाद पार्क एक ऐतिहासिक स्थल है, जो ब्रिटिश काल से अपनी पहचान रखता है. अंग्रेजी शासन के दौरान इसे बीडीक पार्क या ब्रिटिश पार्क के नाम से जाना जाता था. अंग्रेजी हुकूमत के दिनों में यहां अंग्रेजी सैनिक विश्राम करते थे. आज इसकी हालत बद से बदतर हो गई है.
ब्रिटिश काल में बीडीक पार्क का महत्व: 1910 के आसपास निर्मित इस पार्क में अंग्रेज सैनिक विश्राम करते थे. यह पार्क शहर के मध्य भाग में स्थित होने के कारण महत्वपूर्ण था. ब्रिटिश हुकूमत में बिहार का पहला पिलग्रिम अस्पताल इसी पार्क के सामने बना था, जिससे दूर-दराज से आने वाले लोग यहां आराम करते थे.
आजादी के बाद नाम बदला: स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस पार्क का नाम आजाद पार्क रखा गया. आजादी के शुरुआती दिनों में यह शहरवासियों के लिए मुख्य स्थल था. लोग यहां मॉर्निंग वॉक, व्यायाम, योग और सैर-सपाटे के लिए बड़ी संख्या में आते थे. पार्क की खूबसूरती और शांति लोगों को आकर्षित करती थी.
शहर के केंद्र में स्थित होने के बावजूद उपेक्षा: भौगोलिक स्थिति के कारण आजाद पार्क को मॉडल पार्क बनना चाहिए था, लेकिन समय के साथ इसकी स्थिति बिगड़ती गई. शहर के कारिंदों द्वारा लंबे समय से उपेक्षा के कारण पार्क बदरंग और जर्जर हो गया है. ऐतिहासिक महत्व होने के बावजूद इसे संरक्षित नहीं किया गया.

दूध मंडी में तब्दील हो गया पार्क: वर्तमान में आजाद पार्क की पहचान दूध मंडी के रूप में हो गई है. सुबह से अपराह्न तक यहां ग्रामीण इलाकों से आने वाले दूध विक्रेता अपना डेरा जमा लेते हैं. यह मंडी काफी प्रसिद्ध हो गई है, लेकिन इससे पार्क में कोलाहल और शोर मचा रहता है.
शांति की तलाश में आने वाले निराश होते हैं: शहरवासी स्वास्थ्य के लिए व्यायाम या योग करने घर से निकलते हैं, लेकिन पार्क पहुंचते ही दूध मंडी के शोर से उनका मन भंग हो जाता है. कई लोग खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं. सोर्स के अनुसार, मंडी लगाने के एवज में पैसे भी वसूले जाते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि संबंधित विभाग ही कर सकता है.

मुख्य गेट पर टॉयलेट की दुर्गंध: पार्क के मुख्य गेट पर टॉयलेट बना दिया गया है, जिसका पानी सड़क पर बहता है. प्रवेश करते ही सड़ांध और बदबू से मुंह बंद करना पड़ता है. नए लोग यहां आकर दोबारा आने से कतराते हैं, जबकि स्थानीय मजबूरन आते हैं.

असामाजिक तत्वों का जमावड़ा: पार्क में ताश खेलने वाले, गांजा-सिगरेट पीने वाले और अन्य असामाजिक तत्वों की संख्या अधिक है. इससे संभ्रांत परिवार, विशेषकर महिलाएं यहां आने से हिचकिचाते हैं. पहले बड़ी संख्या में लोग आते थे, अब गिने-चुने ही आते हैं.

देशबंधु चितरंजन दास की प्रतिमा तक पहुंच मुश्किल: पार्क में देशबंधु चितरंजन दास की प्रतिमा स्थापित है, लेकिन उसके गेट पर हमेशा ताला लटका रहता है. केवल विशेष मौकों या नेताओं के आने पर खोला जाता है. लोग नजदीक जाकर श्रद्धांजलि नहीं अर्पित कर पाते.

झरना और सौंदर्यीकरण की विफलता: सौंदर्यीकरण के नाम पर अच्छी राशि आती है, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं होता. पार्क में फूल-पत्ते नहीं लगे, पेड़-पौधे कम हैं. लगा झरना कुछ दिनों चलता है, फिर बंद हो जाता है. वर्तमान में झरना बंद पड़ा है.

स्थानीय लोगों की शिकायतें और मांगें: शहरवासी जैसे किशोरी सिन्हा, धर्मेंद्र कुमार, आशुतोष कुमार, अजीत कुमार सिन्हा और आकाश कुमार ने गंदगी, दुर्गंध, असामाजिक तत्वों और दूध मंडी पर चिंता जताई है. वे फूल-पत्ते लगाने, सफाई, दुर्गंध हटाने और बेहतर व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. महिलाओं के आने से कतराने और पार्क की जर्जर स्थिति पर दुख व्यक्त किया. किशोरी सिन्हा ने बताया कि वह बचपन से यहां आ रहे हैं लेकिन व्यवस्था नहीं बदली.
"कुछ दिनों से गया में है. 35 किलोमीटर दूर से गया आए हैं. सुबह-सुबह आजाद पार्क में चले आते हैं. किंतु यहां बहुत गंदगी है. टॉयलेट की स्थिति एकदम बदतर है. यहां पीने के लिए पानी भी नहीं है. टॉयलेट का पानी सड़क पर बहता है."-किशोरी सिन्हा, स्थानीय

ईटीवी भारत की जांच में सामने आई खामियां: ईटीवी भारत के सिविक इश्यूज में पार्क की कई खामियां उजागर हुईं. दुर्गंध, दूध मंडी, असामाजिक तत्व और लापरवाही स्पष्ट दिखी. पार्क को राम भरोसे छोड़ दिया गया लगता है. कई दशकों से शिकायतें हैं, लेकिन कोई गंभीरता नहीं बरती गई.

पार्षद का दावा और सवाल: वार्ड पार्षद धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि रोज सफाई होती है और गंदगी नहीं है. व्यवस्था चाक-चौबंद है, जबकि झरना टेक्निकल समस्या से बंद है. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति विपरीत है और सुधार की जरूरत है.
"यहां रोज साफ सफाई होती है. यहां गंदगी नहीं है. आजाद पार्क वार्ड 20 के अंतर्गत आता है. यहां की व्यवस्था चाक-चौबंद है. वहीं, झरना खराब होने के पीछे टेक्निकल कारण है."-धर्मेंद्र कुमार, वार्ड पार्षद

पार्क को मॉडल बनाने की मांग: गया के मेयर गणेश कुमार ने बताया कि पार्क में जो समस्याएं हैं, उसे लेकर जल्द ही काम किया जाएगा. वहीं लोगों का कहना है कि गया जैसे ऐतिहासिक शहर में आजाद पार्क को मॉडल पार्क बनाना चाहिए. युवा, बच्चे, बुजुर्गों के लिए बेहतर सुविधाएं हों, अतिक्रमण हटे और असामाजिक तत्वों पर रोक लगे. शहर के बीचों-बीच स्थित इस पार्क को पुनर्जीवित कर लोगों के लिए चैन का स्थान बनाया जा सकता है.
"आजाद पार्क में कुछ समस्याएं हैं, तो उसे दिखाया जाएगा. आवश्यकता अनुसार जल्द ही कदम उठाए जाएंगे."- गणेश कुमार, मेयर, गया
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