अंबिकापुर में सिटी बस टर्मिनल भवन बना प्राइवेट गैरेज, कबाड़ बसें बढ़ा रही हैं शोभा
अंबिकापुर में सिटी बस टर्मिनल निजी ऑपरेटर के गैरेज में तब्दील हो चुका है.वहीं सड़कों पर दौड़ने के लिए आईं बसें कबाड़ बन चुकी हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 29, 2025 at 7:11 PM IST
सरगुजा : अम्बिकापुर शहर में सिटी बस के संचालन के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर बना सिटी बस टर्मिनल बिल्डिंग अब कबाड़ में तब्दील हो रहा है. निजी बस ऑपरेटर को भवन हैंडओवर करने के बाद ये एक गैरेज में तब्दील हो गया है. हैरानी की बात तो ये है कि अधिकारियों ने भी इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. आलम ये है कि इस सिटी बस टर्मिनल में अब प्राइवेट बस संचालक का कब्जा है.
निजी बस ऑपरेटर को सौंपी गई जिम्मेदारी
सिटी बसों के संचालन के लिए प्रदेश की तत्कालीन बीजेपी सरकार ने वर्ष 2015 में सिटी बस टर्मिनल भवन के निर्माण की स्वीकृति दी थी. शासन से दो करोड़ रुपए की स्वीकृति मिलने के बाद 27 जनवरी 2015 को नगर निगम ने इसके लिए वर्क ऑर्डर जारी किया. भवन निर्माण 6 माह में ही पूरा करने की मियाद रखी गई थी ,लेकिन लेट लतीफी के कारण निर्माण पिछड़ गया. लम्बे प्रयास के बाद साल 2022 में सिटी बस टर्मिनल भवन का निर्माण पूरा करके इसके संचालन का जिम्मा निजी बस ऑपरेटर को सौंपा गया.

क्यों निजी संचालकों को दी गई जिम्मेदारी ?
शासन की मंशा थी कि शहर की सभी सिटी बसें एक ही छत के नीचे खड़ी होंगी और एक ही स्थान से प्रतिदिन जिले भर के लिए रवाना होंगी. लेकिन वर्तमान में शासन की ये मंशा भी सफल होती नहीं दिख रही है.शहर की सड़कों से सिटी बसें गायब हैं.जो बसें बची हैं वो भी चलने की हालत में नहीं है.ऐसे में करोड़ों रुपए की लागत से बना सिटी बस टर्मिनल निजी ऑपरेटर्स का गैरेज बनकर रह गया है. सिटी बस टर्मिनल भवन में निजी ऑपरेटर की गाड़ियां और सिटी बसें कबाड़ में बदल रही हैं. देखरेख के अभाव में सिटी बस टर्मिनल कबाड़ में तब्दील होता दिख रहा है.
40 बसें चलाने की मिली थी मंजूरी
अंबिकापुर शहर सहित जिले वासियों के लिए शासन ने 40 बसें दी थी. इन बसों का संचालन सरगुजा शहरी यातायात सोसायटी के तहत सरगुजा बस ऑपरेटर कर रहे थे. बताया जा रहा है कि वर्तमान में 22 बसें कबाड़ हो चुकी है जबकि 18 बसों की कोई जानकारी नहीं है. बड़ी बात तो यह है कि सरगुजा में वर्तमान में कितनी सिटी बसें चल रही है और बस टर्मिनल भवन की क्या स्थिति है इसे लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी किसी तरह की जानकारी नहीं है.
'बस टर्मिनल का नहीं हो रहा है सदुपयोग'
युवा नेता हिमांशु जायसवाल के मुताबिक 2015 में बीजेपी ने इस टर्मिनल की स्वीकृति दी थी. लेकिन काम नहीं हो सका, कांग्रेस की सरकार आई तो 2 करोड़ की लागत से सिटी बस के लिए टर्मिनल बनाया था, लेकिन ना बस का पता है और ना ही टर्मिनल का सदुपयोग हो रहा है.
प्राइवेट बस वाले इसका उपयोग कर रहे हैं तो ये भी गलत है, प्रशासन इसको फिर से चालू करे, सिटी बस की सुविधा लोगों को मिले- हिमांशु जायसवाल, युवा नेता
वहीं इस पूरे मामले में सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा है कि टर्मिनल को लेकर समीक्षा की जाएगी.
प्राइवेट बस संचालक अगर टर्मिनल में हैं तो हम उसकी समीक्षा करेंगे. उसको दिखवाकर समीक्षा कराएंगे- अजीत वसंत,कलेक्टर
वहीं इस मामले में नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने कहा है कि सिटी बस टर्मिनल को लेकर जानकारी ली जाएगी. भवन का सही उपयोग हो इस दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे. अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए गए है.
कुल मिलाकर जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों ही इस मामले से अनजान है कि सिटी बस टर्मिनल फिलहाल किस स्थिति में है. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आम जनता के लिए शुरु की गई सेवा का जिले में क्या हाल होगा.
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