चार नए लेबर कोड के विरोध में हिमाचल में CITU का हल्ला बोल, जानिए क्या है डिमांड?
चार नए लेबर कोड के विरोध में हिमाचल में CITU ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 12, 2026 at 3:46 PM IST
|Updated : February 12, 2026 at 4:36 PM IST
शिमला: चार नए लेबर कोड के विरोध में CITU ने हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में सरकार के खिलाफ विरोध रैली निकाली. इस विरोध प्रदर्शन में 10 ट्रेड यूनियन शामिल हुए. रैली में चार नए लेबर कोड का विरोध जताते हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोला है. सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए पंचायत भवन से डीसी ऑफिस तक विरोध मार्च किया गया.
चार नए लेबर कोड के विरोध में CITU का प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस दौरान CITU के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि, "सरकार मजदूरों को बंधुआ मजदूरी की तरफ धकेलने की कोशिश कर रही है. यह मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई है. देश में पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का काम हो रहा है. विरोध रैली में आउट सोर्स और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नीति बनाने की मांग की गई. मनरेगा ख़त्म करने का भी विरोध किया गया. सरकार को मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए. सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा. मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है. जब तक सरकार अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती, तब तक वे विरोध जारी रखेंगे."
हमीरपुर में ट्रेड यूनियनों का हल्ला बोल
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड, जीआरएम (जी राम जी), बिजली संशोधन बिल और स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में सीटू के बैनर तले सोमवार को हमीरपुर में प्रदर्शन किया गया. इस विरोध प्रदर्शन में 12 ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों सहित आउटसोर्स कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य संगठनों के सदस्यों ने भाग लिया. प्रदर्शनकारियों ने शहर में रोष मार्च निकालते हुए गांधी चौक तक रैली निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. गांधी चौक पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाया. उन्होंने बिजली संशोधन बिल और स्मार्ट मीटर योजना का भी विरोध जताते हुए इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ करार दिया.
गांधी चौक तक निकाला रोष मार्च
सीटू के जिला सचिव जोगिंद्र ठाकुर ने कहा कि, "सरकार की नीतियां मजदूरों को बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलने का प्रयास हैं. यह आंदोलन मजदूर वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए है और पूरे देश में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए श्रम कानूनों में बदलाव कर रही है."

इस अवसर पर सीटू के राष्ट्रीय सचिव ठाकुर कश्मीर सिंह ने कहा कि, "केंद्र सरकार मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों पर कुठाराघात कर रही है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पिछले पांच माह से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनमें भारी रोष है. जीआरएम और अन्य नीतियों का असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ेगा और इससे आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी. देश में 'अघोषित आपातकाल' जैसी स्थिति बनी हुई है. जब तक सरकार विवादित कानूनों को वापस नहीं लेती और अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती, तब तक विरोध जारी रहेगा."

कुल्लू में मनरेगा, श्रम कानून को लेकर गरजे मजदूर
भारत सरकार के द्वारा हाल ही में मनरेगा कानून में लाए गए बदलाव, श्रम कानून में बदलाव को लेकर देश भर में मजदूर संगठनों में रोष व्याप्त है तो वहीं जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर में भी संयुक्त ट्रेड यूनियन के द्वारा केंद्र सरकार के द्वारा कानून में लाए गए बदलाव का विरोध किया गया. संयुक्त ट्रेड यूनियन के बैनर तले सैकड़ों मजदूरों ने ढोल नगाड़ों को थाप पर ढालपुर में रैली भी निकाली और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह कानून में लाए गए बदलाव को रद्द करें. वरना मजदूरों के द्वारा देश भर में आंदोलन किए जाएंगे.
संयुक्त ट्रेड यूनियन के द्वारा ढालपुर में डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया गया. वहीं, सैकड़ों मजदूरों को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य सचिव प्रेम गौतम ने कहा कि, "केंद्र की सांप्रदायिक कॉर्पोरेट गठजोड़ की भाजपा सरकार द्वारा हाल ही में मनरेगा कानून 2005 को खत्म कर दिया और देश में 12 करोड़ परिवारों से रोजगार और रोजी रोटी की गारंटी छीन कर संसद ने विकसित भारत ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी (वी. बी. जी राम जी) कानून पारित किया है. मनरेगा कानून जॉब कार्ड धारक व्यक्ति को काम मांगने पर रोजगार की गारंटी देता था. लेकिन, भाजपा सरकार द्वारा लाए गए कानून में इस अधिकार को खत्म कर दिया गया है."

ढोल नगाड़ों के साथ किया केंद्र सरकार के फैसले का विरोध
सीटू के राज्य सचिव प्रेम गौतम ने कहा कि, मनरेगा में किसी गांव या परिवार में काम तय करने की शक्तियां पंचायत के पास थीं, लेकिन नए कानून में गांव में क्या काम होगा. यह दिल्ली में केंद्र सरकार तय करेगी और पंचायत को इस बारे कोई अधिकार नहीं होगा. मनरेगा में वेतन के 100 प्रतिशत खर्चे की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के पास थी. सामान, बजरी, रेत, सीमेंट आदि के लिए भी 75 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देती थी और 25 फीसदी पैसा राज्य सरकार देती थी. लेकिन नए कानून में राज्य सरकार 40 प्रतिशत और केंद्र सरकार 60 प्रतिशत खर्च वहन करेगी.
केंद्र सरकार से कानूनों में बदलाव को रद्द करने की मांग
प्रेम गौतम ने कहा कि, राज्य जब 40 फीसदी पैसा जमा करेगी, तब केंद्र सरकार अपना 60% हिस्सा देगी. जब राज्य सरकारें स्वयं कर्जे में हैं तो केंद्र सरकार की नई स्कीम जन्म लेने से पहले ही खत्म हो जाएगी. इसके अलावा मनरेगा में काम मांगने पर यदि पंचायत पात्र आवेदक व्यक्ति को काम नहीं देती थी तो 15 दिन बाद न्यूनतम वेतन का 50 फीसदी बेरोजगारी भत्ता आवेदक व्यक्ति को सरकार देती थी. नए कानून में इस तरह का प्रावधान नहीं है. प्रेम गौतम ने कहा कि, मनरेगा देश के 12 करोड़ परिवारों की जीवन रेखा है, जिसमें न्यूनतम वेतन की गारंटी थी. नए कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.
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