सिंफर वैज्ञानिकों की नई पहल, छात्रों को कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण में बना रहे दक्ष
सिंफर के वैज्ञानिक BBMKU के छात्रों को स्किल डेवलपमेंट और पर्यावरण संरक्षण पर ट्रेनिंग दे रहे हैं.


Published : January 8, 2026 at 1:31 PM IST
|Updated : January 8, 2026 at 2:34 PM IST
धनबाद: सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (CSIR-CIMFR) देश के प्रमुख रिसर्च संस्थानों में से एक है. इस संस्थान के वैज्ञानिकों ने साइंस और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में स्टूडेंट्स के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत की है. उनकी इस अनोखी पहल का मकसद स्टूडेंट्स को न सिर्फ किताबी ज्ञान देना है, बल्कि उनमें कौशल विकास को विकसित करना है ताकि वे पर्यावरण संतुलन को बेहतर बनाने की दिशा में योगदान दे सकें. यह पहल मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौतों जैसी समस्याओं को हल करने में खास तौर पर असरदार साबित हो सकती है.
बीबीएमकेयू के जूलॉजी एमएससी के 35 छात्रों को सिंफर के वैज्ञानिक ट्रेनिंग दे रहे हैं. ट्रेनिंग का उद्देश्य कौशल विकास के साथ उन्हें रोजगार से जोड़ना तो है ही साथ ही पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में एक पहल है. सिंफर के वैज्ञानिक, वाटर रिसोर्स, सॉयल क्वालिटी, बायोडाइसिटी, माइनिंग इंपैक्ट और इकोलॉजिकल डायवर्सिटी जैसे तमाम चीजों को प्रैक्टिकली बता जा रहे हैं. वर्तमान में पानी की समस्याओं और भविष्य में होने वाले कठिनाइयों की वैज्ञानिक तरीके से छात्रों को जानकारी दी जा रही है. यही नहीं उन कठिनाइयों से निजात के तरीके भी बताए जा रहें हैं.
सिंफर के सीनियर वैज्ञानिक डॉ सुदर्शन सिंह राठौर ने बताया कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों और उपकरण के इस्तेमाल से होने वाली क्षति की जानकारी दी जा रही है. जैसे पानी या मिट्टी में मौजूद हानिकारक तत्वों के बारे में बताया जा रहा है. हानिकारक तत्वों को कम करने के बारे में प्रैक्टिल के माध्यम से बताया जा रहा है. सिंफर में होने वाले रिसर्च और उसकी जरूरत की जानकारी दी जा रही है. माइनिंग के कारण हवा पानी और मिट्टी में बढ़ रहे प्रदूषण से निपटने को लेकर ट्रेनिंग दी जा रही है. ताकि इनके अंदर कौशल विकास हो सके. छात्र जब रोजगार से जुड़ेंगे उनके लिए यह काफी सहायक साबित होगा.
वैज्ञानिक डॉ जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि छात्रों का कौशल विकास करना है. बच्चे यहां से सीखेंगे तभी अपने समाज में जागरूकता फैला सकेंगे. किसी भी तरह की दिक्कत आने पर वह उसका सामना कर सकेंगे. अपने आस पास के लोगों को सुरक्षित रख सकेंग. मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रदूषित पानी पीने से हुई मौत जैसी घटना पर भी बहुत हद तक लगाम लग सकता है. पानी के बारे में जानकारी रहने पर इस भयावह हादसे को रोका जा सकता था. लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोगों की जान गई. छात्र यहां से सीखकर जाएंगे तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह अपने इलाके में भी लोगों को जागरूक करेंगे. यही नहीं जिस क्षेत्र में भी ये कार्य करेंगे, वहां भी बेहतर तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे.
वहीं छात्रा मेघा लाहिरी ने कहा कि यहां काफी कुछ सीखने को मिला है. अपने यूनिवर्सिटी में नहीं सिख पा रहे थे. जॉब में सीखी गई चीजें काफी मददगार साबित होगी. माइनिंग के साथ जूलॉजी को मर्ज कर सकेंगे. जॉब के ज़्यादा अवसर मिल सकेंगे. इसके साथ ही पर्यावरण को संरक्षण के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए यह भी बताया गया है. पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह प्रशिक्षण काफी अच्छा है.
वहीं छात्रा राखी कुमारी ने कहा कि निजी जीवन के लिए भी यह ट्रेनिंग काफी महत्वपूर्ण है. आने वाली पीढ़ी को हम बेहतर वातावरण देने में सफल रहेंगे. जैसे पानी में उपलब्ध हानिकारक तत्व के कारण शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है. कई तरह की बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहें हैं. बीमारियों से बचने के लिए हमे तरीके बताए गए हैं.
छात्रा प्रीति कुमारी ने कहा कि कौशल विकास के लिए यह ट्रेनिंग बहुत ही ज्यादा जरूरी है. प्रैक्टिकल नॉलेज स्किल डेवलपमेंट के लिए काफी जरूरी है. उन्होंने कहा कि हम अपने आप को सौभाग्यशाली मानते हैं कि हमें वैज्ञानिकों के द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है. हम जो सीखकर जाएंगे उससे लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है.
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