प्रवासी पक्षियों की पहचान बने छुइहा जलाशय को मिलेगा पर्यटन का नया स्वरूप, अतिक्रमण हटेगा, होगा सौंदर्यीकरण
जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में छुईहा जलाशय समेत कई पर्यटन स्थलों का स्वरूप बदलने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 8, 2026 at 9:01 AM IST
बलौदाबाजार: मंगलवार को कलेक्टर कुलदीप शर्मा की अध्यक्षता में जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में जिले के पर्यटन मानचित्र को नया रूप देने के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए. स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया.
बलौदाबाजार की लाइफलाइन छुइहा जलाशय का सौंदर्यीकरण
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए सभी चिन्हित स्थलों का तेजी से विकास किया जाए. उन्होंने शहर के नजदीक स्थित छुइहा जलाशय सौंदर्यीकरण और विकास पर विशेष ध्यान देने और इसे एक प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाने को कहा.
अतिक्रमण पर होगी कार्रवाई
जलाशय के जमीन पर अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारी को तत्काल कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया कि सम्बंधित एसडीओ और सब इंजीनियर को नोटिस जारी किया जाए.
पर्यटन स्थलों का होगा सौंदर्यीकरण
कलेक्टर ने नवीन कृषि उपज मण्डी के पास खोरसी नाला में चेक डेम निर्माण और वृक्षारोपण, सोनबरसा जंगल सफारी में सुविधा विस्तार, गिरौदपुरी धाम, गिधौरी के पास महानदी तट का सौन्दर्यीकरण पर भी चर्चा की. इसके साथ ही हीरा स्व सहायता समूह द्वारा जलाशय में बोटिंग संचालन प्रस्ताव पर सुरक्षा एवं सुविधाओं का परीक्षण करने का निर्णय लिया गया.
बैठक में बताया गया कि पर्यटन स्थलों के विकसित होने से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान और गाइड के रूप में लोग आत्मनिर्भर बन सकेंगे. बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन, जिला पंचायत सीईओ दिव्या अग्रवाल सहित समिति के सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे.
शीत ऋतु में पहुंचते हैं प्रवासी पक्षी
छुइहा जलाशय में गत कई दशकों से शीत ऋतु के प्रारंभ में ही सैकड़ो प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं. शीत ऋतु प्रारंभ होते ही इन पक्षियों का जलाशय पहुंचना शुरू हो जाता है. मार्च तक ये जलाशय के आसपास ही रहते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं. बीते कुछ वर्षों से आसपास हो रहे अतिक्रमण, शिकारियों की आमद, औद्योगीकरण का असर आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या पर पड़ रहा है.

