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Childline Report : पलायन में शेल्टर करवाने के हर माह कई मामले, लव अफेयर में सबसे ज्यादा

सोशल मीडिया के जरिए संपर्क या एक ही गांव या कस्बे के निवासी होने के बाद लड़के-लड़कियां पलायन कर जाते हैं. जानिए शेल्टर की स्थिति...

Minors Running Away Report
घर से पलायन वाले बच्चों की रिपोर्ट... (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 6, 2026 at 7:42 PM IST

6 Min Read
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कोटा: चाइल्डलाइन ने घर से पलायन करने वाले 193 बच्चों को साल 2025 में रेस्क्यू किया और उन्हें शेल्टर करवाया. हालांकि, चाइल्डलाइन के रेस्क्यू में बच्चों की संख्या ज्यादा रहती है, लेकिन अधिकांश को शेल्टर नहीं करवाया जाता है. इन बच्चों में सबसे ज्यादा मामले लव अफेयर के सामने आए हैं, जिसके चलते बच्चों ने घर से पलायन किया.

बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक रामराज मीणा ने बताया कि लड़कों में करीब 30 और लड़कियों में 35 फीसदी मामलों में घर से पलायन करने का कारण लव अफेयर है. दिन में सोशल मीडिया के जरिए संपर्क या एक ही गांव या कस्बे के निवासी होने के बाद यह पलायन कर जाते हैं. पलायन करने के कारण में पेरेंट्स ने डांट दिया, दोस्तों के साथ घूमने के लिए निकल गए व इंस्ट्राग्राम, फेसबुक व सोशियल मीडिया से सम्पर्क हुआ.

पलायन में शेल्टर करवाने के हर माह कई मामले, सुनिए... (ETV Bharat Kota)

अधिकांश बिना टिकट पकड़ में आते हैं. दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर ज्यादा रेस्क्यू : सहायक निदेशक मीणा ने बताया कि दिल्ली-मुंबई रेल लाइन पर सबसे ज्यादा रेस्क्यू होते हैं. यहां रेस्क्यू होने वाले बच्चों को रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स या फिर जीआरपी के जरिए लाया जाता है. इसके अलावा कोटा जिले के अलग-अलग स्थान से भी बच्चों को रेस्क्यू कर लाया जाता है.

ट्रेन में अधिकांश बिना टिकट बच्चे पकड़ में आते हैं, जिन्हें रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के हवाले स्टाफ कर देता है. जिसके बाद इन बच्चों को शेल्टर करवा देती है और चाइल्डलाइन को सूचना देता है. इसके बाद चैनल की फ्लाइंग मौके पर पहुंच कर इन बच्चों को रेस्क्यू कर लेती है और बाल कल्याण समिति के समक्ष शेल्टर करवा देती है. कुछ बच्चे जीआरपी थाना पुलिस के जरिए भी होते हैं. यह अधिकांश स्टेशन पर मिलते हैं या फिर आरपीएफ-जीआरपी के हैंडओवर कर देती है. इसी तरह से मजदूरी करने के लिए ले जाए जाने वाले बच्चों का ज्यादातर रेस्क्यू गुजरात जाने वाली ट्रेनों में होता है. यह लोग बिहार से गुजरात की तरफ जाते हैं.

Shelter Record in Migration
यह हैं पलायन में शेल्टर के आंकड़े (ETV Bharat GFX)

एक साथ पकड़ में आई थी बाल मजदूरी : बाल अधिकारिता विभाग के जिला समन्वयक नरेश मीणा के अनुसार अप्रैल 2025 में एक साथ 44 बच्चों को रेस्क्यू किया गया था. यह बच्चे बारां जिले के निवासी थे और इन्हें कोटा जिले में सामूहिक विवाह सम्मेलन में भोजन परोसने के लिए लाया गया था. इसको बाल अधिकारिता विभाग और चाइल्डलाइन को सूचना मिली थी. जिसके बाद इन बच्चों को पुलिस की मदद से रेस्क्यू किया गया. हालांकि, बाद में पुलिस ने इस मामले में मुकदमा भी दर्ज कर लिया था, जिसमें चाइल्ड लेबर का मामला बना था.

सोशल मीडिया बना सबसे घातक : बाल संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि सबसे ज्यादा मामले मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए आते हैं. इनमें इंस्टाग्राम और फेसबुक में अलग-अलग आईडी बनाकर संपर्क कर लेते हैं. इसके बाद ही इनका घर से पलायन करने का प्लान बन जाते हैं. इसके बाद जेब में पैसा नहीं होने के बावजूद भी यह लोग निकल जाते हैं. चाइल्डलाइन की टीम में काउंसलर महिमा पांचाल, सुपरवाइजर श्रुति शर्मा, जयवीर खटाना, उमेश गौतम, अमित कुशवाहा, बंटी सुमन और रितेश महावर शामिल हैं. ये सभी रेस्क्यू के बाद काउंसलिंग करते हैं.

Shelter During Child Migration
यह है पलायन में शेल्टर के आंकड़े (ETV Bharat GFX)

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केस 1 - प्रेम प्रसंग में भागे : दिल्ली से मुंबई के लिए निकले दो नाबालिग लड़का-लड़की दिसंबर 2025 में रेस्क्यू किए गए हैं. यह मामला लव अफेयर का निकला है. जिसमें लड़का-लड़की पहले से एक दूसरे को जानते थे और घर छोड़कर निकल गए. हालांकि, दोनों नाबालिग थे और ट्रेन में शक होने पर रेलवे स्टाफ ने पकड़ लिया. इसके बाद बाल कल्याण समिति ने दोनों के मां-बाप को बुलाकर सौंप दिया. इस मामले में लड़की की गुमशुदगी दिल्ली में दर्ज थी. ऐसे में दिल्ली पुलिस के समक्ष बाल कल्याण समिति ने सौंपा है. काउंसलिंग में लड़की ने नाम व धर्म अलग बताया था.

केस 2 - ट्रेन में घूमते रहे, कोटा में पकड़े गए : दिसंबर 2025 का ही मामला है. इस मामले में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी एक बालिका को युवक लेकर फरार हो गया था. पहले वह अपने परिचित के यहां पर हरिद्वार उत्तराखंड छोड़ आया, ताकि गांव के लोग शक नहीं करें. इसके कुछ दिन बाद यह घूमने के लिए निकल गए. जयपुर और वहां से कोटा आ गए. कोटा में आरपीएफ ने रोक लिया और फिर चाइल्डलाइन ने इनको रेस्क्यू किया. बाद में बालिका को परिजनों के हवाले किया गया. यह मामला भी लव अफेयर का निकला है.

केस 3 - सहेली से मिलाने का बहाना कर लेकर आई महिला : दिसंबर 2025 के ही अंतिम सप्ताह में मामला आया था. गुजरात के वापी निवासी एक नाबालिक बालिका की दोस्ती दूसरी लड़की से थी. उसकी मां बहला-फुसला कर पहले वापी अपने घर ले गई. बाद में उसे सूरत लेकर गई कि वह अपनी सहेली से मिलवा देगी, लेकिन बाद में एक व्यक्ति व सहेली की मां दोनों ट्रेन में बैठ कर दिल्ली की तरफ ले जा रही थी. बालिका कोटा में पानी पीने का बहाना कर उतर गई. पुलिस थाने जीआरपी में पहुंच गई. जिसके बाद बालिका को रेस्क्यू किया गया. हालांकि, इसमें महिला को उसके साथ का व्यक्ति फरार हो गया. बालिका को परिजनों के सुपुर्द किया गया.

केस 4 - दोस्त के बर्थडे का बहाना कर आई : दिसंबर महीने का ही मामला है, जिसमें कोटा जिले की ही एक गांव के रहने वाली लड़की अपनी फ्रेंड का बर्थडे बताकर घर से निकल गई. आरपीएफ ने रेलवे स्टेशन पर ही दोनों के बैठे होने पर उन्हें पकड़ लिया. इनके साथ एक अन्य लड़का भी था. ऐसे में दोनों को आरपीएफ ने पकड़ जीआरपी के हवाले कर दिया. जिसके बाद मामले का पूरा खुलासा हुआ. लड़की के परिजनों को बालिका सुपुर्द की गई. यह लोग ट्रेन का इंतजार कर रहे थे और मुंबई या दिल्ली दोनों में से कहीं जाने के लिए रवाना होने वाले थे.

केस 5 - नशे की लत, मां ने करवाया शेल्टर : कोटा जिले में ही रहने वाली एक नाबालिक को उसकी मां ने ही शेल्टर करवाया था. यह लड़की नशे से पीड़ित थी. उसकी मां को शक हो गया था. यह धूम्रपान और शराब का सेवन कर रही थी, जिसके बाद उन्हें पकड़ लिया था. उसकी दोस्ती भी कुछ लड़कों से थी. ऐसे में मां ने चाइल्डलाइन को इस संबंध में अवगत करवाया. महिला को शेल्टर करवाया.