ETV Bharat / state

चिकित्सा जगत में मिसाल: 5 साल के बच्चे को मिली नई जिंदगी, दूर हुूई दुर्लभ बीमारी!

केजीएमयू के डॉक्टरों का कमाल

केजीएमयू के डॉक्टरों का कमाल
केजीएमयू के डॉक्टरों का कमाल (Photo Credit: ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 30, 2026 at 8:34 AM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने पांच साल के बच्चे की रोबोटिक सर्जरी कर दुर्लभ जन्मजात बीमारी का सफल इलाज किया है. केजीएमयू की ओर से जानकारी दी गई है कि बच्चे की पित्त नलिका में सिस्ट बन जाने की वजह से प्रवाह रुका हुआ था, इसी वजह से उसे लगातार उल्टियां हो रही थी.

पेट दर्द और उल्टी से था परेशान: सीतापुर का रहने वाला बच्चा एक साल की उम्र से ही बार-बार पेट दर्द और उल्टी से परेशान था. स्थानीय इलाज से आराम नहीं मिलने पर परिवार केजीएमयू पहुंचा. यहां जांच में पता चला कि बच्चे को कोलेडोकल सिस्ट है. यह एक जन्मजात विकृति है जिसमें पित्त ले जाने वाली नली असामान्य रूप से फूल जाती है और सिस्ट बन जाता है.

केजीएमयू का कमाल: केजीएमयू में प्रो. डॉ. अर्चिका गुप्ता और उनकी टीम ने इस चुनौती को रोबोटिक तकनीक से पूरा किया. पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के प्रो. रवि प्रकाश कनौजिया की निगरानी में यह प्रक्रिया हुई. सर्जरी में पेट को बड़े चीरे से खोलने की जगह सिर्फ चार छोटे की-होल चीरे लगाए गए. रोबोट के थ्री-डी कैमरे और कलाइयों की तरह घूमने वाले उपकरणों से प्रभावित पित्त नली को सुरक्षित हटाया गया और छोटी आंत को जोड़कर पित्त के निकलने का नया रास्ता बनाया गया, जिसे रॉक्स-एन-वाई हेपेटिकोजेजुनोस्टोमी कहा जाता है.

बच्चों में, खासकर पांच साल से कम उम्र में रोबोटिक सर्जरी तकनीकी रूप से बहुत कठिन मानी जाती है क्योंकि जगह बहुत कम होती है और नाजुक नसों के पास काम करना होता है. दुनिया में पहली बार 2006 में पांच साल की बच्ची में रोबोटिक कोलेडोकल सिस्ट सर्जरी की रिपोर्ट आई थी. भारत में सरकारी अस्पताल में इतने छोटे बच्चे में यह प्रक्रिया अभी भी गिनी-चुनी जगहों पर ही हो रही है.- डॉ केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू

मासूम को मिली नई जिंदगी!
मासूम को मिली नई जिंदगी! (Photo Credit: ETV Bharat)

तकनीक के फायदे: इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खून कम बहता है, दर्द कम होता है और बच्चा जल्दी चलने-फिरने लगता है. इस बच्चे को भी सर्जरी के कुछ दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. यह सफलता उत्तर प्रदेश में बच्चों की एडवांस लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है.

बीमारी के बारे में जानिए: चिकित्सा विज्ञान में कोलेडोकल सिस्ट को दुर्लभ बीमारी माना जाता है. आंकड़ों के अनुसार एशियाई देशों में इसका प्रसार अधिक है और जापान में हर दस हजार बच्चों में से एक में यह मिलती है. भारत में इसके मामले कम देखे जाते हैं.इस बीमारी में पित्त का प्रवाह रुक जाता है जिससे बार-बार पित्त नली में संक्रमण, पैंक्रियाज में सूजन, लिवर खराब होना और आगे चलकर कैंसर तक का खतरा रहता है. इसलिए इसका एकमात्र स्थायी इलाज सर्जरी है.

यह भी पढ़ें: कैंसर वाले रसायन से दुनिया को मिलेगी मुक्ति! IITR लखनऊ ने विकसित की तकनीक, मिनटों में गायब होगा कैंसर का खतरा!

यह भी पढ़ें: मजबूत हौसला और तनावमुक्त मन, आसान बनाएगा कैंसर का ट्रीटमेंट, दवाओं के साथ 'दिमागी ताकत' भी जरूरी