सीएम सुक्खू ने न्यूजीलैंड के सेब से आयात शुल्क घटाने पर केंद्र को घेरा, बोले हिमाचल के साथ हो रहा अन्याय
एफटीए के तहत भारत ने न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी कम की है. इसे लेकर सीएम सुक्खू ने आपत्ति जताई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 29, 2025 at 7:27 PM IST
शिमला: न्यूजीलैंड से मुक्त व्यापार समझौते के तहत सेब पर शुल्क कम करने का हिमाचल सरकार समेत प्रदेश कांग्रेस नाराज है. केंद्र ने एफटीए के तहत सेब पर 50 फीसदी आयात शुल्क घटा कर इसे 25 प्रतिशत कर दिया है. पहले बीजेपी विधायक और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने इसे लेकर आपत्ति जाहिर की थी. वहीं, अब सीएम सुक्खू ने इसे लेकर नाराजगी जाहिर की है.
सीएम सुक्खू ने इसे हिमाचल के बागवानों के साथ अन्याय करार दिया है. सीएम सुक्खू ने कहा कि 'जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी है हिमाचल के साथ अन्याय हो रहा है. न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क कम करने से हिमाचल के बागवानों को नुकसान होगा. मैं इस मुद्दे को केंद्र के सामने रखूंगा.'
वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधायक कुलदीप राठौर ने कहा, 'ये फैसला देश विरोधी होने के साथ साथ सेब उत्पादकों के खिलाफ है. प्रधानमंत्री स्वदेशी की बड़ी बड़ी बातें तो करते है, लेकिन विदेशों से आने वाले सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करके विदेशी आयात को बढ़ावा दे रहे हैं. सेब पर आयात शुल्क कम करना सेब उत्पादकों का गला घोंटने जैसा है.'
Injustice to Himachal’s apple growers! The central BJP government has reduced import duties on apples from New Zealand, causing huge losses to our farmers. I will strongly raise this issue at the center. Stand with Himachal's orchardists! pic.twitter.com/jnLeTR4Qax
— Sukhvinder Singh Sukhu (@SukhuSukhvinder) December 29, 2025
मिठास जाना जाता है न्यूजीलैंड का सेब
हिमाचल में सेब का मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है. दूसरी ओर सस्ते विदेशी सेब को देश में प्रवेश देकर बागवानों मेहनत और आजीविका को खतरे में पड़ने लगी है. वहीं, अब केंद्र ने न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क कम कर दिया है. ऐसे में अब देश की विभिन्न मंडियों में न्यूजीलैंड का सेब सस्ते रेट पर बिकेगा. बागवान संजीव चौहान का कहना है कि 'विदेशी सेब को राहत देकर हिमाचल सहित अन्य सेब उत्पादन करने वाले राज्यों के बागवानों के साथ अन्याय हो रहा है. न्यूजीलैंड का सेब विश्व भर में मिठास के लिए जाना जाता है. ऐसे में आयात शुल्क में कटौती से न्यूजीलैंड का सेब भारतीय बाजारों में सस्ते दामों पर उपलब्ध होगा, जिससे हिमाचल के सेब को न तो उचित कीमत मिलेगी और न ही बराबरी का मुकाबला करने का अवसर मिलेगा. ये फैसला व्यापारिक फैसला नहीं है, बल्कि पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था और लाखों बागवान परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. ऐसे में केंद्र सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.'
इन देशों से आयात होता है सेब
भारत में सेब की अच्छी खासी खपत होती है और इसलिये कई देशों से आयात भी होता है. भारत हर साल ईरान से लेकर इटली और अफगानिस्तान से लेकर अमेरिका तक से सेब आयात करता है, लेकिन सबसे ज्यादा सेब तुर्की से ही पहुंचता है. DGCIS के आंकड़ों के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा करीब 23 फीसदी सेब तुर्की से आयात होता है. इसके बाद ईरान (21%), अफगानिस्तान (10%), इटली (8%), पोलैंड (7%) और अन्य देशों से (31%) का नंबर आता है. वहीं, भारत की विभिन्न मंडियों में चिली, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, पोलैंड, ब्राजील, बेल्जियम, सर्बिया, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन, नीदरलैंड, अर्जेंटीना, भूटान, क्रोएशिया, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, स्लोवेनिया, ग्रीस और थाईलैंड आदि देशों से सेब पहुंचता है.

