26 मदरसों को मुख्यमंत्री धामी ने बांटे मान्यता प्रमाण-पत्र, मंच से दिया बड़ा संदेश
सीएम धामी ने संबोधन में कहा परंपराएं अपनी जगह, लेकिन ज्ञान-विज्ञान, साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और AI को अपनाना होगा.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : September 2, 2026 at 5:43 PM IST
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा आयोजित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में शिरकत की. इस दौरान सीएम धामी ने प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसों) को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए. सीएम धामी ने कहा 26 शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रदान किया जाना अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत है. उन्होंने कहा राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं. यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.
मुख्यमंत्री ने कहा अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में प्राधिकरण बनाए जाने के पीछे मूल उद्देश्य यही है कि सभी बच्चे आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ें और उन्हें अपने व्यक्तित्व तथा भविष्य के निर्माण के लिए पर्याप्त अवसर प्राप्त हों. उन्होंने कहा परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन वर्तमान समय ज्ञान-विज्ञान, साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समय है. पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है. प्रत्येक देश विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है. ऐसे में बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे बदलती दुनिया की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें.
LIVE: देहरादून में आयोजित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रमhttps://t.co/bSO3cT7xQ5
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 2, 2026
उन्होंने कहा बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे उनका व्यक्तित्व विकसित हो, उनकी प्रतिभा सामने आए और वे अपने भविष्य का निर्माण कर सकें. उन्होंने कहा शिक्षा के माध्यम से कोई बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक या वैज्ञानिक बन सकता है. कृषि के क्षेत्र में जाने वाले बच्चे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं. आज प्रत्येक क्षेत्र में शोध और नवाचार हो रहा है, इसलिए बच्चों को नई तकनीकों और शोध को समझने, सीखने तथा उसे व्यवहार में उतारने की क्षमता विकसित करनी होगी. उन्होंने कहा कि आज केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा देना आवश्यक है.
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की नीतियों और निर्णयों का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को टारगेट करना नहीं है. उन्होंने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि UCC किसी वर्ग को निशाना बनाने के लिए लागू नहीं किया गया है. इसी प्रकार अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण भी किसी वर्ग को टारगेट करने के लिए नहीं बनाया गया है. सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना और प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर देना है. उन्होंने कहा उत्तराखंड में सभी वर्गों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और मधुर संबंध हैं. किसी व्यक्ति के साथ केवल उसकी पहचान या वर्ग के आधार पर भेदभाव करने की नीति नहीं है. सरकार व्यक्ति के कार्य और उसके योगदान को महत्व देती है.
मुख्यमंत्री ने कहा आज अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक नई व्यवस्था की शुरुआत हुई है. इसे मजबूत करने की जिम्मेदारी सरकार तथा शिक्षण संस्थानों दोनों की है. उन्होंने कहा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आपसी सहयोग और विश्वास आवश्यक है. सरकार अपनी ओर से सहयोग करेगी और शिक्षण संस्थानों को भी सकारात्मक भूमिका निभाते हुए इस व्यवस्था को मजबूत करना होगा. मुख्यमंत्री ने शिक्षा को बच्चों के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
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