मसूरी अस्पताल में मासूम की मौत मामला, डॉक्टरों की नहीं थी लापरवाही, जांच समिति की रिपोर्ट में आरोप बेबुनियाद
मसूरी में इलाज के दौरान बच्चे की मौत के बाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने आगे आकर प्रतिक्रिया दी है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 3, 2026 at 10:37 AM IST
मसूरी: मसूरी उप जिला चिकित्सालय में एक वर्षीय मासूम की मौत के बाद डॉक्टरों पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों को अस्पताल प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है. मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. खजान सिंह चौहान ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गठित चार सदस्यीय समिति और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि अस्पताल की छवि धूमिल करने वाली एकपक्षीय और भ्रामक सूचनाओं से न केवल स्वास्थ्य संस्थान की साख प्रभावित होती है, बल्कि डॉक्टरों का मनोबल भी टूटता है.
29 जून की सुबह अस्पताल पहुंचे थे परिजन: डॉ. खजान सिंह चौहान ने बताया कि 29 जून की सुबह करीब पांच बजे एक दंपति अपने लगभग एक वर्षीय बच्चे को लेकर अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा था. अगले दिन मीडिया में यह आरोप लगाया गया कि अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ मौजूद नहीं थे, समय पर उपचार नहीं मिला और इसी कारण बच्चे की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई. समिति ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की.
सीसीटीवी में समय पर इलाज की पुष्टि: सीएमएस ने बताया कि जांच में स्पष्ट हुआ कि जिस समय दंपती अस्पताल पहुंचा, उस समय ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक एक अन्य महिला मरीज का उपचार कर रहे थे. दो से तीन मिनट के भीतर डॉ. प्रशांत नैथानी ने बच्चे की भी जांच की. इसलिए यह आरोप कि अस्पताल में कोई डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं था, सही नहीं पाया गया. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि बच्चे का उपचार पहले से एक निजी चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था और उसे कई दवाइयां, जिनमें स्टेरॉयड भी शामिल था, दी जा रही थी. अस्पताल के चिकित्सक ने स्थिति का आकलन कर कुछ दवाइयों को बंद करने और आवश्यक दवाएं देने के साथ परिजनों को सुबह आठ बजे तक रुकने की सलाह दी थी, ताकि बाल रोग विशेषज्ञ के आने पर बच्चे की विस्तृत जांच कराई जा सके.
परिजन सलाह माने बिना अस्पताल से चले गए: उन्होंने आगे कहा कि चिकित्सकों की सलाह के बावजूद परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल से चले गए। बाद में जानकारी मिली कि वे बच्चे को लेकर लैंडौर सामुदायिक अस्पताल गए थे. वहां क्या उपचार हुआ और किन परिस्थितियों में बच्चे की मृत्यु हुई, इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उप जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने नहीं आई है. घटना के समय ड्यूटी पर तैनात डॉ. प्रशांत नैथानी ने भी पत्रकार वार्ता में कहा कि उन्होंने बच्चे की जांच निर्धारित समय के भीतर की थी.
बच्चे की दवाइयों का परीक्षण करने पर पाया गया कि उसे उसकी उम्र के अनुसार अत्यधिक दवाइयां और स्टेरॉयड दिया जा रहा था. चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप आवश्यक दवाओं में बदलाव किया गया और परिजनों को बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए सुबह तक रुकने की सलाह दी गई. उन्होंने कहा कि उपचार की पूरी प्रक्रिया अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड है और किसी प्रकार की लापरवाही का प्रश्न ही नहीं उठता.
अस्पताल को राजनीतिक अखाड़ा न बनाया जाए: सीएमएस डॉ. चौहान ने कहा कि कुछ लोग बिना तथ्यों की पुष्टि किए अस्पताल को राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने मीडिया और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले दोनों पक्षों को अवश्य सुना जाए. एकपक्षीय खबरों से आम जनता का सरकारी अस्पतालों पर विश्वास प्रभावित होता है और डॉक्टरों का मनोबल गिरता है.
लगातार बेहतर हो रही हैं स्वास्थ्य सुविधाएं: उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के प्रयासों से मसूरी अस्पताल को हाल ही में उप जिला चिकित्सालय का दर्जा मिला है. अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ओएनजीसी, विधायक निधि और अन्य माध्यमों से आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. अस्पताल में सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड समेत कई जांच सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है, जिससे मसूरी और आसपास के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं.
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