छिंदवाड़ा में 44 लाख का गेहूं घोटाला, कागजों में खरीदी दर्ज, गोदामों से अनाज गायब
छिंदवाड़ा में खरीद केंद्रों से गोदामों तक गेहूं के परिवहन में खेल. रास्ते में ही गायब कर दिया 1800 क्विंटल गेहूं.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 20, 2026 at 1:09 PM IST
छिंदवाड़ा : समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करीब 1800 क्विंटल गेहूं गोदामों तक नहीं पहुंचा. ये गेहूं रास्ते में पार कर दिया गया या फिर फर्जी तरीके से खरीददारी हुई, मामले की जांच में टीम जुटी है. कागजों में ये गेहूं दर्ज है लेकिन गोदामों में नहीं मिला. करीब 44 लाख रुपये का घोटाला हुआ है.
जिम्मेदारों से वसूली के लिए नोटिस जारी
गेहूं उपार्जन के दौरान समितियों द्वारा की गई खरीदी और परिवहन के दौरान 39 समितियों से 1 हजार 836 क्विंटल शॉर्ट मिलने का खुलासा हुआ है. इसकी कीमत 44 लाख 52 हजार रुपए आंकी गई है. नागरिक आपूर्ति निगम ने संबंधित समितियों व परिवहनकर्ता को नोटिस जारी कर वसूली की प्रक्रिया शुरू की है. साल 2025-26 में गेहूं उपार्जन के लिए जिले में 84 खरीदी केंद्र बनाए गए थे. सरकार ने 2425 रुपए गेहूं का समर्थन मूल्य निर्धारित किया था. 29 हजार 585 किसानों ने पंजीयन कराया था. इनमें से 16 हजार 306 किसानों ने 13 लाख 25 हजार 173 क्विंटल गेहूं उपार्जन केंद्रों में बेचा था.

इन समितियों पर कम मिला गेहूं
जिन खरीदी केंद्रों पर गेहूं कम पाया गया, उनमें चांद, कुंडालीकला, समसवाड़ा, कारीडोंगरी, छुई, कपुर्दा, गोपालपुर, अमरवाड़ा, मेघदौन, घोघरी, गांगीवाड़ा, परसगांव, चावलपानी, लिखड़ी-खटकर, पंचगांव, रामगढ़, छिंदीकामथ, मानकादेही खुर्द, पलटवाड़ा, पाधरी, सेजा, कुंडा, बसुरियाकला, देलाखारी, देवरी, पगारा, झुर्रे, बटकाखापा, मोरडोंगरी, खमारपानी, चौरई, कपरवाड़ी, सारोठ, साजपानी, जुन्नारदेव, तामिया, मारई, घानाउमरी, गोरेघाट समिति हैं.
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नागरिक आपूर्ति और सहकारिता विभाग आमने-सामने
सहकारिता विभाग गेहूं खरीदी करने के बाद नागरिक आपूर्ति निगम को सौंपता है. जितने गेहूं की खरीदी हुई उतना नागरिक आपूर्ति विभाग के पास नहीं पहुंचा. नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक मुकुल त्रिपाठी ने बताया "खरीदी के दौरान समिति स्तर पर व परिवहन के दौरान शॉर्टेज आई है. संबंधित समितियों व परिवहनकर्ताओं से इसकी वसूली होगी. समितियों का कमीशन व परिवहनकर्ता के बिल से इस राशि को समायोजित किया जाएगा."
सहकारी समिति के कुछ प्रबंधकों ने अजीब तर्क देते हुए कहा कि खरीदे गए अनाज को शिफ्ट करने के दौरान बोरियां फटने से अनाज बिखर जाता है. खुले में अनाज रखने से सूखता भी, जिससे अनाज का वजन कम हो जाता है.

