मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 24 गांव रेड जोन में, पाताल में जा रहा पानी, दिसंबर से ही जल संकट
छिंदवाड़ा में गर्मी आते ही पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसते हैं ग्रामीण, 1611 गांवों का किया गया सर्वे, 635 गांवों में पानी की किल्लत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 16, 2026 at 10:12 PM IST
छिंदवाड़ा: चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी के बीच छिंदवाड़ा के कई गांवों में पीने के पानी का किल्लत शुरू हो गई है. इस दौरान पानी की तलाश में लोगों को कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है. खासतौर पर ग्रामीण आदिवासी इलाके और पातालकोट क्षेत्र में हर साल ऐसे हालात बनते हैं. इसे लेकर छिंदवाड़ा सांसद बंटी विवेक साहू ने लोकसभा में भी सवाल उठाया था.
15 दिन में 1 दिन आता है पानी
मोहखेड विकासखंड के हथलेवा गांव के बुजुर्ग सुरेश पवार ने बताया, " जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, जमीन में पानी की कमी है. इस गांव को बड़ी मुश्किल से सारोठ डैम से जोड़ा गया है, जहां से जल जीवन मिशन के तहत नल लगाए गए हैं, जिनमें 15 दिनों में एक बार पानी आता है. भीषण गर्मी होती है, तो वह पानी भी आना पानी बंद हो जाता है. हालत ऐसे हैं कि गांव की महिलाएं कई किलोमीटर का सफर तय कर मुश्किल से पानी लाती हैं. दूसरे किसानों के खेत में पानी के कुछ साधन है, जिनसे मिन्नते करने के बाद मुश्किल से पीने के पानी का जुगाड़ हो पता है."
पातालकोट में पानी की किल्लत
गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत सबसे ज्यादा पातालकोट में देखी जाती है. यहां पर पीने के लिए लोगों को पहाड़ों से रिसने वाला पानी मुश्किल से मिल पाता है. आदिवासी महिलाएं दिनभर पतीले भर पानी के लिए तरसती हैं.

पानी की समस्या वाले गांवों का तैयार किया गया डाटा
छिंदवाड़ा के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने एक डाटा तैयार किया है, जहां पर पानी की समस्या और निराकरण के लिए एक सूची बनाई गई है. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सुपरवाइजिंग इंजीनियर रवि शंकर वर्मा ने बताया, " दिसंबर में ही जिले में पानी की समस्या से होने वाले गांव में तैयारी को लेकर डाटा तैयार किया गया है और व्यवस्था कर ली गई है." इसमें परासिया और छिंदवाड़ा इन 2 डिवीजन में मिलाकर कुल 1611 गांव का सर्वे किया है.

| परासिया और छिंदवाड़ा के गांवों का सर्वे | गांवों की संख्या |
| कुल गांवों का सर्वे | 1611 |
| ग्रीन जोन (पानी की किल्लत नहीं होती) | 976 |
| यलो जोन (अप्रैल में शुरू हो जाती है पानी की किल्लत) | 611 |
| रेड जोन (दिसंबर से ही शुरू हो जाती है पानी की किल्लत) | 24 |
पीने का पानी उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आर एस वर्मा ने बताया, " इन गांवों के लिए स्पेशल प्लान तैयार किया गया है. कई जगह पर ट्यूबवेल कराया जा रहे हैं. अगर ट्यूबवेल में पानी नहीं निकलता है, तो जरूरत पड़ने पर निजी संसाधनों को भी पीने के पानी के लिए विभाग अधिग्रहण करता है. यदि गांव के आसपास पानी का सोर्स नहीं है, तो दूर जाकर भी पानी की व्यवस्था की जा रही है. इसके साथ ही जिन हैंडपंप में पानी कम हो रहा है, उनमें पाइपलाइन डाली जा रही है और जरूरत पड़ने पर मोनोब्लॉक पंप भी लगाए जा रहे हैं. पहली प्राथमिकता है कि में पीने के लिए पानी मिले."

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सांसद ने लोकसभा में उठाया सवाल
छिंदवाड़ा लोकसभा के सांसद बंटी विवेक शाह ने लोकसभा में जल शक्ति मंत्री से सवाल पूछा, जिसमें उन्होंने कहा, "मध्य प्रदेश में, खासकर छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के कई इलाकों और ब्लॉक में ग्राउंडवॉटर लेवल में भारी गिरावट आई है. इसकी डिटेल्स क्या हैं, साथ ही इस गिरावट का ट्रेंड और इसके मुख्य कारण क्या हैं? छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के पातालकोट इलाके सहित पांढुर्ना के कई गांव में पानी की दिक्कत देखी जाती है. अगर वाटर लेवल नीचे है तो उसके लिए क्या प्रयास किया जा रहे हैं?"

