'एससी-एसटी और सवर्ण के बीच में युद्ध कराना चाहती है सरकार', शंकराचार्य बोले-रद्द हो UGC कानून
छिंदवाड़ा पहुंचे शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने यूजीसी कानून को लेकर कहा कि जब पहले से ही एससी-एसटी कानून है तब इसे रद्द करना चाहिए.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 20, 2026 at 9:12 PM IST
छिंदवाड़ा: शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार को यूजीसी कानून वापस नहीं रद्द करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार सवर्ण और निचली जाति के लोगों को लड़ाने का प्रयास कर रही है क्योंकि जब पहले से ही अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी जातियों के लिए कानून है तो इस तरीके का कानून लाना न्याय संगत नहीं है. इसमें संशोधन नहीं बल्कि इसे रद्द करने की जरूरत है.
'सवर्ण और एससी-एसटी को लड़ाने की है तैयारी'
छिंदवाड़ा पहुंचे शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भारत सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी कानून को गलत बताते हुए साफ कहा है कि "जब पहले से ही एससी-एसटी के लिए कानून बना है और उसमें सजा का प्रावधान है, तो फिर ऐसे कानून को लाकर सरकार सवर्ण और एससी एसटी के बीच में युद्ध कराना चाहती है. इस कानून में संशोधन की कोई गुंजाइश नहीं है बल्कि इसे तो हर हाल में रद्द ही करना चाहिए."
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में आए सदानंद सरस्वती
प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ चल रहे विवाद को लेकर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने उनका समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि "जिस सरकार ने संत को गंगा स्नान नहीं करने दिया यह गलत है. जब आप किसी संत को गंगा स्नान नहीं करने देंगे तो टकराव तो होगा और यह कारण आप सभी को पता है."
'धर्म से नियंत्रित होना चाहिए राजनीति '
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि "राजनीति धर्म से नियंत्रित होती है. राजनीति धर्म से नियंत्रित होना चाहिए जब राजनीति अनियंत्रित हो जाती है तब ऐसी घटनाएं होती हैं. इसलिए जो नीति पूर्वक राज्य का संचालन करता है उसे राजनीति कहते हैं."
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'नेता में नैतिकता होगी तभी सही सरकार चल सकती है'
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने बिना किसी नेता का नाम लेते हुए कहा कि "सच्चा राजनेता वही है जो नीति पूर्वक राज्य का संचालन करे. जब किसी नेता की नीयत सही हो तो वह सही राजनीति कर सकता है. नेता में नैतिकता होना चाहिए तब वह सही राजनीति कर सकता है और तभी सरकारें भी सही से चल सकती हैं."

