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गर्भवती ने बारिश में कपड़े के झूले में तय किया 8 KM, चेहरा देखने से पहले ही मां ने खोया बच्चा

छिंदवाड़ा में प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को कपड़े का झूला बनाकर गांव वालों ने पहुंचाया अस्पताल, पेट में पल रहे बच्चे की मौत, मां लड़ रही जिंदगी की जंग. महेंद्र राय की रिपोर्ट

CHHINDWARA PREGNANT WOMEN BABY DIED
छिंदवाड़ा में प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को कपड़े के झूले में पहुंचाया अस्पताल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 21, 2026 at 4:33 PM IST

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Updated : August 21, 2026 at 5:26 PM IST

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छिंदवाड़ा: आदिवासियों के विकास और उत्थान का दावा करने वाले प्रशासन के लिए छिंदवाड़ा के गोपतराई के चीटीपाठा गांव की एक दर्दनाक तस्वीर, हकीकत बताने के लिए काफी है. पहले तो वह प्रसव पीड़ा से कराहती रही मुश्किल से लोगों ने बारिश के बीच कपड़े का झूला बनाकर 8 किलोमीटर पैदल सफर तय कर दमुआ अस्पताल पहुंचाया. वहां से महिला को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया. लेकिन इसी बीच पेट में पल रहे अपने बच्चे का चेहरा देखने से पहले ही मां ने उसे खो दिया.

न गांव तक पक्की सड़क, न एंबुलेंस पहुंचने की व्यवस्था

जुन्नारदेव विकासखंड के गोपतराई का चीटीपाठा जामुनटोला एक आदिवासियों का गांव है. सबसे नजदीक बड़ा कस्बा दमुआ है. गोपतराई से गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र कच्ची सड़क का सहारा होता है. बारिश के दिनों में यहां पर पैदल चलना भी मुश्किल है, तो एंबुलेंस पहुंचना तो दूर की बात है. सोनू मलगाम ने बताया कि "बुधवार रात को उनकी पत्नी कस्तूरिया को प्रसव पीड़ा हुई थी, गांव में सड़क नहीं थी तो रिश्तेदार और गांव वालों ने मिलकर कपड़े की एक डोली बनाई और अपनी पत्नी को सुबह 6:00 बजे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे. तब तक उसकी कोख में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी थी."

छिंदवाड़ा में गर्भवती ने बारिश में कपड़े के झूले में तय किया 8 KM (ETV Bharat)

खुद भी जिंदगी की लड़ रही जंग, जिला अस्पताल में भर्ती

पेट में ही बच्चे की मौत होने के बाद गंभीर हालत में महिला को जिला अस्पताल छिंदवाड़ा रेफर किया गया. फिलहाल महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है और जिला अस्पताल के ICU में भर्ती है. 8 किलोमीटर के उबड़ खाबड़ रास्ते के सफर में महिला से उसका बच्चा छिन गया और खुद की भी जान पर बन आई है. लगातार इलाके में बारिश हो रही थी, गांव वालों ने सरपंच की मदद से रिमझिम बारिश के बीच मुख्य सड़क तक पहुंचाया.

मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर और सभी नेताओं के सामने लगा चुके हैं अर्जी

गांव की सरपंच सियाबती नर्रे ने बताया कि "महिला को किसी तरीके से गांव से गोपतराई तक जो 8 किलोमीटर का सफर होता है वहां डोली बनाकर भेजा गया था. वहां पर एंबुलेंस खड़ी थी एंबुलेंस से फिर दमुआ भेजा गया. यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले दीनबत्ती नर्रे और रेखा मलगाम को भी प्रसव पीड़ा के दौरान इसी तरह डोली में डालकर दमुआ लाना पड़ा थ. समय पर इलाज और सड़क न होने के कारण इस गांव की कविता मलगाम गोरा बरकड़े और मनबती नर्रे पहले ही अपनी जान गवां चुकी हैं."

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साल 2016 में ग्राम सभा के माध्यम से लगातार मुख्यमंत्री कलेक्टर और विधायक को कई बार सड़क बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए लेकिन न तो सत्ता के लोगों ने उन गांव वालों की सुनी और न ही किसी अधिकारी ने आज तक इस पर ध्यान दिया.

जिला अस्पताल पहुंचने से पहले नवजात की हो गई थी मौत

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल की सिविल सर्जन कंचन दुबे ने बताया कि "दमुआ से रेफर होकर एक गर्भवती महिला को छिंदवाड़ा में एंबुलेंस के जरिए लाया गया था डॉक्टर ने जब जांच की तो पता चला कि बच्चा पेट में ही मृत हो गया था. महिला को फिलहाल जिला अस्पताल में इलाज के लिए डॉक्टरों की देखरेख में भर्ती कराया गया है. जैसे ही एंबुलेंस को संबंधित अस्पताल और मौके पर पहुंचने की सूचना मिलती है उसे रवाना कर दिया जाता है. इस मामले में गांव तक एंबुलेंस पहुंचने में दिक्कत हो रही थी इसलिए सड़क पर ही खड़ा रखा गया था उसके बाद एंबुलेंस से लाया गया."

Last Updated : August 21, 2026 at 5:26 PM IST