मोहन यादव से सवाल पूछतीं आदिवासी महिलाएं, क्या हम नहीं हैं लाड़ली बहना, पोषण आहार का इंतजार
मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहनों को शगुन के साथ पैसे डाल खुश कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ आदिवासी महिलाओं को नहीं मिल रही पोषण आहार की राशि. महेंद्र राय की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 8:36 PM IST
|Updated : August 20, 2026 at 8:58 PM IST
छिंदवाड़ा: पातालकोट में रहने वाली समिता भारती सहित प्रदेश की भारिया, बैगा और सहरिया जनजाति की 2 लाख से ज्यादा महिलाओं को अच्छे खान-पान के लिए पोषण आहार के नाम से सरकार हर महीने ₹1500 देती है. कुछ दिनों तक ही ये पैसे महिलाओं को मिले, लेकिन उसके बाद महिलाएं पोषण आहार के पैसों का इंतजार कर रही हैं. पातालकोट की महिलाओं को करीब 6 महीने से पोषण आहार के लिए दिए जाने वाले पैसे नहीं मिले हैं. पातालकोट से देखिए महेंद्र राय की खास रिपोर्ट.
लाड़लियों को हर महीने पैसे, पिछड़ियों को पोषण का इंतजार
मध्य प्रदेश सरकार ने पिछड़ी जनजाति भारिया, बैगा और सहरिया की करीब 2 लाख 18 हजार महिलाओं को पोषण आहार योजना के तहत ₹1000 हर महीने देने की स्कीम शुरू की थी. बाद में इस स्कीम में ₹1500 प्रति महीने कर दिया गया. छिंदवाड़ा जिले में भारिया जनजाति की सबसे ज्यादा महिलाएं पातालकोट में रहती हैं. पलानी गैलडुब्बा की महिला समिता भारिया का कहना है कि "उसका नाम पोषण आहार योजना के तहत शामिल किया गया है, लेकिन पिछले 6 महीने से उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है और ना ही उन्हें लाड़ली बहना स्कीम में शामिल किया गया है.."
दूसरी महिला सुनीता भारती बताती हैं कि "उनका नाम भी पोषण आहार योजना की लिस्ट में शामिल किया गया है. पहले कुछ महीने तक उन्हें ₹1000 हर महीने मिलता था. कुछ महीनो से उन्हें वह मिलना बंद हो गया है. उन्होंने बैंक में जाकर पता भी नहीं किया है, क्योंकि उनके पति को करंट लगा है, जिसकी वजह से वे घर में ही रहकर उनकी सेवा करती हैं. अपने पति के इलाज के लिए भी साहूकारों से उधार लेकर काम चला रही हैं."
7464 महिलाएं नहीं हैं लाड़ली, बजट का हो रहा इंतज़ार
छिंदवाड़ा जिले में 7464 भारिया और दूसरी जनजाति की महिलाएं हैं, जो पोषण आहार योजना की हितग्राही हैं. योजना का क्रियान्वयन जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा किया जाता है. जनजातीय कार्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पता चला है कि पिछले दो महीने से बजट की कमी के कारण आहार अनुदान योजना के हितग्राहियों को पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाया है. यही हालत पूरे मध्य प्रदेश के हैं. पूरे मध्य प्रदेश में 2 लाख 18 हजार से ज्यादा महिलाएं आहार अनुदान योजना की हितग्राही हैं.

परिवार की मुखिया को मिलता है आहार अनुदान योजना
ग्राम पंचायत कारेआम रातेड़ के सरपंच रमेश भारती ने बताया कि "भारिया जनजाति की महिलाओं को आहार अनुदान योजना के तहत जो लाभ मिलता है. उसमें परिवार की महिला मुखिया को ही इसका लाभ मिलता है. पहले ₹1000 राशि मिलती थी. इस सरकार ने बढ़ाकर ₹1500 कर दिया है. यह अनुदान राशि सीधे हितग्राही के खाते में आती है. कई बार यह राशि इकट्ठा भी मिल जाती है और कई बार कई दिनों तक नहीं आती, लेकिन यही उसके उलट लाड़ली बहना योजना में हर महीने महिलाओं के खाते में परिवार में 18 साल से 60 साल तक की जितनी भी महिला हैं, उनके खाते में लगातार पैसे आ रहे हैं.
इस महीने तो 250 रुपए अलग से सरकार ने रक्षाबंधन का गिफ्ट भी दिया है, जबकि आहार अनुदान योजना की महिलाओं को 60 साल के बाद ही ₹1500 देने का प्रावधान है."
महिलाओं के साथ सरकार कर रही है धोखा
छिंदवाड़ा नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनू मागो का कहना है कि "मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए शुरू की गई है. जबकि भारिया जनजाति की महिलाओं को पोषण आहार योजना का लाभ कुपोषण से दूर करने के लिए बेहतर खान-पान के लिए दिया जाता है. दोनों योजनाएं अलग-अलग है और दोनों का संचालन भी अलग-अलग विभाग के द्वारा किया जाता है.

आहार अनुदान योजना जनजातीय कार्य विभाग के पास है, तो वहीं लाड़ली बहना योजना महिला बाल विकास के द्वारा क्रियान्वित की जा रही है. जब योजना अलग है तो फिर इन दोनों योजनाओं का लाभ महिलाओं को मिलना चाहिए. मध्य प्रदेश सरकार पिछड़ी जनजाति की महिलाओं के साथ धोखा कर रही है."
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क्यों शुरू की गई थी आहार अनुदान योजना
मध्य प्रदेश सरकार ने 2017 में शुरू की गई आहार अनुदान योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की विशेष पिछड़ी जनजातियों जिसमें बैगा, भारिया और सहरिया में कुपोषण को दूर करना है. इस योजना के तहत पात्र परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में हर महीने ₹1500 की आर्थिक सहायता भेजी जाती है. जनजातीय परिवारों में पोषण स्तर में सुधार करना और भुखमरी या कुपोषण को खत्म करना है, इसके लिए महिला मध्य प्रदेश की स्थाई निवासी होनी चाहिए और परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए.

