देश का सबसे बड़ा बीजों का गोला, मध्य प्रदेश के पर्यवरण प्रेमी ने बना दिया रिकॉर्ड
पांढुर्णा में बनकर तैयार हुआ देश का सबसे बड़ा सीड बॉल, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम हुआ दर्ज, जानें किस काम आता है ये अनोखा गोला. महेंद्र राय की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 20, 2026 at 8:35 AM IST
छिन्दवाड़ा/पांढुर्णा : मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में देश का सबसे बड़ा बीजों का गोला बनकर तैयार हो गया है. वॉटर हीरो के नाम से अपनी पहचान बना चुके नीरज वानखड़े ने एक बार फिर कुछ अलग कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने 108 सीताफल के बीजों को एक ही सीड्स बॉल में भरकर देश का सबसे बड़ा सीड्स बॉल तैयार किया, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त हुआ है.

पांढुर्णा में बना देश का सबसे बड़ा सीड बॉल
नीरज वानखड़े ने बताया, '' सीड्स बॉल केवल एक मिट्टी का गोला नहीं, बल्कि भविष्य के हरित भारत का बीज है. लोगों में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वे वर्षों से हजारों सीड्स बॉल तैयार कर जंगलों, पहाड़ियों और बंजर भूमि पर फेंकते आ रहे हैं,जिससे प्रकृति स्वयं नए वृक्षों का निर्माण कर सके. हमने अपनी संस्था व सहयोगियों के साथ मिलकर 50 हजार सीताफल के बीजों व 5 हजार बिहाड़ा और रीठा के बीजों के सीड्स बॉल तैयार किए हैं. इस प्रकार कुल 55 हजार सीड्स बॉल बनाने का लक्ष्य पूरा कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया रिकॉर्ड बनाया है. इस बार हमने एक बड़ा सीड बॉल भी बनाया है, जिसमें 108 सीताफल के बीजों को एक साथ भरा है. इसका वजन करीब 13 किलो है और इसकी गोलाई और लंबाई 30 इंच है. इसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने भारत का सबसे बड़ा सीड बॉल माना है.
पशु पक्षियों के लिए खाना, ग्रामीणों के लिए रोजगार का जुगाड़
नीरज वानखड़े ने बताया कि 50 हजार सीताफल के सीड्स बॉल तैयार करने के पीछे केवल वृक्षारोपण का उद्देश्य नहीं है, बल्कि जंगलों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाना भी है. भविष्य में जब ये सीताफल के वृक्ष फल देंगे, तो स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा. साथ ही जंगलों में रहने वाले पक्षियों, बंदरों, गिलहरियों व अन्य वन्य जीवों को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होगा, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और वन क्षेत्र अधिक समृद्ध बनेंगे.''

जल शक्ति मंत्रालय से मिल चुका है वाटर हीरो का सम्मान
नीरज वृक्षारोपण के साथ-साथ जल संरक्षण के क्षेत्र में भी कई वर्षों से सक्रिय हैं. उनके कामों को देखते हुए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें "वॉटर हीरो" सम्मान से नवाजा था. इसके अतिरिक्त उन्हें जल प्रहरी अवार्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं सामाजिक सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में वेस्ट वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, बोर रिचार्ज, मैजिक पिट निर्माण और जल संरक्षण की अन्य तकनीकों को बढ़ावा देकर हजारों लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया है.

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मध्य प्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर भी वे जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दे रहे हैं कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी उन्होंने समाज सेवा का परिचय देते हुए 65 हजार मास्क बनाकर निःशुल्क वितरण किया था. इतना ही नहीं, उन्होंने देश का सबसे लंबा फेस मास्क तैयार कर अपना नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराया था.

