ना पुलिस की जरूरत ना कोर्ट कचहरी की झंझट, मेहरा समाज खुद करेगा कई मामलों पर फैसला
समाज के लोगों को ना लगाना पड़ें कोर्ट कचहरी के चक्कर इसलिए किया फैसला, बनाया अपना परिवार परामर्श संगठन, महेंद्र राय की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 31, 2026 at 4:58 PM IST
छिन्दवाड़ा : घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना से लेकर पति पत्नी के बीच मनमुटाव तक के मामलों में अब डेहरिया मेहरा समाज के लोग थाने के चक्कर नहीं काटेंगे. समाज ने दावा किया है कि वे अब कोर्ट कचहरी के चक्करों से बचने के लिए समाज के अंदर ही निपटारा करेंगे, जिससे समाज का बिखराव न हो और फालतू खर्चे भी बचाए जा सकें.
समाज के लोगों को ना लगाना पड़ें कोर्ट कचहरी के चक्कर
मेहरा डेहरिया समाज के जिला से सचिव दिनेश डेहरिया ने बताया, '' परिवार परामर्श संगठन के माध्यम से घरेलू हिंसा, आपसी वाद-विवाद, पति-पत्नी के मनमुटाव और परिवार टूटने जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर रोक लगाने का बीड़ा उठाया है. समाज का यह स्पष्ट उद्देश्य है कि हमारे किसी भी स्वजन को थानों, पुलिस चौकियों और कोर्ट-कचहरी के चक्कर न काटने पड़ें. परिवार के मामलों का निपटारा अब समाज के वरिष्ठ और समझदार लोगों की मौजूदगी में आपसी सुलह और प्रेम के साथ सामाजिक स्तर पर ही कर लिया जाएगा. इसके लिए परिवार परामर्श संगठन का गठन किया गया है.''
जिले में समाज की करीब सवा लाख आबादी
सामाजिक भवन कुसमेली में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में समाज हित में अनेक निर्णय लिए गए. इस मौके पर सामाजिक भवन का आगामी प्रभार जिला अध्यक्ष गोपाल डेहरिया को आधिकारिक तौर पर सौंपा गया. वहीं भवन निर्माण कार्य को गति देने के लिए प्रथम तल के निर्माण को लेकर रूपरेखा तैयार की गई, जिसपर उपस्थित सभी ने अपनी सहमति दी. जिले में डेहरिया मेहरा समाज की बड़ी आबादी है. करीब सवा लाख की संख्या बताई जाती है. सबसे ज्यादा परासिया विधानसभा, इसके बाद अमरवाड़ा, जुन्नारदेव और छिंदवाड़ा में डेहरिया समाज के लोग निवास करते हैं.
संगठन में होंगे 10 सदस्य
समाज के जिला सचिव दिनेश डेहरिया ने बताया, '' परिवार परामर्श संगठन में 10 सदस्य शामिल होंगे. इनमें 5 महिलाएं और 5 पुरुष सदस्य शामिल किए जाएंगे. सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है. मामलों का हल करने का प्रयास किया जाएगा, जिसमें कानून के जानकार से लेकर समाज के वरिष्ठ जन शामिल होंगे. फिजूल खर्च और सामाजिक बदनामी से होगा बचाव.''
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उन्होंने आगे कहा, '' इस संगठन को बनाने की मंशा ये है कि कोर्ट कचहरी और पुलिस में जब मामले जाते हैं तो कई सालों तक पैसों की बर्बादी होती है. इसके साथ ही सामाजिक बदनामी भी होती है और अंत में परिवार टूटने की नौबत आ जाती है. इससे ज्यादातर रिश्तों को बचाने का प्रयास किया जाएगा और सामाजिक बदनामी से भी बचा जा सकेगा.''

