संतोष की जिंदादिली, थ्रेसर में गंवाए दोनों हाथ, नहीं मानी हार, 10 साल से बना रहा चाय
छिंदवाड़ा के संतोष हौसले और जिंदादिली की मिसाल हैं, दोनों हाथ खोने के बाद भी नहीं मानी हार, बिना लकीरों के भी बदली अपनी तकदीर.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 10:38 AM IST
|Updated : January 8, 2026 at 11:32 AM IST
छिंदवाड़ा: किस्मत सिर्फ हाथों की लकीर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उनकी भी अपनी तकदीर होती है जिनके हाथ नहीं होते. कुछ ऐसी ही कहानी है हर्रई के संतोष कहार की. 20 साल पहले एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो चुके संतोष कहार उन लोगों के लिए हौसलों की मिसाल हैं, जो जरा सी परेशानियां आने पर भी अपनी किस्मत को कोसते हुए हार मान लेते हैं.
20 साल पहले गवां चुका दोनों हाथ नहीं मानी हार
मजदूरी करने वाला संतोष कहार करीब 20 साल पहले फसल के थ्रेसर में काम कर रहा था. इसी दौरान दोनों हाथ उसकी चपेट में आ गए. एक्सीडेंट इतना भयंकर था कि संतोष को अपने दोनों हाथ के पंजे कटवाना पड़े. पहले तो संतोष को लगा कि अब वह कुछ नहीं कर पाएगा, उसकी जिंदगी बेकार है. लेकिन अपने हौसलों के आगे उसने कमजोरी को आड़े नहीं आने दिया. कई जगह काम करता रहा.
उसके बाद उसे एक निजी होटल में काम मिला और करीब 10 सालों से वहां पर चाय बना रहा है. होटल के मालिक विजय पटवा बताते हैं कि, ''संतोष उनकी दुकान में करीब 10 सालों से काम करते हैं. उन्हें कभी एहसास ही नहीं हुआ कि उसके हाथ नहीं हैं. काम इतनी साफ सफाई और तेजी से करता है हाथ वाले लोग पीछे रह जाएं.

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हर दिन सैकड़ों लोगों को पिलाते हैं चाय
संतोष कहार ने ईटीवी भारत को बताया कि, ''जब एक्सीडेंट हुआ था तो लगा था कि अब मैं किसी काम का नहीं हूं. लेकिन बाद में फिर मैंने बिना पंजों के सहारे ही काम शुरू कर दिया. कुछ दिन दिक्कत हुई और अब सब कुछ आसानी से हो जाता है. उन्हें कभी एहसास ही नहीं होता कि उनके दोनों पंजे नहीं हैं. वे गैस चालू करने से लेकर चाय पकाने और फिर उसे छान कर ग्राहकों को देने से लेकर वे सारे काम कर लेते हैं जो हर एक इंसान कर सकता है. हर दिन सैकड़ों लोगों को वे चाय बना कर पिलाते हैं.''

हौसले मजबूत हो तो हर राह हो जाती है आसान
संतोष कहार का कहना है कि, ''जिंदगी में ऐसे कई मौके आते हैं जब हम खुद से हार मान लेते हैं. उस समय अगर हम अपने हौसले मजबूत कर लें तो हर रास्ता आसान हो जाता है और जिंदगी आसान लगने लगती है.'' ऐसा ही वह उन लोगों के लिए भी कहते हैं जो जरा सी मुसीबत आने पर गलत कदम उठाकर अपने रास्ते बदल लेते हैं.'' उनका कहना है कि, ''हाथों में लकीर होना ही किस्मत की निशानी नहीं होती, बल्कि बिना हाथों वालों की भी तकदीर संवर सकती है.''

