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इश्क का रंग चढ़ते ही मेंढक बदल लेता है अपना रंग, प्रेमिका को इम्प्रेस करने का गजब तरीका

छिंदवाड़ा में प्रकृति का करिश्मा, दिखा रंग बलने वाला मेंढक, वनस्पति विशेषज्ञ ने बताया किसे देखकर रंग बदलता है मेंढक, क्यों बारिश में ही आते हैं नजर. महेंद्र राय की रिपोर्ट.

CHHINDWARA COLOR CHANGING FROG
इश्क का रंग चढ़ते ही मेंढक बदल लेता है अपना रंग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 1, 2026 at 4:26 PM IST

4 Min Read
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छिंदवाड़ा: मौके की नजाकत को देखते हुए सिर्फ गिरगिट रंग नहीं बदलता बल्कि एक जीव और है जो अपनी प्रेमिका को इम्प्रेस करने के लिए अपना रंग बदल लेता है. खास बात ये है कि ये जीव सिर्फ बरसात के शुरुआती सीजन में दिखाई देता है. आइए जानते है उसके बारे में जो प्रेमिका को इम्प्रेस करने के लिए अपना रंग बदल लेता है.

प्रेमिका को इम्प्रेस करने के लिए बदल लेता है अपना कलर

बरसात शुरू होते ही तालाब, छोटी नदियां, खेतों के आसपास मेंढकों के टर्र-टर्र की आवाज सुनाई देती है. इन उछलते कूदते मेंढकों में कुछ मेंढक अचानक चमकीले पीले रंग के दिखने लगते हैं, जो किसी अजूबा से कम नहीं लगता है, लेकिन इसके पीछे की कहानी भी दिलचस्प है. दरअसल, मेंढक अपनी प्रेमिका को इम्प्रेस करने के लिए कलर बदल लेता है.

वनस्पति शास्त्र विशेषज्ञ ने दी जानकारी (ETV Bharat)

चौरई के सरकारी कॉलेज के वनस्पति शास्त्र विशेषज्ञ डॉ विकास शर्मा ने बताया कि "कॉलेज की सीमा के भीतर बने एक बरसाती पोखर पर बड़े-बड़े आकार के चटक पीले रंग वाले मेंढकों को देखकर आश्चर्य हुआ, क्योंकि इससे पहले इन्हे यहां देखा नहीं था. चौरई में अब तक मेंढक की लगभग 6 से 8 जातियों को रिकॉर्ड कर चुका हूं, लेकिन इस चटक रंग के साथ पहली बार ही देखा है. पिछले साल इनके बारे में सोशल मीडिया से ही जानकारी मिली थी, तब लगा कि ये इतने सुन्दर मेंढक कहां देखने को मिलेंगे, किन्तु प्रकृति का करिश्मा देखिये यह मेरे कार्यक्षेत्र में ही दिखाई दे गए.

मेंढक प्रजनन के समय पर बदलते रंग

डॉ विकास शर्मा ने बताता कि "नर मेंढक केवल प्रजनन के समय ही रंग बदलते हैं. यह मादा को आकर्षित करने का इनका एक पेंतरा है. इन सुन्दर से दिखने वाले बड़े आकार के चटक पीले रंग के मेंढकों का नाम इंडियन बुलफ्रॉग है, जो दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के दलदली स्थानों में पाए जाते हैं. पहली बारिश का समय इनके प्रजनन काल का होता है, तो यह जोर गला फुलाते हुए टर्र टर्र की आवाज निकालते हैं और अपनी मादा साथी को अपने पास बुलाते हैं.

MP FROG COLOR CHANGE SPOTTED
मेंढक प्रजनन के समय पर बदलते रंग (ETV Bharat)

प्रजनन काल के समय नर एकदम चटक पीले रंग के दिखाई देते हैं. जबकि मादा भूरे और हल्के पीले रंग की होती है. इस दौरान मादा पोखर के जल में जैली की परत के जाल के साथ सैकड़ों अंडे देती है और नर उस पर शुक्राणु छोड़ देता है. यह क्रिया बाह्य निषेचन (एक्सटर्नल फर्टिलाइजेशन) कहलाती है. इन निषेचित अण्डों से कुछ दिनों में टेडपोल निकलते हैं, जो मछली की तरह गिल्स, गलफड़ों से स्वास लेते हैं.

निर्धारित समय बाद इनमें कायान्तरण होता है और पूंछ व गलफड़े समाप्त होने लगते हैं. व भुजायें और मजबूत पैर विकसित होने लगते हैं. इस तरह एक शिशु मेंढक का विकास होता है. जो अगर प्रकृति की मार से बच गया, तो वयस्क मेंढक का रूप लेकर फिर से इसी जीवन चक्र का हिस्सा बन जाता है.

FROGS CHANGE COLOR DURING BREEDING
मादा मेंढक को देखकर रंग बदलता है मेंढक (ETV Bharat)

सिर्फ बरसात में ही क्यों नजर आते हैं मेंढक

डॉ विकास शर्मा कहते हैं कि लोग अक्सर सोचते हैं कि साल भर ये मेंढक दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे ही बारिश होती है, तो हजारों की संख्या में ये न जाने कहां से आ जाते हैं. इस बात का उत्तर छिपा है एक और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक घटना में... जिसे ग्रीष्म निष्क्रियता कहते हैं, यह ठीक बर्फीले क्षेत्रों में पाए जाने वाले भालूओं कि शीत निष्क्रियता (Hibernation) के समान है. बारिश के बाद जब मिट्टी सूखने लगती है, तो ये सभी मेंढक कीचड़ या गीली मिट्टी में अंदर जाकर गहरी नींद में सो जाते हैं. जिससे इनकी ऊर्जा व्यर्थ नहीं होती और ये अगली बारिश में फिर प्रजनन करने के लिए गर्मियों कि विपरीत परिस्थितियों से बच जाते हैं."

MP FROG COLOR CHANGE SPOTTED
मेंढक प्रजनन के समय पर बदलते रंग (ETV Bharat)

हार्मोन्स बदलाव के कारण बदलते हैं रंग

डेनियलसन डिग्री कॉलेज में जंतु शास्त्र के प्रोफेशर एच आर वर्मा ने बताया कि "मेंढक के रंग बदलने में मेलाटोनिन और मेलानोसाइट-स्टिम्यूलेटिंग हार्मोन मुख्य भूमिका निभाते हैं. ये हार्मोन मेंढक की त्वचा में मौजूद क्रोमैटोफोर नामक रंग-बदलने वाली कोशिकाओं को नियंत्रित करते हैं. जब मेंढक को अपने आसपास के माहौल के अनुसार रंग बदलना होता है, तब पिट्यूटरी ग्रंथि ये रसायन छोड़ती है. इन रसायनों के प्रभाव से मेलेनिन पिगमेंट कोशिका के केंद्र में इकट्ठा हो जाता है या पूरी कोशिका में फैल जाता है. इससे मेंढक का रंग बदल जाता है.