अमेरिका की आर्मी का छिंदवाड़ा में मक्के के खेतों में अटैक! रात में हमला कर दिन में हो जाती है रफू चक्कर
छिंदवाड़ा में फॉल आर्मीवर्म कर रहा मक्के की फसल खराब. कृषि वैज्ञानिक बता रहे हैं कैसे करें इस कीट से बचाव. महेंद्र राय की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 10:45 PM IST
|Updated : September 3, 2026 at 2:45 PM IST
छिंदवाड़ा: अमेरिका से चलकर रात के अंधेरे में किसानों के खेतों में हमला बोल कर फसल मिनटों में चट कर जाती है और दिन में जाकर छिप जाती है. ऐसी आर्मी ने किसानों का जीना दूभर कर दिया है. बात फॉल आर्मीवर्म नाम के कीट की हो रही है जो मक्का का सबसे खतरनाक दुश्मन माना जाता है. छिंदवाड़ा में मक्के की फसल पर फॉल आर्मीवर्म ने अटैक कर दिया है और तेजी से मक्के की फसल को खराब कर रहा है.
आर्मी की तरह मक्के की फसल पर रात में अटैक
छिंदवाड़ा जिले में करीब 4 लाख हेक्टयर जमीन पर मक्के की फसल लगाई गई है. जिस पर सबसे खतरनाक कीट फॉल आर्मीवर्म का अटैक शुरू हो गया है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

किसान चंचलेश यदुवंशी ने बताया, "उनकी 3 एकड़ जमीन में मक्के की फसल लगी है, जिसे पूरी तरीके से फॉल आर्मीवर्म ने खा ली है. यह कीट पत्ते सहित डंठल को भी खा रहे हैं. इस कारण अब इस फसल में मक्का आना मुश्किल ही है. इसी तरह के उनके आसपास के खेतों में भी इस इल्ली का प्रकोप देखा जा रहा है."
रात में झुंड में फसलों पर करता है अटैक
छिंदवाड़ा आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ गौरव महाजन ने बताया, "यह एक खतरनाक किस्म का कीट होता है, जो 2018 में सबसे पहले अमेरिका से भारत में आया और कर्नाटक में देखा गया था. इसकी खासियत यह होती है कि रात में झुंड में फसलों पर अटैक करता है और दिन में यह दिखता नहीं है. यह पूरी तरीके से पौधों को तने से खा लेता है, जिससे फसल की ग्रोथ होना मुश्किल होती है. इसकी रोकथाम भी इसलिए मुश्किल होती है क्योंकि यह दिन में पौधों में दिखाई नहीं देता है."

फॉल आर्मीवर्म की पहचान का तरीका
कृषि वैज्ञानिक डॉ गौरव महाजन ने बताया, "इसके सिर पर अंग्रेजी के उल्टे 'Y' जैसा निशान होता है. इसको देखकर इस कीट की पहचान आसानी से कर सकते हैं. फॉल आर्मीवर्म की मादा कीट 1 दिन में 100 से 200 अंडे एक दिन में एक पत्ते पर देती है. इनके अंडे 3 से 5 दिन में फूट जाते हैं जो फसल के लिए खतरनाक होते हैं. यह इल्ली रात में सक्रिय होकर सामूहिक रूप से अटैक करती है जिसके कारण फसल को ज्यादा नुकसान होता है.
मक्के की फसल का बचाव का तरीका जानें
कृषि वैज्ञानिक डॉ गौरव महाजन ने बताया, "फॉल आर्मीवर्म का शुरुआती अवस्था में नियंत्रण बहुत जरूरी है. फसल शुरुआती विकास पर है तो इमामेक्टिन बेंजोएट (Emamectin Benzoate) 5% और SG की 80 से 100 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें. यदि फसल में भुट्टे बन रहे हैं तो क्लोरेंट्रानिलप्रोल 18.5% (Chlorantraniliprole) और SC की 80 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें. छिड़काव के साथ ही खेत में प्रति एकड़ 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं ताकि नर कीटों को पकड़ा जा सके.

पक्षियों के बैठने के लिए खेत में 'T' आकार के बर्ड पर्च लगाएं, जिससे कि पक्षी उस पर बैठने के बाद कीट को खा सकते हैं. कीटनाशक का छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करें, जब इल्लियां सक्रिय रूप से दिख रही हों. बारिश के मौसम में दवा न धुले, इसके लिए सिलिकॉन आधारित स्प्रेडर कैटलाइजर का उपयोग करें.

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3 साल पहले भी हुआ था फॉल आर्मीवर्म का अटैक
छिंदवाड़ा में मक्के की फसल 3 साल पहले भी फॉल आर्मीवर्म का अटैक हुआ था. इससे किसानों की मक्के की फसल का काफी नुकसान हुआ था. इसके नियंत्रण को लेकर कई तरह के रासायनिक कीटनाशक और घरेलू उपाय किए गए थे लेकिन फॉल आर्मीवर्म पर पूरी तरह कंट्रोल नहीं किया जा सका था. इसके कारण किसानों को करीब 60 फीसदी फसल का नुकसान हुआ था.


