पातालकोट में ओपन थिएटर का मजा, मांदर की थाप पर कर्मा शैला नाच, छुट्टियों का बेस्ट डेस्टिनेशन
एमपी टूरिज्म पातालकोट के तामिया में बनाने जा रहा ओपन थिएटर. 87 लाख 50 हजार रुपए का फंड जारी. आदिवासियों को मिलेगा रोजगार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 22, 2026 at 8:00 AM IST
छिंदवाड़ा: तामिया में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ओपन थिएटर बनाया जा रहा है. पर्यटकों की सुविधाओं को लेकर एमपी टूरिज्म के जरिए इस इलाके को विकसित किया जा रहा है. यहां पर पिछले लंबे समय से प्रस्तावित ओपन थिएटर को बनाए जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब इसके लिए फंड स्वीकृत हो चुका है. जल्द ही ओपन थिएटर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.
ओपन थिएटर में लोकल कलाकारों को मिलेगा मौका
जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार ने बताया कि "एमपीटी के जरिए तकरीबन 87 लाख 50 हजार रुपए तामिया में पर्यटकों की सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे. यहां पर ओपन थिएटर बनेगा, जिसमें लोकल कलाकारों को परफार्म करने का मौका मिलेगा. इसके अलावा तामिया में मिलने वाले पारंपरिक व्यंजनों के लिए आकर्षक हॉट बाजार भी बनाया जाएगा. खगोलीय घटनाओं को जानने के लिए केन्द्र सहित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पहुंचने के लिए अन्य मार्ग बनाए जाने का भी प्रस्ताव इसमें शामिल है. स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही इसका निर्माण शुरू होगा."

ओपन थिएटर में क्या होगा?
तामिया में पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास खाली भूमि में ओपन थिएटर बनाए जाने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान में यहां खाली भूमि और पेड़ों के आसपास चबूतरे का निर्माण हुआ है. ओपन थिएटर बनने के बाद यहां पर लोकल कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया जाना है. तकरीबन 150 लोगों की क्षमता वाले इस ओपन थिएटर में शुक्रवार, शनिवार और रविवार को सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम होंगे. इसी के पास पर्यटक इन्फारमेंशन सेंटर का भवन बना हुआ है. इसको भी रेनोवेट किया जाएगा जिसमें खगोलीय घटना देखने के लिए सेंटर बनाया जा रहा है.

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रोजगार के साथ परंपरा को सहेजने का प्रयास
भारिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दिनेश अंगरिया ने बताया कि "ओपन थिएटर बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा इसके साथ ही आदिवासी और पातालकोट की परंपराओं को सहेजने का भी प्रयास किया जाएगा. यहां के पारंपरिक शैला और गेड़ी नाच के अलावा प्रमुख रूप से कर्मा, सैला, छऊ, बिहू और ढप शामिल हैं. ये अक्सर मांदर, ढोल और बांसुरी की थाप पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ किए जाते हैं, जो खुशी, विवाह और त्योहारों के दौरान आयोजित होते है. इन्हें सहेजने के साथ-साथ देश और दुनिया से रू-ब-रू कराने का मौका मिलेगा."

